प्रदेश के विकास के लिये समर्पित नदी के प्रवाह से सरल राजेन्द्र शुक्ल

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किसी सदानीर नदी के तट पर खड़े होकर उसके प्रवाह को देखा है आपने….? शांत, निर्मल…. एक ताल में जैसे एक सुर में…..निरन्तर कल-कल कर बहती हुई….एक अलौकिक शांति का अनुभव होता है उस शांति के पीछे सुनाई देता है सुकून और तसल्ली का मद्धम-मद्धम सा कर्णप्रिय संगीत का स्वर….। बस ऐसा ही व्यक्तित्व है राजेन्द्र शुक्ल जी का। एक ऐसा व्यक्तित्व जिस पर मंत्रित्व की झलक तक नजर नहीं आती। सहजता…सरलता, निरंतर आगे बढऩा…चैरेवेति……..चरैवेति एक कर्मयोगी की जीवन यात्रा…. जिसमें संघर्ष और उपलब्धियों के पड़ाव आये…लेकिन यात्रा रुकी नहीं….अनवरत जारी है।
यहां याद आता है.
सांई इतना दीजिये जामे कुटुम्ब समाय।
मैं भी भूखा न रहूं, साधु न भूखा जाये।

 

विंध्य क्षेत्र का विकास
श्री शुक्ल ने विन्ध्य क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा पर्यटन विकास को प्राथमिकता में रखा हैं। अपने क्षेत्र के विकास के लिये उनके ड्रीम प्रोजेक्ट्स मुकुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी, चाकघाट से इलाहाबाद और हनुमना से बनारस फोर-लेन सड़कों का निर्माण हो अथवा गुढ़ में विश्व के सबसे बड़े 750 मेगावॉट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना हो।
श्री शुक्ल ने रीवा के चौतरफा विकास में विशेष रूचि ली हैं। इसी के चलते रीवा विकास शहर के रूप में उभरा है। उन्होंने महत्वपूर्ण लो कास्ट एयरपोर्ट स्वीकृत करवाया। इससे रीवा सहित पूरे विन्ध्य को यातायात और संचार के साधन मिलेंगे जो क्षेत्र का कायाकल्प कर देंगे। श्री शुक्ल विकास कार्यों के लिये धुन के पक्के माने जाते हैं। रेल बजट में रीवा-राजकोट ट्रेन प्रारंभ किये जाने की घोषणा हुई थी। श्री शुक्ल ने इसकी पहल 3 नवम्बर, 2006 को विधायक की हैसियत से विधानसभा में अशासकीय संकल्प लाकर की थी। उनके इस अशासकीय संकल्प को पक्ष तथा विपक्ष के सदस्यों ने समर्थन करते हुए सर्व-सम्मति से मंजूर किया था। श्री शुक्ल का अकाट्य तर्क है कि रीवा-राजकोट ट्रेन

प्रारंभ होने से विन्ध्य क्षेत्र का चतुर्दिन आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विकास होगा। इस ट्रेन के चलने से विन्ध्य के साथ ही बुंदेलखंड के जिलों के लोगों को भी सुविधा होगी। उनकी इस पहल से रीवा को गुजरात जैसे समृद्ध राज्य से सीधा जुडऩे का मौका भी मिलेगा।
श्री शुक्ल को तीन कार्यकाल में मंत्रीमंडल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली। वे मंत्री पद की कसौटी पर खरे भी उतरे। नेतृत्व के प्रति निष्ठा और राज्य सरकार के लक्ष्यों को पूरा करने की प्रतिबद्धता श्री शुक्ल की विशेषता है। बिजली संकट से जूझते हुए मध्यप्रदेश को रोशन करने की चुनौती उन्हें मिली। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की मंशा के अनुरूप उन्होंने प्रदेश के बिजली संकट से उबारा। पिछले दस साल में प्रदेश में बिजली की उपलब्ध क्षमता में 9,373 करीब मेगावाट की रिकार्ड वृद्धि उनके ही कार्यकाल में दर्ज हुई। अटल ज्योति अभियान, जो मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट था, को श्री शुक्ल ने प्रदेश के गाँवों और शहरों को 24 घंटे बिजली देकर पूरा किया। साथ ही किसानों को सिंचाई के लिये 10 घंटे बिजली प्रदाय की गई। अमले की कमी से जूझ रहे ऊर्जा विभाग में 15 साल से बंद भर्ती प्रक्रिया को शुरू किया। विद्युत कंपनियों में लगभग 10 हजार से अधिक विद्युत इंजीनियर एवं लाईनमेन की भर्ती की।
ओहदा उनके लिये कभी पहचान नहीं बना। श्री शुक्ल से ओहदे की पहचान बनी है। धीर-गंभीर ऋषि मुनि मानव सेवा के लक्ष्य में एक तपस्वी की तरह लीन रहना उनका लक्ष्य है। उनकी सेवा भावना की तपस्या को कभी किसी पद का लालच भंग करने का साहस ही नहीं जुटा पाया है। लोगों के जीवन में थोड़ी खुशियाँ ला सके और उनके दिलों में यह अहसास जगा सके कि कोई उनका अपना है, अपने इस उद्देश्य में श्री राजेन्द्र शुक्ल पूरी तरह सफल हैं।

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