ट्रैक्टर बाजार का बूम थमा

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। भारतीय ट्रैक्टर बाजार के लिये गत वित्तीय वर्ष निराशाजनक रहा। वित्तीय वर्ष 2013-14 में आशातीत प्रदर्शन के बाद हाल ही में समाप्त वित्तीय वर्ष 2014-15 में ट्रैक्टर बाजार के उत्साह पर पानी फिर गया। उम्मीद की जा रही थी वर्ष 2013-14 की तुलना में 2014-15 में ट्रैक्टर बिक्री में वृद्धि दर्ज की जायेगी परंतु वर्ष के अंत तक ट्रैक्टर बिक्री का आंकड़ा वृद्धि तो दूर बराबरी तक पर नहीं टिक पाया। वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद बाजार के विशेषज्ञों द्वारा प्रारंभिक आकलन में लगभग 25′ गिरावट का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। जबकि वर्ष 2013-14 में वर्ष 2012-13 की तुलना में 18′ वृद्धि दर्ज की गई थी। हालांकि गत वर्ष की विक्रय वृद्धि को दृष्टिगत रखते हुए कई अग्रणी कम्पनियों ने अपने महत्वाकांक्षी ट्रैक्टर मॉडलों को बाजार में उतारा था। ट्रैक्टर बाजार में आई इस राष्ट्रीय आपदा से म.प्र.-छग का ट्रैक्टर बाजार भी अछूता नहीं रहा। सूत्र बताते हैं कि वर्ष 2013-14 में जितनी विक्रय वृद्धि ट्रैक्टर बाजार ने हासिल की थी उससे लगभग दुगनी गिरावट इस वित्तीय वर्ष (2014-15) में दर्ज की जाने की संभावना है। मध्यप्रदेश में वर्ष 2013-14 में 25′ विक्रय वृद्धि के साथ 87 हजार ट्रैक्टरों की रिकार्ड बिक्री हुई थी। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 50′ से अधिक विक्रय वृद्धि के साथ 24 हजार ट्रैक्टरों की बिक्री हुई थी। ट्रैक्टर बाजार में इस कदर गिरावट से जहां ट्रैक्टर निर्माता कंपनियां स्तब्ध हैं, वहीं विक्रेता आश्चर्यचकित हैं। गत वर्ष की रिकार्ड बिक्री की तुलना में इस वर्ष 2014-15 में गिरावट की उम्मीद सभी को थी लेकिन गिरावट का ग्राफ इतना नीचे जायेगा इसकी उम्मीद नहीं थी। ट्रैक्टर बाजार के विशेषज्ञ अपनी समीक्षा में इस गिरावट का प्रमुख कारण वर्ष 2013-14 की तुलना में वर्ष 2014-15 में निजी फाइनेंस कम्पनियों द्वारा ट्रैक्टर फाइनेंस में कमी को मानते हैं। तुलना के लिये बेस ग्राफ की रिकार्ड ऊंचाई भी एक प्रमुख कारण है। इसके कारण अधिक गिरावट दिखाई दे रही है। बहरहाल समीक्षाओं के दौर के बीच ट्रैक्टर उद्योग इस झटके से उबरने के प्रयस में लगा है। उद्योग के विक्रय रणनीतिकारों को भी ‘बीति ताहि बिसार दे आगे की सुध ले’, इस उक्ति को चरितार्थ करते हुए नये वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिये रणनीति बनानी होगी।

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