रबी फसलों में उत्पादकता बढ़ाने की अपार संभावनाएं

देश में रबी फसलों में सबसे अधिक क्षेत्र गेहूं का रहता है जो देश भर में लगभग 306.09 लाख हेक्टेयर में लगाया जाता है। वर्ष 2016-17 में गेहूं का क्षेत्र 2015-16 की तुलना में 6.49 लाख हेक्टेयर अधिक था। सिंचित क्षेत्र की वर्ष प्रति वर्ष उपलब्धता गेहूं के क्षेत्र को बढ़ाने में सहायक होती है। दूसरी ओर गेहूं की नई जातियों से अधिक उपज पाने की आशा तथा नई जातियों की गेहूं के रोगों के प्रति प्रतिरोधिता भी इसमें सहायक होती है। भारत का किसान भी गेहूं की फसल उगाने में निपुण हो गया है। जिस कारण वह उपज के एक स्तर तक पहुंचने में कामयाब हो जाता है और गेहूं की फसल लेने में उसे कोई जोखिम भी नहीं दिखता। देश के मध्य क्षेत्र को दो राज्य मध्यप्रदेश व राजस्थान के किसान भी क्रमश: 55.99 व 30.79 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल लेते हैं। इस क्षेत्र का तीसरा राज्य छत्तीसगढ़ जो मूलत: धान का फसल उगाता है में गेहूं मात्र 1.18 लाख हेक्टेयर में गेहूं की फसल लेता है। इस क्षेत्र के तीनों राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ देश के कुल क्षेत्र के 28.7 प्रतिशत क्षेत्र में गेहूं की फसल लेते हैं। कुछ वर्ष पूर्व (2013-14) में किये गये एक अध्ययन में निष्कर्ष चौकाने वाले हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान तथा छत्तीसगढ़ की गेहूं की उपज क्रमश: 22.18, 30.68 तथा 12.27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर थी, जबकि इस समय पंजाब व हरियाणा क्रमश: 47.28 तथा 46.09 क्विंटल उपज प्रति हेक्टेयर ले रहे थे। इन तीन राज्यों में किये गये अंग्रिम पंक्ति के प्रदर्शनों में गेहूं की उपज मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में क्रमश: 41.42, 45.51 तथा 32.18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर प्राप्त हुई यह किसान द्वारा प्राप्त उपज की तुलना में क्रमश: 10.04, 14.83 तथा 19.9 क्विंटल का अन्तर प्रति हेक्टेयर पाया गया है। अब आवश्यकता है कि किसानों द्वारा प्राप्त उपज तथा अग्रिम पंक्ति के प्रदर्शनों के बीच पाये गये अन्तर को कम या बिल्कुल खत्म किया जाये। इसके लिए कमी के कारणों का पता लगाना होगा। मध्य प्रदेश व राजस्थान के गेहूं उत्पादन में जिलों के बीच उत्पादकता में बहुत बड़ा अन्तर देखने को मिलता है, जिसके कारण व समाधान ढूंढऩे की आवश्यकता है।
देश में रबी की दूसरी प्रमुख दलहनी फसलें हैं इसकी देश में 139.52 लाख हेक्टेयर में की जाती है। इसमें से 41.08 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहनी फसलें मध्य प्रदेश में बोई जाती है, जबकि राजस्थान व छत्तीसगढ़ में यह क्षेत्र क्रमश: 14.29 व 6.56 लाख हेक्टेयर है। मध्य क्षेत्र के इन तीन राज्यों में रबी दलहनी फसलें कुल मिलाकर 51.55 प्रतिशत है। रबी दलहनी फसलों में चना प्रमुख फसल है जो देश में 86.81 लाख हेक्टेयर में ली जाती है। इसके बाद 14.16 लाख हेक्टेयर में मसूर की खेती की जाती है। दलहनी फसलों की उत्पादकता में वर्ष प्रति वर्ष बड़ा अन्तर देखा गया है जो प्रमुखत: मौसम कीटों व बीमारियों के प्रकोप के कारण होता है। दलहनी फसलों की नई जातियों में कीटों तथा बीमारियों के प्रति प्रतिरोधिता व उल्लेखनीय उपज वृद्धि नहीं देखी गई है जिसके प्रति और अधिक अनुसंधान की आवश्यकता है। रबी तिलहनी फसलें देश में 81.47 लाख हेक्टेयर में ली जाती है जिसमें से 60.91 लाख हेक्टेयर सरसों व राई के अन्तर्गत आता है। सरसों की खेती राजस्थान में 26.85, मध्यप्रदेश में 7.32 तथा छत्तीसगढ़ में 0.47 लाख हेक्टेयर में ली जाती है। इन तीनों राज्यों में देश के कुल क्षेत्र के 56.87 प्रतिशत क्षेत्र में सरसों उगाई जाती है। सरसों में भी उत्पादकता बढ़ाने की सम्भावनाएं भी बहुत अधिक हैं ।

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