krishak jagat farmer किसानों

जारी रहेगी सब्सिडी

यूरिया निर्माताओं के लिये खुशखबरी

(विशेष प्रतिनिधि)
किसानों को राहत पहुंचाने के नाम पर केंद्र सरकार ने प्रमुख उर्वरक ‘यूरिया’ पर 2020 तक सब्सिडी जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि सब्सिडी जारी रखने के इस निर्णय से कंपनियां ही सुकून की सांस ले रही हैं और उनके शेयर बाजार में चढ़ गए हैं।

नई दिल्ली। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता मेें हुई बैठक में यूरिया पर सब्सिडी योजना को वर्ष 2019-20 तक जारी रखने का निर्णय लिया है। समिति ने कुल 1 लाख 64 हजार 935 करोड़ रु. के अनुमानित व्यय एवं इसकी अदायगी से संबंधित उर्वरक विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से वर्ष 2020 तक यूरिया की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं होगी। यूरिया सब्सिडी योजना में स्वदेशी व आयातित दोनों यूरिया सम्मिलित हैं। इसमें अंतर्राज्यीय परिवहन भाड़ा सब्सिडी भी शामिल है। केंद्र सरकार की यूरिया नीति में इससे पहले वर्ष 2015 में 100 प्रतिशत नीम लेपित यूरिया को अनिवार्य बनाया गया था। इससे सब्सिडी वाले यूरिया के गैर कृषि कार्यों में इस्तेमाल पर रोक लगी। नीम लेपित यूरिया के फायदों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 1 अप्रैल 2018 से इसे 45 किलोग्राम के बैग में उपलब्ध कराने की योजना बनायी है। जिसकी कीमत लगभग 266.50 प्रति बैग (45 किलो) होगी।

केंद्र सरकार का निर्णय
  • वर्ष 2020 तक नहीं बढ़ेगी यूरिया की कीमत
  • 1 अप्रैल 2018 से यूरिया के घटेंगे दाम

फास्फेटिक उर्वरकों के दाम बढ़े
केंद्र के यूरिया सब्सिडी योजना को जारी रखते हुए किसानों एवं यूरिया उत्पादकों को राहत देने के निर्णय पर फास्फेटिक उर्वरकों के बढ़ते दाम भारी पड़ सकते हैं। विशेष रूप से डीएपी के दामों में वृद्धि किसानों के खरीफ सीजन और सरकार के चुनावी गणित को बिगाड़ सकती है। आगामी माह से लगभग सभी राज्यों में डीएपी के दाम रु. 12 सौ प्रति बैग या उससे अधिक हो सकते हैं। जबकि वर्तमान में ये दाम 1 हजार से 11 सौ रु. प्रति बैग हैं। उर्वरक उद्योग के सूत्र बताते हैं कि अंतर्राज्यीय बाजार में डीएपी और उसके कच्चे माल दोनों की कीमतों में वृद्धि का असर भारतीय उर्वरक उद्योग पर भी पड़ रहा है। साथ ही अमेरिकन डॉलर की कीमतों में वृद्धि से स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। फास्फेटिक उर्वरकों के प्रमुख निर्यातक देश चीन में प्रदूषण के कारण डीएपी संयंत्रों को बंद करने के निर्णय का असर भी अंतर्राज्यीय बाजार पर पड़ा है। अभी स्थिति यह है कि स्वदेशी डीएपी निर्माता एवं आयातित डीएपी प्रदायक दोनों ही कोई निश्चित दर घोषित करने की स्थिति में नहीं हैं। उर्वरक उद्योग के सूत्र कहते हैं कि अप्रैल माह में ही स्थिति स्पष्ट होगी। सूत्रों की माने तो केंद्र भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। आवश्यक होने पर केंद्र सरकार डीएपी पर फिर से अनुदान की घोषणा कर सकती है।

www.krishakjagat.org
Share