समर्थन मूल्य से नीचे बिक रही फसलें, किसानों को हो रहा नुकसान

(राजीव कुशवाह, नागझिरी)। इसे किसानों की नियति कहें या व्यवस्था की विसंगति, कि अन्नदाता समर्थन मूल्य से नीचे अपनी फसलें

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