समस्या- गेहूं के कंडुआ रोग की पूरी पहचान कैसे की जाती है, कृपया बतायें। उपचार भी बतायें।

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– जगदीश चौरे, खंडवा
समाधान- गेहूं की कंडुआ बीमारी एक चोर बीमारी है इसकी कवक चोरी से परागीकरण क्रिया के समय ही परागकण के साथ मादा पुष्प में छिप जाती है। दाना सामान्य दाने के समान बनता है परंतु इसके भीतर छिपी कवक दानों को बुआई के बाद क्रियाशील होकर अंकुरित बीज के भीतर बैठी रहती है। और जैसे-जैसे पौधों का विकास होता है तनों के भीतर छिपकर बालियों को ग्रसित करती रहती है और जब बालियां खुलती हैं तो उसमें दानों की जगह काला काला चूर्ण पत्तियों की सिल्ली फाड़कर निकलती है यह चूर्ण कंडुआ के लाखों बीजाणु हवा द्वारा आसपास में लगे गेहूं को ग्रसित करते हंै। आज की कंडुआ की एक बाल लाखों दानों में घुसकर भंडारण तक और बाद में खेतों तक पहुंच जाती है। उपचार हेतु निम्न करें-

  • खेत में घूम कर कंडुआ ग्रसित पौधों को निकालकर पालीथिन बैग में इकट्ठा करें और नष्ट करें।
  • बीज का उपचार बुआई पूर्व 2 ग्राम वीटावैक्स प्रति किलो बीज के द्वारा अनिवार्य रूप से करना होगा।
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