सोयाबीन कृषकों को इस सप्ताह की सलाह

इंदौर। 27 अगस्त से 2 सितम्बर के चालू सप्ताह के लिए सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने सोयाबीन किसानों को मौसम विभाग के आंकड़ों और कीट प्रकोप विश्लेषण के अनुसार प्रदेश के नरसिंहपुर जिले और महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में गर्डलबीटल, भोपाल, छिंदवाड़ा, धार और महाराष्ट्र के अकोला, वर्धा और चंद्रपुर में हेलियोथिस आर्मीजेरा (चने की इल्ली), जबकि भोपाल, दमोह, गुना, रायसेन, सागर, बैतूल, रतलाम, सिवनी, छतरपुर, खरगोन, नरसिंहपुर, शाजापुर, टीकमगढ़, उज्जैन और महाराष्ट्र के नांदेड़, नासिक, परभणी, वर्धा, चंद्रपुर, अकोला, अमरावती, सांगली और राजस्थान के बूंदी , चित्तौडग़ढ़, कोटा में स्पेडोप्टेरा (तम्बाकू की इल्ली) तथा धार के अलावा महाराष्ट्र के कोल्हापुर में सेमीलूपर कीट का प्रकोप अधिक होने की आशंका जताई गई है।

सोयाबीन की फसल पर एन्थ्रेक्नोज और पॉड ब्लाइट के प्रकोप के चलते इसके नियंत्रण हेतु थायोफिनाइट मिथाईल 1 किलोग्राम/ हेक्टर या टेबुकोनाझोल + सल्फर 1 ली./हे., अथवा हेक्ज़ाकोनाझोल 500 मिली./हे. अथवा पायरोक्लोस्ट्रोबिन 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। इसी तरह लाल मकड़ी का प्रकोप देखे जाने पर इथियॉन डेढ़ लीटर/हे. की दर से 500 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। इसी तरह मप्र, महाराष्ट्र और राजस्थान के कुछ जिलों में चने की इल्ली, सेमीलूपर, तम्बाकू की इल्ली और सफ़ेद मक्खी का प्रकोप होने की खबरों को देखते हुए इस पर नियंत्रण पाने के लिए पूर्व मिश्रित कीटनाशक थायोमिथाक्सम + लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली/हे. अथवा बीटासाइफ्लूथ्रिन+इमिडाक्लोप्रिड 650 मिली/ हे. या इंडोक्साकार्ब 330 मिली/हे. की दर से 500 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।

गर्डलबीटल का प्रकोप शुरू होने पर थाइक्लोप्रिड 21.7 एससी 650 मिली/हे. अथवा ट्राइजोफॉस 40 ईसी 800 मि.ली /हे. की दर से छिड़काव करें। फसलों की सतत निगरानी रखें और तम्बाकू की इल्ली या बिहार की रोएंदार इल्ली ग्रसित समूहों को पहचान कर नष्ट करें। पीला मोजाइक को फ़ैलाने वाली सफ़ेद मक्खी को रोकने के लिए यलो स्टिकी ट्रैप लगाएं। इस रोग से ग्रसित पौधों को नष्ट करें। वर्षा अधिक होने पर सोयाबीन के खेत में जल भराव न होने दें। जहां पिछले दिनों कम वर्षा हुई है उन क्षेत्रों में चारकोल रॉट नामक रोग लगने की आशंका है, जिसे फसल को सिंचाई कर नियंत्रित किया जा सकता है।

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