डेयरी व्यापार में दुधारू पशुओं का चुनाव

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बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए कृषि जोत कम होती जा रही है, लागत बढ़ रही है, कृषि योग्य भूमि कम होने के कारण पशुपालन को कृषकों द्वारा आय का मुख्य स्त्रोत बनाया जा सकता है। परंतु पशुपालन एवं व्यावसायिक दुग्ध उत्पादन में पर्याप्त वैज्ञानिक जानकारी न होने के कारण वर्तमान में किसानों को इसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। अत: दुग्ध व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने के लिए पशुपालकों को निम्र मुख्य बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित किया जाना आवश्यक है-

  • पशुपालकों में गाय, भैंस के पालन-पोषण का व्यावहारिक ज्ञान तथा रुचि होना अति आवश्यक है।
  • दुधारू पशुओं हेतु गाय/ भैंस के चुनाव के लिए मुख्यत: पशु की खरीद का स्त्रोत उसकी उम्र, नस्ल, स्वास्थ्य आदि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
    क्रय स्त्रोत
    दुधारू गाय/ भैंस दूरस्थ स्थान से नहीं खरीदकर स्थानीय जलवायु को ध्यान में रखते हुए आसपास के ग्रामीण क्षेत्र से चयन करें। पशु उन्नत नस्ल का हो।
    पशु की आयु
    गाय/ भैंस प्राय: प्रथम, द्वितीय ब्यांत की ही खरीदें। संकर नस्ल की गाय की प्रथम ब्यांत में लगभग उम्र 28 से 32 माह तथा भैंस की उम्र 45 से 48 माह से अधिक नहीं हों।
    पशु का स्वास्थ्य
    गाय-भैंस का अच्छा स्वास्थ्य हो उसकी आंखें चमकदार तथा शरीर हष्ट-पुष्ट हो, चारों थन (छीमी) सुव्यवस्थित एवं बीमारी रहित हो।
    दुहान
    गाय/भैंस को खरीदने से पहले कम से कम तीन से चार बार स्वयं दुहान करके दूध की वास्तविक मात्रा देखें।
    बाछी को प्राथमिकता
    गाय-भैंस के चयन में उसकी नीचे बछड़ी होने पर पशु को प्राथमिकता दें। क्योंकि बाछी ही आगे चलकर एक गाय/भैंस बनेगी।
    शरीर की बनावट: सींग/खुर आदि प्राकृतिक स्थिति में हों। भैंसों में प्राय: व्यापारी सींगों को घिसकर उसकी उम्र छिपाने की कोशिश करते हैं। पशु को आगे-पीछे चलाकर अवश्य देख लें। पशु की जननेन्द्रियों से किसी प्रकार की अनावश्यक स्त्राव आदि नहीं हों। पूंछ आदि की जांच हाथ से छूकर के लें।
    पशु की आदतें
    पशु की आदत को जानने के लिए पशु के नजदीक जाकर देख लें, क्योंकि कुछ पशु दूसरे व्यक्ति को सींगों से मारते हैं। साथ ही कभी-कभी पशुओं में सींग को खूंटे से मारने संबंधी दोष देखा गया है। अत: ऐसा पशु कभी न खरीदें।

पशु की नस्ल अधिक दूध उत्पादन के लिए हॉलिस्टीन फ्रिजियन, जर्सी सांड से पैदा संकर गायें जिसमें अधिक से अधिक 62.5 प्रतिशत विदेशी नस्लों का खून हो, को ही खरीदें। देशी नस्ल में साहीवाल/ हरियाणा शुद्ध नस्ल की गायें खरीदी जा सकती हैं। भैंसों की प्रजाति में मुर्रा एवं उन्नत मुर्रा भैंस पालनी उपयुक्त होती है।

  • शिवमूरत मीणा वैज्ञानिक (पशुपालन), मो. : 9549473344
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