सोयाबीन किसानों को सतर्क रहने की जरूरत : डॉ. शर्मा

soybean-rust2इंदौर। मध्य प्रदेश में बारिश के दूसरे दौर के बाद सोयाबीन की फसल अच्छी होने से बढिय़ा उत्पादन होने की उम्मीदों के बीच प्रदेश के हरदा, होशंगाबाद और सीहोर जिलों के कुछ इलाकों में सोयाबीन की फसल के पीले पडऩे का मामला सामने आया है जिसमें सोयाबीन में गेरुआ रोग लगने की आशंका जताई जा रही है। किसानों की इस समस्या के संबंध में कृषक जगत ने सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. अमरनाथ शर्मा से चर्चा की तो उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश में अभी तक सोयाबीन में गेरुआ रोग लगने की जानकारी नहीं मिली है , लेकिन दक्षिण भारत में कहीं -कहीं इस रोग के होने की जानकारी प्राप्त हुई है। उनके अनुसार यह राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट रोग है। इस रोग पर नियंत्रण के लिए डॉ. शर्मा ने थायोफिनाइट मिथाइल 1 किग्रा/ हेक्टर अथवा टेबुकोनाजोल 625 मि.ली/ अथवा टेबुकोनाजोल + सल्फर 1 लीटर/हे अथवा हेक्साकोनाजोल 500 मिली लीटर /हेक्टर को 500 लीटर पानी में छिड़काव करने के साथ ही प्रदेश के किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बता दें कि सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर द्वारा सोयाबीन के लिए दी गई अपनी साप्ताहिक सलाह में प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसानों को गर्डल बीटल, स्पेडोप्टेरा और सेमीलूपर कीट का प्रकोप अधिक होने की आशंका जताई थी। लेकिन उपर्युक्त उल्लेखित जिलों में सोयाबीन की फसल पर गेरुआ रोग लगने की खबर से किसानों का चिंतित होना स्वाभाविक है।

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