एक ही खेत में सोयाबीन, अरहर, चने की बोवाई

www.krishakjagat.org

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने बनाया नया यंत्र

(संजय नैयर)
रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि अभियांत्रिकी विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा इंटरक्रॉप सीड प्लान्टर नामक एक ऐसा यंत्र विकसित किया गया है जो एक ही खेत में खरीफ में एक साथ सोयाबीन और अरहर तथा रबी में सोयाबीन के स्थान पर चने की बोआई कर सकेगा। इस प्रकार इस यंत्र के उपयोग से जुलाई से फरवरी के बीच तीन दलहन-तिलहन फसलों की खेती सफलतापूर्वक की जा सकेगी। इस यंत्र के उपयोग से परंपरागत विधि के तुलना में बीजों की मात्रा आधी ही लगती है और कम बारिश में भी फसलों का अच्छा उत्पादन होता है।

 लाभ

  • जुलाई से फरवरी के बीच 3 फसलें।
  • बीज आधा ही लगेगा और कम बारिश में भी अच्छी फसल।
  • 1 घंटे में 1 एकड़ में सोयाबीन और अरहर की एक साथ बोआई।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एस.के. पाटील के मार्गदर्शन में कृषि अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अजय वर्मा ने इंटरक्रॉप सीड प्लान्टर का डिजाईन और विकास किया है। यह एक ट्रैक्टर चलित यंत्र है जो खरीफ में सोयाबीन और अरहर की एक साथ बोआई करता है और सोयाबीन के कटाई के पश्चात रबी में सोयाबीन के स्थान पर चने की बोआई करता है। इसमें प्रत्येक कतार में बोई जाने वाली फसल के लिए अलग-अलग मॉड्यूलर बॉक्स तथा बीज की गहराई को नियंत्रित करने वाली प्रणाली होने के कारण विभिन्न अंतरवर्तीय फसलें प्रभावी तरीके से बोई जा सकती हैं। इस मशीन के उपयोग से खेतों में सोयाबीन की पांच कतारों के बाद दोनों ओर दो गहरी नालियां बनती हैं और उसके दोनों ओर अरहर की बोआई एक साथ हो जाती है। कतारों में बोए जाने से बीज से बीज की दूरी 5 से 20 सेन्टीमीटर तक रखने की सुविधा है जिसकी वजह से छत्तीसगढ़ में बोई जाने वाली लगभग सभी फसलें जैसे धान, सोयाबीन, चना, अरहर, मटर, सूरजमुखी आदि की बोआई आसानी से की जा सकती हैं।

डॉ. अजय वर्मा ने बताया कि जून 2017 में भर्री भूमि में खेत की गहरी जुताई कर इंटरक्रॉप सीड प्लान्टर से सोयाबीन एवं अरहर की एक साथ बोआई की गई। उन्होंने बताया कि एक ही खेत में खरीफ की दो अलग-अलग अवधि की फसलें लिये जाने से यह लाभ है कि सोयाबीन की फसल के लिए पानी कमी होने के बावजूद अरहर के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध था जिसके कारण की बंपर फसल प्राप्त हुई। सोयाबीन की कटाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में पूरी होने के बाद नवम्बर के पहले हफ्ते में उसी स्थान पर चने की बोआई की गई।
डॉ. वर्मा ने बताया कि इस वर्ष खरीफ मौसम के प्रारंभ में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से आमतौर पर सोयाबीन की फसल काफी प्रभावित हुई किन्तु इन्टरक्रॉप सीड प्लान्टर के उपयोग से बनी नालियों में वर्षा जल सहेजने से 15 दिन का मानसून ब्रेक सोयाबीन और अरहर की फसल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सका। अत: वर्षा आधारित खेती में बेहतर उत्पादन के लिए यह तकनीक कारगर साबित हुई है।

FacebooktwitterFacebooktwitter
www.krishakjagat.org
Share