रुबीट्रॉल से जैविक समाधान

Share this

रायपुर। छ.ग. धान का कटोरा कहा जाने वाला प्रांत जहां अधिकांश किसान खरीफ व रबी दोनों ही सीजन में धान की खेती करते हैं। बढ़ती फसल सघनता व एकरूपता के कारण ब्लास्ट (झुलसन) तथा शीथ ब्लाइट (पत्ती गलन) का प्रकोप उग्र होता जा रहा है, साथ ही धान में रसायनिक दवाईयों के प्रति प्रतिरोधकता बढ़ती जा रही है। ऐसी परिस्थितियों में जैविक समाधान का उपलब्ध होना और उन्हीं पर्यावरणीय परिस्थितियों में बीमारी से निजात पाने में बेहतर साबित होना, धान के किसानों के चेहरे में मुस्कान बिखेरने जैसा है। प्लांट बायोटिक्स, जायटेक्स, बायोटेक प्रा. लि. मुंबई का ‘रुबीट्रॉल जो एक बैक्टीरिया बैसिलस सबरिलिस की प्रजाति है, अत्यंत कारगर साबित हो रही है। इसके 1 ग्राम पावडर में दो अरब बैक्टीरिया मौजूद हैं। रुबीट्रॉल पौधे के प्रतिरक्षात्मक तंत्र को इतना मजबूत बनाता है कि पौधा ब्लास्ट व शीथ ब्लाइट के कवक का प्रवेश ही अवरुद्ध कर देता है, अर्थात् रुबीट्राल का उपयोग बचावकारी अथवा प्रारंभिक अवस्था में उपचारकारी 2.5 ग्राम/लीटर जल की दर से बेहतर व संतोषजनक परिणाम देता है। इस बार श्री बिसोहा साहू (सरपंच) ग्राम बगतराई, जिला धमतरी (छ.ग.) ने भी इस्तेमाल किया और संतुष्ट होकर अन्य किसानों को भी अनुशंसित कर रहे हैं। रुबीट्रॉल पौधे को बीमारीमुक्त रखकर उसे अधिकतम उत्पादन देने में मदद करता है। यह जैविक होने के कारण हमारे सेहत, पर्यावरणीय सेहत और मृदा के सेहत को बिना नुकसान पहुंचाये साथ ही पौधे की स्व प्रतिरक्षा प्रणाली को भी सुदृढ़ बनाता है।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।