सोयाबीन-कपास के किसान चिंतित

कीटनाशकों का स्प्रे कर बचा रहे फसल

(अतुल सक्सेना)

भोपाल। खण्डवा जिले के चैनपुर पुलिसावादी ग्राम के कृषक श्री फूल सिंह यादव और होशंगाबाद जिले के निपानियां ग्राम के कृषक श्री नारायण सिंह दोनों की उम्मीदें एक समान हैं और सोयाबीन से बंधी हैं। वहीं खंडवा जिले के श्री सुनील कैलाश पटेल एवं बलवाड़ा के अकबर अली को कपास से काफी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि वर्तमान में फसल की स्थिति बेहतर है परन्तु अब वर्षा की आवश्यकता महसूस हो रही है। यदि एक सप्ताह में वर्षा होती है तो बम्पर उत्पादन होगा, अन्यथा फसलें कीड़ों की चपेट में आ सकती हैं। क्योंकि मौसम कीट-व्याधि के अनुकूल बना हुआ है। उन्होंने बताया कि सभी फसलों में दो-दो बार कीटनाशकों का स्प्रे किया है जिससे फसल सुरक्षित रहे। इसके बावजूद फसल में कहीं-कहीं कीड़े, इल्ली उभर रहे हैं।

महाराष्ट्र में भी कीट प्रकोप
म.प्र. में खरीफ फसलों की बोनी लगभग पूरी हो गई है। अब मानसूनी वर्षा के लम्बे अंतराल तथा बादल छाए रहने के कारण फसलों पर कीटों का हमला प्रारंभ हो गया है। विशेषकर सोयाबीन एवं कपास पर खतरा मंडराने लगा है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सावधानी बरतने के साथ-साथ समय पर कीटनाशकों का स्पे्र करने की सलाह दी है। उधर महाराष्ट्र में गत वर्ष की तरह इस वर्ष भी कपास फसल पर पिंक बॉलवर्म ने हमला बोल दिया है। कपास के साथ-साथ सोयाबीन के भी कीटों की चपेट में आने की संभावना बढ़ गई है। इस कारण महाराष्ट्र सरकार हरकत में आ गई है और किसानों को नुकसान से बचाने के उपाय खोज रही है। इसे देखते हुए म.प्र. सरकार के लिए भी खतरे की घंटी बज गई है क्योंकि गत दो-तीन वर्षों से प्राकृतिक आपदा के कारण सोयाबीन का उत्पादन प्रभावित हो रहा है इस वर्ष यदि कीट प्रकोप के चलते नुकसान हुआ तो उत्पादन फिर प्रभावित होगा और किसान की कमर टूट जाएगी। वैसे तो म.प्र. सरकार चुनावी वर्ष में पूरी तरह सजग एवं दुरुस्त है परन्तु सोयाबीन एवं कपास पर कीटों का हमला प्रधानमंत्री के 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के सपने पर ग्रहण लगा सकता है।

9 जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा
सामान्य से अधिक वर्षा वाले जिले- अनूपपुर, सिंगरौली, टीकमगढ़, नीमच, दतिया, शाजापुर, सीहोर, मुरैना और भिण्ड।
सामान्य वर्षा वाले जिले- जबलपुर, शिवपुरी, दमोह, छिंदवाड़ा, सिवनी, मण्डला, नरसिंहपुर, सागर, पन्ना, छतरपुर, रीवा, सतना, सीधी, शहडोल, झाबुआ, इंदौर, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी, उज्जैन, मंदसौर, रतलाम,देवास, ग्वालियर, श्योपुरकलां, आगर-मालवा, भोपाल, अशोकनगर, गुना, रायसेन, विदिशा, होशंगाबाद और राजगढ़।
कम वर्षा वाले जिले- बालाघाट, डिंडोरी, कटनी, अनूपपुर, धार, अलीराजपुर, हरदा और बैतूल।

बुवाई स्थिति
मध्य प्रदेश में अब तक खरीफ बोनी 129 लाख 11 हजार हेक्टेयर में कर ली गई है। इसमें सोयाबीन एवं कपास की बोनी लक्ष्य को पार कर गई है। सोयाबीन 53 लाख हेक्टेयर में एवं कपास 6.88 लाख हेक्टेयर में बोई गई है। वहीं धान 19.66 लाख हेक्टेयर में, मक्का 13.02 लाख हेक्टेयर में, तुअर 6.25, उड़द 14.55, मूंग 2.10, मूंगफली 2.09 एवं तिल की बोनी 4.41 लाख हेक्टेयर में की गई है।

कृषक फूल सिंह यादव ने 10 एकड़ में सोयाबीन की 9305 एवं 9560 किस्म लगाई है जो अब डेढ़ माह की हो गई है। उन्हें दो बार स्प्रे करना पड़ा है। इसी प्रकार नारायण सिंह ने 7 एकड़ में सोयाबीन लगाई है जिसमें सफेद मच्छर पनप रहे हैं। उन्होंने 1040 एवं 9305 की बोनी की है जो अब फूल की अवस्था में आ चुकी है।

भोपाल-नर्मदापुरम संभाग के संयुक्त संचालक कृषि श्री बी.एल. बिलैया ने बताया कि दोनों संभागों में खरीफ बोनी 99 फीसदी कर ली गई है, सोयाबीन, मक्का, अरहर, उड़द एवं धान फसल अच्छी स्थिति में है। कहीं से भी कीट-व्याधि की कोई शिकायत फिलहाल नहीं मिली है।

कपास किसान सुनील कैलाश पटेल ने 3 एकड़ में महिको कंपनी की जंगी बीटी किस्म लगाई है जो अब 60 दिन से अधिक की हो गई है। फसल में ड्रिप से सिंचाई कर अब तक दो बार कीटनाशक का स्पे्र किया है। अकबर अली ने 7 एकड़ में कपास की रासी 659 बीजी-2 किस्म लगाई है इसके साथ ही सोयाबीन की 9305 किस्म 15 एकड़ में बोई है। उनका कहना है कि अब फसल को पानी की जरूरत है, नहीं मिलने पर नुकसान हो सकता है क्योंकि सोयाबीन के पत्ते पीले पडऩे लगे हैं तथा कपास में कुछ स्थानों पर इल्लियां दिखाई दे रही हैं। दोनों फसलों में दो-दो बार कीटनाशक का छिड़काव किया है।

इन्दौर संभाग के संयुक्त संचालक श्री रेवा सिंह सिसोदिया ने बताया कि संभाग में फसल अच्छी स्थिति में है। कीटों की कोई समस्या नहीं है। यदि मौसम ने साथ दिया तो उत्पादन बेहतर होगा।
सरकार का कंटीजेंसी प्लान तैयार
प्रदेश में मानसूनी वर्षा के अंतराल के कारण किसानों में कीट-व्याधि का भय बना हुआ है। अब तक राज्य के केवल 9 जिलों में सामान्य से अधिक तथा 34 जिलों में सामान्य वर्षा हुई है जबकि 8 जिले कम वर्षा के कारण सूखे जैसी स्थिति में है। इस कारण कृषि विभाग ने आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर ली है। यदि कीट-व्याधि, सूखे की स्थिति बनती है तो किसानों को योजना के मुताबिक सलाह दी जाएगी। आकस्मिक कार्ययोजना में विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत लाभ दिया जायेगा।

विभाग द्वारा आकस्मिक कार्ययोजना तैयार कर जिलों एवं संभागों को भेजी गई है। यदि विपरीत परिस्थितियां बनती हैं तो इसका उपयोग किया जाएगा। फिलहाल प्रदेश में फसलें बेहतर स्थिति में हैं तथा बम्पर उत्पादन होने की संभावना है। कीट-व्याधि एवं सूखे जैसे हालात की कोई खबर नहीं है। फिर भी मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को फसल की स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं साथ ही समय-समय पर किसानों को उचित सलाह देने को कहा गया है।

– मोहनलाल
संचालक कृषि (म.प्र.)

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