भावान्तर शिवराज सरकार के ताबूत में अंतिम कील है

किसान नेता ‘कक्काजी’ का आक्रोश

9 अगस्त से ‘अन्नदाता अधिकार यात्रा’ करेंगे

(कृषक जगत)
जब किसानों को मंडी में चने के दाम नहीं मिले तो किसानों के अग्रणी नेता श्री शिवकुमार शर्मा ‘कक्काजी’ ने सरकार को नाकों चने चबवा दिए। 2010 में म.प्र. की राजधानी भोपाल में हजारों किसानों के साथ मुख्यमंत्री निवास के पास धरना दिया था और प्रमुख रास्तों को ट्रैक्टर ट्राली से जाम कर किसानों को ताकत बताई थी। आपके मुताबिक सरकार की भावान्तर भुगतान योजना में केवल व्यापारियों को लाभ हुआ है। अपनी बात को विस्तार देते हुए कक्काजी बताते हैं कि उड़द को समर्थन मूल्य से कम दामों पर व्यापारियों ने खरीद ली और भावान्तर का लाभ लिया। किसान सरकार की इन गलत नीतियों से पिस गया है। भावांतर भुगतान योजना भाजपा की शिवराज सरकार के ताबूत में अंतिम कील होगी।
1 जून से 10 जून तक हुए ‘गांव बंद’ आंदोलन की सफलता या विफलता के प्रश्न को नकारते हुए कक्काजी ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सरकार को चेताना था। पूरे 10 दिन सरकार अनिष्ट की आशंका से सहमी-सहमी रही और हांफती रही। पर किसानों का आंदोलन शांतिपूर्ण था और सफल रहा। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के अध्यक्ष ‘कक्काजी”आगे बात बढ़ाते हुए कहते हैं, आंदोलन का असर आने वाले दिनों में दिखेगा।
किसान आंदोलन की 4 प्रमुख मांगें
1. किसानों की कर्ज माफी हो।
2. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू हो
3. छोटे किसानों को सुनिश्चित आमदनी मिले
4. फल-सब्जी को भी लागत के आधार पर डेढ़ गुना समर्थन मूल्य तय हो और सरकार खरीदी करें।
अन्नदाता अधिकार यात्रा
आगामी 9 अगस्त से कक्काजी ‘अन्नदाता अधिकार यात्रा’ प्रारंभ करने जा रहे हैं। 90 दिन की इस यात्रा में वे प्रदेश के 313 विकासखंडों का दौरा कर किसानों को उनके अधिकारों के लिये जागरूक करेंगे, सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ जनचेतना जागृत करेंगे। हाल ही में अपने दलित सवर्ण विवाद से आहत कक्काजी ने तय किया है कि वे अपने नाम के साथ ‘शर्मा’ उपनाम नहीं लगाएंगे। साथ ही यात्रा के दौरान रोजाना दलित के घर ही भोजन करेंगे।
सरकार में भ्रष्टाचार
मंत्रालय से लेकर मंदसौर तक, पटवारी से लेकर प्रमुख सचिव तक व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार से कक्काजी में गहरा आक्रोश है। बातों में वे स्पष्ट भी कर देते हैं कि ये गुस्सा, ये आक्रोश किसी के प्रति व्यक्तिगत नहीं है। परंतु शोषण, दमन, भ्रष्टाचार के खिलाफ वे शुरू से अपनी आवाज उठाते आए हैं।
67 वर्षीय किसान नेता ने कालेज के दिनों से समाजवादी विचारधारा को आत्मसात किया है। आप प्रखर समाजवादी राम मनोहर लोहिया के सिद्धांतों के अनुगामी हैं। किसानों के पक्ष में वे सरकार से लोहा लेते हुए अनेक बार जेल जा चुके हैं। ये भविष्य के गर्भ में है कि कक्काजी के ‘अन्नदाता अधिकार यात्रा’ से चुनावी वर्ष में सरकार पर क्या जूं रेंगेगी और किसानों को उनके अधिकार मिलेंगे।

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