धान में जस्ते की कमी की क्या पहचान है उसे दूर करने के उपाय भी बतायें।

समाधान- धान में सूक्ष्म तत्व जस्ते की कमी के कारण उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र (जो अब उत्तराखंड में है) में महामारी हो चुकी है। कृषि वैज्ञानिकों के अथक प्रयास से इसके कारणों की जांच की गई जो ‘खैरा रोग’ के नाम से प्रचलित हुआ, और पाया गया कि सतत धान लगाने से भूमि में जस्ते की कमी होने लगी है जिसका उपचार बहुत सरल तथा हाथों में ही है। आप भी निम्न करें।

  • बुआई पूर्व धान लगने वाले खेत में 40-50 किलो/हेक्टर की दर से जिंक सल्फेट भूमि में आखिरी बखरनी के समय डालें और अच्छी तरह मिलायें।
  • खड़ी फसल पर 0.5 प्रतिशत जिंक सल्फेट का घोल तैयार करें। 400 लीटर पानी में 2 किलो जिंक सल्फेट डाले साथ में 1 किलो चूना भी डाले घोल तैयार करके छान कर खड़ी फसल पर 15 दिनों के अंतर से दो छिड़काव (रोगग्रस्त क्षेत्रों में) किये जाये।
  • धान की रोपाई के पहले 2-4 प्रतिशत जिंक सल्फेट के घोल में जड़ों को डुबोकर उपचारित करके ही रोपाई करें।
  • पत्तियों पर चाकलेटी रंग के गहरे भूरे धब्बे दिखना शुरू होते हंै और छोटे-छोटे धब्बे मिलकर पूरी पत्ती में फैल जाते है ये इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं।

– सुधाकर राव, सुल्तानपुर

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