लाईन से बोई गई फसलों के नींदा नियंत्रण हेतु मानव एवं पावर चलित यंत्रों के बारे में और उपलब्धता के बारे में बतलायें।

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समाधान- आपके पत्र सतत आते रहते हैं आपका प्रदेश कृषि प्रधान है परंतु कृषि के क्षेत्र में विकसित है आप कतार से फसल बुआई करते हैं  यह बात अच्छी है अन्यथा आज भी कृषक बीजों को फेंककर बुआई निपटा देते हैं. निंदाई करने के लिये मजदूरों की कमी सब जगह है उनकी उपलब्धता तथा उनका उपयोग कास्त में खर्च बढ़ाता है इसी कारण हाथ से चलने वाले यंत्र तथा मशीन से चलने वाले यंत्रों का विकास कर कृषकों को उपलब्ध कराये गये हैं। हमारे प्रदेश में केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान है जहां पर निंदाई यंत्रों का विकास किया गया है तथा कृषकों में उसका बहुत प्रचार-प्रसार तथा अंगीकरण भी हुआ है। आपको चाहिए कि अपने जिले के उपनिदेशक कृषि अथवा कृषि अभियांत्रिकी से सम्पर्क करें ताकि आपको जानकारी मिल सके कि आपके प्रदेश की भूमि और उसमें पाये जाने वाले खरपतवार में कौनसा यंत्र उपयोगी होगा आपके प्रदेश से जुड़े प्रदेश, उत्तरांचल, पंतनगर में कृषि औद्योगिकी विश्वविद्यालय भी है आप एक बार वहां जरूर जायें वह विश्व विख्यात विश्वविद्यालय है वहां के कृषि अभियांत्रिकी विभाग द्वारा कृषि उपयोगी यंत्रों का विकास किया गया है। हम आपको कुछ सम्पर्क सूत्र लिख रहे हैं चाहे तो उपयोग कर लें.

  • कुलपति
    चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं
    तकनीकी विश्वविद्यालय, कानपुर
    फोन -0512-2534155
  • कुलपति
    गोविन्द वल्लभ पंत कृषि एवं तकनीकी
    विश्वविद्यालय, पंतनगर,
    उधमसिंह नगर, (उत्तरांचल)
    फोन- 05944-233333

– लोकेश कुमार, सिरसागंज

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