कृषि महाविद्यालय भूमि विवाद विश्वविद्यालय बनने का प्रस्ताव खटाई में

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इन्दौर। प्रशासन द्वारा जिला कोर्ट के निर्माण हेतु कृषि महाविद्यालय की भूमि अधिग्रहित किये जाने पर महाविद्यालय की मान्यता ही खतरे में पड़ जायेगी जो कि प्रदेश के लिए विशेषकर मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लिये दुर्भाग्यपूर्ण होगा। पूर्व में भी जिला प्रशासन ने रिंग रोड के निर्माण के लिये 22 एकड़ जमीन अधिग्रहित कर चुका है। विशेषकर मालवा क्षेत्र के कृषि विकास में इस महाविद्यालय का अत्यधिक योगदान रहा है। इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए कृषि महाविद्यालय को विश्वविद्यालय के रूप में विस्तारित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है, लेकिन प्रशासन के इस कदम से विस्तार का यह प्रस्ताव खटाई में पड़ सकता है।
इस बीच कृषि महाविद्यालय की भूमि के गैर कृषि उपयोग के विरोध में एल्यूमिन एसोसिएशन के साथ भारतीय किसान संघ, आम किसान यूनियन, भारत किसान यूनियन (टिकैत), राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ, ऑल इंडिया एसोसिएशन ऑफ एग्रीकल्चर ग्रेजुएट, कृषि महाविद्यालय के पूर्व छात्र, अन्य सामाजिक संगठनों एवं गणमान्य नागरिकों ने एकजुट होकरर धरना-प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है। जिसमें पद्मश्री कुट्टी मेनन, पद्मश्री भालू मोड़े, राष्ट्रीय कृषि वैज्ञानिक डॉ. ए.आर. डाभोलकर, सामाजिक संगठन नर्मदा के श्री सुधीर घोडग़ांवकर, श्री अजीज अंसारी, श्री नवल सिंह रघुवंशी, भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष श्री आनन्द सिंह ठाकुर, महासंघ के प्रचारक श्री दिलीप पाटीदार, श्री धर्मेन्द्र चौधरी, श्री केदार सिरोही, पूर्व कृषि छात्र संघ के संरक्षक श्री आर.डी. यादव, उपाध्यक्ष डॉ. अखिलेश सराफ, सचिव श्री संजय जैन, प्रचार सचिव श्री के.सी. गुप्ता, श्री विजय झाला, श्री विजय ओसवाल तथा कई पूर्व छात्र व गणमान्य नागरिक शामिल हुए। मध्य प्रदेश कृषि अधिकारी संघ ने भी कलेक्टर इन्दौर को सौंपे ज्ञापन में कृषि महाविद्यालय की भूमि अधिग्रहण की स्थिति में महाविद्यालय की मान्यता को भा.कृ.अ.प. के नियमानुसार समाप्त होने का खतरा बताते हुए निर्माण के प्रस्ताव को निरस्त करने की मांग की है। एल्यूमिन एसोसिएशन के प्रवक्ता ने बताया कि इस आंदोलन को आगे और भी विस्तारित किया जायेगा।

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