किसानों की आमदनी दुगुनी करने में

पौध संरक्षण रसायनों की अहम भूमिका

(सुनील गंगराड़े)

पूरे विश्व में कृषि उत्पादन में भारत दूसरे स्थान पर है और साल दर साल इसमें बढ़ोत्री हो रही है। भारतीय कृषि की सुनहरी तस्वीर के साथ-साथ इसकी उत्पादन प्रक्रिया, कृषि आदान के उपयोग, खेती में हानि, फसल सुरक्षा, रसायनों के दुष्प्रभाव की स्याह लकीरें भी जब तब उभर कर आती हैं।

गत 12 वर्षों में देश की कृषि उपज 87 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 332 बिलियन अमरीकी डॉलर पर पहुंच गई है। सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान 17 प्रतिशत है। भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि ने मजबूती से आधार दिया है। टाटा स्ट्रैटजिक प्रबंधन समूह की एक रिपोर्ट के मुताबिक खाद्यान्न के अलावा दुग्ध उत्पादन, सब्जी-फल उत्पादन आदि में भारत प्रथम 5 देशों में अपना स्थान रखता है।

भारत में भारत में खेती 
0.6 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर पेस्टीसाईड का उपयोग 15 करोड़ 70 लाख हेक्टेयर में होती है
25 प्रतिशत फसल कीट, रोग, खरपतवार से नष्ट 2 रे स्थान पर विश्व में कृषि उत्पादन में
2  लाख करोड़ रु. की  हानि प्रति वर्ष 50 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती से जुड़ी

भारतीय कृषि की समस्त उपलब्धियों के बावजूद देश में किसान अनेक समस्याओं, चुनौतियों से जूझ रहा है। मानसून पर निर्भरता, अनिश्चित वर्षाकाल, खेती की घटती जमीन, कम उत्पादकता, कीट-रोगों की बढ़वार, ऐसी अनेक समस्याओं के साथ घटती आय भी एक कारण है जिससे किसान खेती से विमुख होता जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक विश्व में फसल उत्पादन का 25 प्रतिशत अंश कीट, रोग, खरपतवार के कारण नष्ट हो जाता है इसलिए फसल उत्पादकता में कृषि रसायनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।

हाल के वर्षों में अनेक स्वसेवी संगठन जैविक खेती की वकालत करते हुए कीटनाशकों के उपयोग पर सवाल उठाने लगे हैं। परंतु इसी संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक विकसित और विकासशील देशों की तुलना में भारत में कीटनाशक एवं अन्य रसायनों का उपयोग कम मात्रा में होता है। भारत में क्रॉप प्रोटेक्शन केमिकल्स की खपत यूके (2.8 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) और जापान (12.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) की तुलना में सबसे कम 0.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है ( देखें चार्ट )।

जैविक तरीके से की गई खेती के वास्तविक आंकड़े केन्द्रीय कृषि मंत्रालय या अन्य प्रदेशों के कृषि विभागों के पास भी उपलब्ध नहीं है। सिक्किम की जैविक राज्य के रूप में प्रसिद्धि है पर पिछले कुछ वर्षों में सिक्किम का अनाज उत्पादन 30 प्रतिशत घटा है और सब्जियों की उत्पादकता भी देश में सबसे कम (5 टन प्रति हेक्टेयर है)। विशेषज्ञों का तर्क है कि सिक्किम मॉडल को अन्य राज्यों ने भी अपना लिया तो क्या खाद्यान्न संकट हो सकता है? यह जवाब तो भविष्य के गर्भ में है।

इस दिशा में एग्री एक्सटेंशन मशीनरी की अहम भूमिका है जो किसानों को श्रेष्ठ कृषि पद्धति, कीटनाशकों के विवेकपूर्ण, संतुलित एवं आवश्यकतानुसार उपयोग के प्रति जागरुक करे। साथ ही सरकार उन नकली कीटनाशक निर्माताओं के प्रति भी कड़ी कार्यवाही करे, जो नकली, डुप्लीकेट, घटिया कृषि रसायन किसानों को बेच रहे हैं। कृषि रसायन उद्योग के अनुमान के मुताबिक लगभग 5 हजार करोड़ का नकली कीटनाशक बाजार में उपलब्ध है। बॉयो प्रोडक्ट्स के नाम पर तो लेबल लगाकर किसानों को दिन-दहाड़े ठगा जा रहा है।
किसानों की आमदनी दुगुनी करने, खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों को समृद्ध करने के लिए विभिन्न कारकों का समन्वित प्रयोग करना होगा। इसमें सरकार के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भी अहम भूमिका होगी।

 

www.krishakjagat.org

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