इस वर्ष बी.टी. कंपनियों का सेल प्लान आधा किया सरकार ने

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(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। देश एवं प्रदेश में खरीफ सीजन प्रारंभ हो गया है। प्री- मानसून की बौछारें प्रदेश के कई जिलों में पड़ रही है। मालवा-निमाड़ के कुछ क्षेत्रों में नगदी फसल कपास की बोनी प्रारंभ हो गई है परन्तु इसी बीच उपज का उचित मूल्य न मिलने के कारण किसानों ने आंदोलन भी प्रारंभ कर दिया है। नाराज अन्नदाता सड़क पर दूध, फल, प्याज एवं अन्य सब्जियां फेंक रहे हैं जिससे आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है। दूसरी तरफ किसानों का एक तबका खेत तैयार कर कपास की बोनी में जुट गया है।
गत वर्ष डॉलर चने में भाव अच्छे मिलने के कारण व मिर्ची की फसल में गत वर्षों की तरह वायरस के प्रकोप व भाव अच्छे न मिलने के कारण कृषकों का रुझान कपास की खेती में बढ़ा है। सरकार एवं बीज कंपनियां भी सक्रिय हो गई है। हाल ही में सरकार ने इस वर्ष बी.टी. काटन की 38 नई किस्मों को विक्रय अनुमति प्रदान की है। जबकि 97 किस्मों का प्रस्ताव दिया गया था। कुल मिलाकर सरकार ने कंपनियों की नई किस्मों का सेल प्लान आधा कर दिया है।
प्रदेश में कपास का रकबा लगभग 6 लाख हेक्टेयर है। इसमें केवल बी.टी. कॉटन लगभग 5 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बोई जाती है। इस वर्ष बी.टी. कॉटन की 29 कंपनियों ने 97 नई किस्मों के कुल 7 लाख 89 हजार से अधिक पैकेटों की विक्रय अनुमति के लिये सेल प्लान दिया था, परंतु राज्य स्क्रूटनी कमेटी ने 23 कंपनियों की 38 नई किस्मों के कुल 3 लाख 32 हजार से अधिक पैकेटों की विक्रय अनुमति दी है। इस प्रकार 59 किस्मों के कुल 4 लाख 56 हजार से अधिक पैकेटों को विक्रय अनुमति नहीं मिली। इन किस्मों के पुन: ट्रायल के निर्देश दिए गए हैं।
जानकारी के मुताबिक फेल होने वाली 59 नई किस्मों में मुख्यत: सोलर अर्गोटेक कंपनी का 21 हजार पैकेट का प्लान, श्रीराम बायोसीड जेनेटिक्स का 51400 पैकेट, प्रभात एग्रीबायोटेक का 15000 पैकेट, नियोसीड्स का 4000 पैकेट, आर.जे.बायोटेक का 8000 पैकेट का प्लान था। इसी प्रकार कोहिनूर सीड्स के 4940 पैकेटों के प्लान में से केवल दो किस्मों के 1745 पैकेटो को, मानसेंटो होल्डिंग्स के 29000 पैकेटों में से 16500 पैकेटों एवं कृषि धन सीड्स के 70 हजार पैकेटों में से 30 हजार पैकेटों को विक्रय अनुमति दी गई है। इसी प्रकार अजीत सीड्स, नवकार, मेटाहेलिक्स, जुआरी एग्री साइंस की भी कतिपय किस्मों को अनुमति नहीं दी गई है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक तीन वर्ष का ट्रायल पूरा करने वाली 24 किस्मों को शत-प्रतिशत विक्रय प्लान के मुताबिक अनुमति दी गई है। साथ ही जिन किस्मों के ट्रायल परिणाम दो वर्ष तक सिगनिफिकेंट और एक वर्ष एटपार रहे हैं ऐसी 14 किस्मों को विक्रय प्लान का केवल 50 प्रतिशत बेचने की अनुमति दी गई है।
जानकारी के मुताबिक पूर्व के वर्षों में जारी बीटी कॉटन की किस्मों को दी गई अनुमति को पुन: इस वर्ष 2017-18 में नवीनीकरण करने पर 28 कम्पनियों के 26 लाख 49 हजार 900 से अधिक पैकेटों को विक्रय की अनुमति दी गई है। इस प्रकार इस वर्ष कुल लगभग 30 लाख बीटी कॉटन बीजों के पैकेट विक्रय करने की कंपनियों को अनुमति मिली है।

नान-बीटी की 17 कंपनियों के लाइसेंस रद्द
महाराष्ट्र सरकार ने गत सप्ताह गैर-बीटी कपास हाइब्रिड बीजों की आपूर्ति करने के आरोप में 17 बीज कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने का आदेश जारी किया। इन कंपनियों में मोनसैंटो-माहिको समेत अन्य कंपनियां शामिल हैं और वे महाराष्ट्र में 70 प्रतिशत से अधिक बीटी कपास बीज की जरूरतें पूरी करती हैं। राज्य में ऐसे बीजों की कुल बिक्री करीब एक करोड़ पैकेट (प्रत्येक में 450 ग्राम) होती है। इसका मूल्य 800 करोड़ रुपये है।
यह आदेश कृषि निदेशक कृषि आयुक्त, पुणे ने जारी किया था। गैर-बीटी बीज का इस्तेमाल पिंक बोलवर्म को आकर्षित करने के लिए किया जाता है जिससे कि बीटी फसल पर इन कीड़ों का हमला रोका जा सके। इन गैर-बीटी कॉटन हाइब्रिड के लाइसेंस इस आधार पर रद्द किए गए हैं कि कथित गैर.बीटी कॉटन हाइब्रिड बीज के खास नमूनों में बीटी का खास प्रतिशत पाया गया है। बीज कंपनियों को पिछले साल महाराष्ट्र सरकार से नोटिस जारी किए जाने के तुरंत बाद इन 17 बीज कंपनियों ने सरकारी बीज जांच प्रयोगशाला की रिपोर्ट का विरोध किया और बीज अधिनियम 1966 की धारा 16 (2) के प्रावधानों के तहत अधिकारियों से रेफरल लैबोरेटरीज को नमूना भेजने का अनुरोध किया था। केंद्रीय कपास शोध संस्थान (सीआईसीआर), नागपुर को बीज अधिनियम के तहत संदर्भ लैबोरेटरी अधिसूचित किया गया है।

 

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