आस्था की डुबकी लगायें

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क्षिप्रा नदी का जल- स्नान एवं आचमन योग्य

सिंहस्थ कुंभ के दौरान क्षिप्रा नदी में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा चार पाईप लाईन डाली गई हैं, जो त्रिवेणी, लालपुल, रामघाट, मंगलनाथ पर हैं। इस तरह की व्यवस्था पहली बार नदी में की गई है। शिप्रा की अविरलता एवं तटीय जल बनाये रखने के लिये खान नदी का डायवर्शन कर दो एमसीएम पानी छोड़ा गया है।

क्षिप्रा जल को केन्द्रीय जल शुद्धता मापदंडों के अनुसार शुद्ध, गुणवत्तायुक्त, स्नान एवं आचमन योग्य बनाया गया है। क्षिप्रा जल में ओजोन ब्रिड तैयार की गई है। यह ओजोनेशन प्लांट पर जनरेट की जा रही है। पानी की गुणवत्ता बनाए रखने के लिये पाँच एमजी से अधिक डिजिटल ऑक्सीजन एवं 7 एमजी से अपर नार्मल करने के लिये डीओडी उससे कम रखी जा रही है। इसका समय-समय पर परीक्षण किया जा रहा है, इससे क्षिप्रा का जल आचमन योग्य बना हुआ है। वायु एवं ध्वनि प्रदूषण को मापने के लिये प्रत्येक घाट में वायु प्रदूषण मापक यंत्र लगाये गये हैं।

श्रद्धालुओं को एक क्लिक पर सिंहस्थ की जानकारी

सिंहस्थ महाकुंभ में शामिल होने के इच्छुक और उज्जैन पहुँचे श्रद्धालुओं को सिंहस्थ से संबंधित कोई भी जानकारी जुटाने के लिए परेशान नहीं होना पड़ रहा है। वे सिंहस्थ की वेबसाइट पर क्लिक कर इससे जुड़ी सभी जानकारी हासिल कर रहे हैं।
जनसम्पर्क विभाग द्वारा तैयार की गई इस वेबसाइट पर महाकालेश्वर, उज्जैन कलेक्टर, मध्यप्रदेश पर्यटन, रेलवे आदि महत्वपूर्ण लिंक भी मौजूद हैं। गूगल मेप भी उज्जैन घूमने में मददगार साबित हो रहा है।
सिंहस्थ की लिंक पर क्लिक कर महाकाल के लाइव दर्शन भी कर सकते हैं। इसका लाभ वे श्रद्धालु ले सकते हैं जो किसी कारणवश उज्जैन नहीं पहुँच पा रहे हैं। वेबसाइट पर सिंहस्थ के सम्पूर्ण सन्दर्भ उपलब्ध हैं। महाकाल की नगरी, श्रीकृष्ण की शिक्षा का केन्द्र, महाकवि कालिदास की भूमि, राजा विक्रमादित्य की नगरी, उज्जैन के इतिहास को जानना हो या फिर किन-किन घाटों पर स्नान की व्यवस्था रहेगी, किन तारीखों में विशेष स्नान होंगे, यह सब कुछ आप इस वेबसाइट पर जान सकते हैं। इस पर सर्फिंग करते हुए सिंहस्थ महापर्व, समुद्र मंथन, ज्योतिषीय महत्व, अमृतमयी क्षिप्रा नदी, घाट, अखाड़ों और सिंहस्थ-2016 की पूरी जानकारी प्राप्त हो सकेगी।
होम पेज पर उपलब्ध सिंहस्थ लिंक पर उज्जैन कैसे पहुँचें, होटल, लॉज और धर्मशाला की जानकारी भी है। होम पेज पर ही उज्जैन के बारे में लिंक पर सर्च कर शहर के गौरवशाली अतीत की जानकारी प्राप्त की जा सकेगी। इसके अलावा काल गणना केन्द्र, मोक्ष नगरी, श्री महाकालेश्वर, 84 महादेव, पंचक्रोशी परिक्रमा यात्रा सहित अन्य मंदिरों के विवरण के साथ ही निकटवर्ती स्थलों की जानकारी भी इस वेबसाइट में दी गई हैं। वहीं विशिष्ट व्यक्ति की लिंक पर राजा विक्रमादित्य, सान्दीपनि ऋषि एवं महाकवि कालिदास का विवरण भी मौजूद है।

मेला क्षेत्र में बिना रोक-टोक जा सकेंगे वाहन

नि:शुल्क लाने-ले जाने 400 बस की व्यवस्था

सिंहस्थ महाकुंभ के मेला क्षेत्र में अब वाहन बिना किसी रोक-टोक के आ-जा सकेंगे। करीब 400 बस मेला क्षेत्र में श्रद्वालुओं को लाने, ले जाने के लिए लगाई गई हैं। इन बसों में श्रद्वालुओं को कोई किराया नहीं देना होगा।
सिंहस्थ मेला क्षेत्र में लगभग 5000 पंडाल लगाए गए हैं। इन पंडालों में आध्यात्मिक संतों के प्रवचन तथा कथा का वाचन हो रहा है। मेले में लगभग 500 अन्न क्षेत्र भी संचालित हैं। राज्य सरकार की ओर से साधु-संतों को नि:शुल्क बिजली और रियायती दर पर राशन उपलब्ध करवाया जा रहा है। कुम्भ मेले में प्रतिदिन संस्कृति विभाग द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
पंचक्रोशी परिक्रमा के लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। इसमें 10 लाख से अधिक श्रद्वालु भाग लेंगे। सिंहस्थ महापर्व में आने वाले श्रद्वालुओं को असुविधा न हो इस दृष्टि से मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर पहले शाही स्नान के बाद यातायात व्यवस्थाओं में परिवर्तन किया गया है। मेला क्षेत्र में नई पार्किंग सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। पुलिसकर्मी भी श्रद्धालुओं से सौजन्य व्यवहार करें, इसकी हिदायत दी गई है। मेला क्षेत्र में श्रद्वालु बड़ी तादाद में पहुँचकर साधु-संतों के आश्रम और पंडालों में धर्म-आस्था, आध्यात्म, भक्ति, पूजा-अर्चना और देवदर्शन कार्यक्रम का लाभ उठा रहे हैं। महाकाल मंदिर में दर्शन और श्रद्वालुओं की सुविधा के लिए वीआईपी व्यवस्था को पूरी तरह रोक दिया गया है। यह व्यवस्था कुंभ मेले में बढ़ती भीड़ को देखते हुए की गई है। सिंहस्थ में संत और श्रद्वालुओं की सुविधा को ध्यान रखना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। मेला क्षेत्र में साफ-सफाई से लेकर घाटों की बेहतर व्यवस्था और बिजली की खुबसूरत रोशनी लोगों के आकर्षण का केन्द्र बनी हुई है।

श्रद्धालुओं की सेहत का ख्याल

बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन पहुँच रहे श्रद्धालुओं और आमजनों की सेहत को दुरूस्त रखने के लिए स्वास्थ्य अमला शिद्दत से जुटा है। श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों और मौसमजन्य कठिनाईयों का समुचित उपचार कर उन्हें स्वास्थ्य लाभ पहुँचाने में स्वास्थ्यकर्मी पूरे मनोयोग से जुटे हुए हैं। अभी तक कई मरीजों को अनुभवी चिकित्सकों, पेरामेडिकल दल ने स्वास्थ्य-जाँच, उपचार सेवाएँ दी जा चुकी हैं। मरीजों को त्वरित रूप से स्वास्थ्य लाभ मिले, इसके समुचित इंतजाम किये गये हैं।
सम्पूर्ण मेला क्षेत्र में अस्थाई रूप से बनाए गए अस्पताल की जानकारी के लिये ग्लोसाइन-बोर्ड्स (संकेतक) भी लगाए गए हैं। सम्पूर्ण मेला क्षेत्र के 6 झोन में अस्थाई अस्पताल बनाए गए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार द्वारा चाक-चौबंद व्यवस्था

24 घण्टे दूध उपलब्ध

सिंहस्थ मेला क्षेत्र में भरपूर दूध उपलब्ध करवाया जा रहा है। यहाँ साँची दुग्ध संघ के 151 मिल्क स्टॉल्स बने हुए हैं। प्रत्येक स्टॉल में 1000 ली. दूध स्टोरेज की क्षमता है।

बिछुड़ों को मिलवा रहा है शौर्या-दल

कुम्भ मेले में गुम अथवा बिछुडऩे वालों को सही सलामत उसके परिवार से मिलवाने के लिए खोया-पाया केन्द्र में तैनात शौर्या-दल मुस्तैदी से कार्य कर रहे हैं। महिला-बाल विकास विभाग के शौर्या-दल में 151 सदस्य हैं, जो स्वयंसेवक के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

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