मेड़ नाली से लगाएं सोयाबीन

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  • सोयाबीन का 70 प्रतिशत अंकुरण क्षमता वाला 75-80 किग्रा./हे. बीज एवं उर्द, मूंग व अरहर का 15-20 किग्रा./हे. बीज उपयोग करें।

बीजोपचार करें

  • बीज को थायरम+कार्बोक्सिन मिश्रित फफूंदनाशी की 2 ग्राम मात्रा अथवा ट्राइकोडर्मा विरडी की 5 ग्राम मात्रा प्रति कि.ग्रा. बीज से उपचारित कर बुवाई करें। साथ ही रायजोबियम व पी.एस.बी. की 10 ग्राम मात्रा से बीज उपचार करें।
  • जिन क्षेत्रों में तना मक्खी, सफेद मक्खी नामक कीट व पीला मोजेक रोग का प्रकोप होता है वहां थायोमेथोक्सेम 70 डब्ल्यू. एस. की 3 ग्राम अथवा थायोमेथोक्सेम 30 डब्ल्यू. एस.10 ग्राम अथवा इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ. एस. की 3 ग्राम मात्रा से बीजोपचार करें।

बुवाई की गहराई

  • अधिक फैलने वाली किस्में जैसे जे.एस.9752, जे.एस. 9305, जे.एस. 2029, जे.एस. 2069, जे. एस.2034, जे.एस. 335 की बुवाई 45 से.मी. पर करें। कम फैलने वाली व कम ऊंचाई की किस्म जे.एस. 9560 की बुवाई 30 से.मी. पर करें तथा बीज की गहराई 2-2.5 सेमी. रखें।

दालों की रोग प्रतिरोधी किस्में

  • उर्द की पीला मोजेक रोग प्रतिरोधी किस्में जैसे आई.पी.यू.94-1, के.यू.96-3, पी.यू.-19, पी.यू.30, पी.यू.35, जे.यू.86, जवाहर उड़द -2, एल.बी.जी.-20 की बुवाई 30 से.मी.पर करें।
  • मूंग की पीला मोजेक रोग प्रतिरोधी किस्में जैसे पूसा विशाल, हम-1, टी.एम.3799, सम्राट के.851, पी.डी.एम. 139 पूसा बैसाखी, जवाहर मूंग 721 की बोनी करें।
  • अरहर की उकठा रोग प्रतिरोधी किस्में जैसे जवाहर अरहर-4, जे.के.एम.-7, जे.के.एम.-189, आशा, टी.जे.टी.-501, राजीव लोचन की बुवाई 30 से.मी. पर करें।
  • सोयाबीन, मूंग, उड़द में 15-20 दिन की अवस्था पर इमेजाथायपर 10 प्रतिशत की 750 मि.ली.मात्रा प्रति हेक्टेयर उपयोग करें। फसल अवधि में लंबा ड्राइस्पेल आने की दशा में हाथ से निंदाई कर या व्हील हो चलाकर नमी संचय करें।
  • खरपतवारनाशी इमेजाथायपर 10 प्रतिशत के साथ रेनेक्सीपायर कीटनाशी मिलाकर छिड़काव करने से खरपतवारों के साथ-साथ गर्डल बीटल व अन्य कीटों का नियंत्रण होता है।
  • मूंग व उड़द की फसल में पीला मोजेक रोग का प्रकोप मुख्यत: होता है। पीला मोजेक एक विषाणु जनित रोग है, जो सफेद मक्खी नामक कीट द्वारा फैलता है। बचाव हेतु थायोमेथोक्सेम 30 डब्ल्यू. एस.10 ग्राम अथवा इमिडाक्लोप्रिड 600 एफ.एस. की 3 ग्राम मात्रा से बीजोपचार करें। खड़ी फसल में रोकथाम हेतु इमिडाक्लोप्रिड 17.8. एस.एल. 200 मि.ली. अथवा मिथाइल डिमेटान अथवा डाइमिथियेट की 300 मि.ली. मात्रा का प्रति एकड़ छिड़काव करें।
  • सोयाबीन फसल में 30-35 दिन की अवस्था पर ट्राईजोफॉस 40 ई.सी. की 750 मि.ली. मात्रा का छिड़काव करने से गर्डल वीटल के साथ-साथ अन्य कीट का नियंत्रण होता है।
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