खेती में श्री भवरलालजी का अप्रतिम योगदान, ‘नोबल’ पुरस्कार के हकदार

जलगांव। सामाजिक कार्य शिखर संस्था परमार्थ सेवा समिति की ओर से स्व. श्री भवरलाल जी जैन के जीवन कार्य का राज्यपाल श्री सी. विद्यासागर एवं न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर धर्माधिकारी के हाथों ‘परमार्थ रत्न’ सम्मान दिया गया। जैन इरीगेशन के अध्यक्ष श्री अशोक जैन ने इस सम्मान को स्वीकार किया। मुम्बई स्थित होटल ट्रायडंट में 15 अक्टूबर 2017 को यह पुरस्कार वितरण समारोह हुआ। कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो अनेक शताब्दियों में एक बार इस विश्व को वरदान के रूप में मिलते हैं। खान्देश के भूमि में 800 वर्ष पहले शून्य का शोध लगाने वाले भास्कराचार्य ने विश्व को जो वरदान दिया उसी भूमि में 800 वर्ष के पश्चात श्री भवरलाल जी ने उच्च तकनीकी के माध्यम से विश्व के कृषि क्षेत्र को नई दिशा दी है। यह उद्गार महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री विद्यासागर राव ने व्यक्त किये। श्री भवरलाल जैन ने ग्रामीण भारत में उच्च कृषि तकनीकी माइक्रो इरीगेशन द्वारा छोटे किसानों के जीवन को समृद्धि का मार्ग दिखाया। इसके जरिये उन्होंने लाखों किसानों के जीवन में बदलाव किया है। मुझे लगता है कि भारत में ‘नोबेल पुरस्कार’ के लिए श्री भवरलाल जैन निश्चित रूप से पात्र हैं। राज्यपाल ने कहा- कृषि एवं कृषि शिक्षण विस्तार के अनेक आयाम वाले श्री भवरलाल जैन का योगदान ‘वन मैन यूनिव्हर्सिटी’ जैसा है।
कठिन परिश्रम द्वारा उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू करके आज विश्व के अनेक देशों में अपने व्यवसाय का विस्तार किया। श्री भवरलाल जी के जीवनकाल की ओर देखते समय मुझे अल्वर्ट आइस्टिन के महात्मा गांधी के बारे में कहे उद्गार का स्मरण होने की बात राज्यपाल ने कही। आने वाली पीढिय़ों को इस बात पर विश्वास नहीं होगा कि अपने जैसा ही हाड़-मांस वाला एक व्यक्तित्व इस पृथ्वी पर होकर गया। ठीक उसी तरह अत्यंत सरल जीवन शैली श्री भवरलाल जी ने जीवनभर अंगीकार करते हुए सामान्य होते हुए असमान्य कार्य का निर्माण किया है।
न्यायमूर्ति चंद्रशेखर धर्माधिकारी
भवरलाल जी का लोक सहभागिता पर अधिक विश्वास था। व्यापार व्यवसाय में दान करने की वृत्ति को एक अलग मापदण्ड है। गांधी विचारों पर श्रद्धा रखते हुए विश्वस्त की भूमिका से अपने उद्योग को आकार देने वाले उद्योगपतियों में जमनालाल बजाज के पश्चात भवरलाल जी का नाम आता है। न्यायमूर्ति गांधीवादी चंद्रशेखर धर्माधिकारी ने यह उद्गार व्यक्त किए। उद्योग व्यवसाय को उच्च शिखर पर ले जाने के साथ-साथ अपनी भूमिका उद्योगपति की चौखट तक सीमित नहीं रखी। आखिर तक वे खेत-किसानों से जुड़ रहे।
श्री अनिल जैन
जैन इरिगेशन के उपाध्यक्ष श्री अनिल जैन ने सभी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की 79 वर्ष के जीवन काल में विश्व के 120 देशों में अपने व्यवसाय का विस्तार उन्होंने साध्य किया। इस दौरान अपनी उम्र के 43वें वर्ष में हृदय विकार के कारण लगभग 60 प्रतिशत हृदय को क्षतिग्रस्त होने के बावजूद उन्होने किसानों के लिए कृषि उद्योग को बढ़ाया। विस्तस्तरीय कंपनी बनाने के बाद भी उन्होंने प्रधान कार्यालय जलगांव शहर में ही रखा।
इस समारोह में ज्येष्ठ दिग्दर्शक डॉ. जब्बार पटेल, कल्पतरु के अध्यक्ष सर्वश्री मोफत राज, मुणोत, सुप्रीम के अध्यक्ष महावीर तापडिय़ा, पिरामल ग्रुप के दिलीप पिरामल, बिजनेस इंडिया के अशोक अडवानी, बिग बाजार के अध्यक्ष किशोर बियाणी, आईडीबीआई के कार्यकारी संचालक अभय बोंगीरवार, परमार्थ सेवा समिति के अध्यक्ष लक्ष्मीनारायण बियाणी, श्री देवकीनंदन बुमना, सत्यनारायण अग्रवाल, विश्वनाथ भारती, मदनलाल लाठी, रवि लालपुरिया, नंदलाल गोयंका, विजय खेतांन एवं कार्पोरेट जगत के साथ ही सेवाभावी क्षेत्र में अव्वल विभिन्न गणमानों की उपस्थिति थी।

विद्या, धर्म और परमार्थ इन उद्देश्यों के चलते स्थापित हुए परमार्थ सेवा समिति की ओर से परमार्थ रत्न पुरस्कार दिया जाता है। जाति, धर्म, पंथ से आगे जाकर मानवता से विकास के लिए परमार्थ सेवा समिति की ओर से सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक तथा अनुसंधान आदि विषयों पर उपक्रम लिये जाते हैं।

 

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