साकूरा का तेज काम, खरपतवारों का काम तमाम

इंदौर। सोयाबीन का भारतीय खाद्य तेल उद्योग में महत्वपूर्ण योगदान है। वर्तमान में सोयाबीन कुल तिलहनों में 43 प्रतिशत और देश में कुल तेल उत्पादन में 25 प्रतिशत योगदान देता है। वर्तमान में, दुनिया में सोयाबीन के उत्पादन के संबंध में भारत चौथे स्थान पर है। सोयाबीन देश के कई हिस्सों में किसान की आर्थिक स्थिति को ऊपर उठाने में काफी हद तक मददगार रहा है। यह आमतौर पर सोयाबीन डी-तेल केक के लिये भारी निर्यात बाजार के कारण किसानों को उच्च आय प्राप्त करता है।
सकरी पत्ती के खरपतवारों को अगर समय रहते रोका नहीं गया तो ये सोयाबीन की फसल में काफी हद तक नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसान अपनी लागत के बराबर पैसा भी नहीं निकाल पाता। धानुका का साकूरा एक ऐसा चुनिंदा हर्बीसाइड है जो सोयाबीन की फसल में संकरी पत्ती के खरपतवारों के काफी हद तक निजात दिलाता है। साकूरा प्रभावी ढंग से सोयाबीन में घास (ग्रासी वीड्स) तथा अन्य संकरी पत्ती के खरपतवारों को नियंत्रित करता है। यह पूरी तरह से सोयाबीन और अन्य संकरी पत्ती की फसलों के लिये सुरक्षित है। साकूरा उपयोग के एक घंटे के अंदर ही अपना काम शुरू कर देता है और फसल तथा पर्यावरण पर कोई दुष्प्रभाव नहीं डालता।

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