काश्तकारों ने मेढ़बंधी कर फसल का उत्पादन किया तिगुना

खरगौन। कहते हैं कि सदियों तक गरीब-गुरबा किसान खेतों में बरसात का पानी टांकों, कुंडियों, कुईयों में संजोकर रखते थे

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