आरकेवीवाय पकड़ेगी रफ्तार

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नई दिल्ली। खेती की दशा सुधारने और उसे लाभ का कारोबार बनाने के लिये सरकार ने एक और ठोस कदम उठाने का फैसला किया है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में बदलाव करते हुए उसके दायरे को बढ़ा दिया गया है। कृषि मंत्रालय के इस प्रस्ताव को गत सप्ताह प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी गई। इस फैसले से कृषि के ढांचागत विकास और मंडियों के सुधार को बल मिलेगा वहीं कोल्ड स्टोरेज श्रृंखला बनाने में सहूलियत होगी। खेती से जुड़े अन्य उद्यम में भी इसके मद से धनराशि आवंटित की जा सकेगी। अब राष्ट्रीय कृषि विकास योजना को आरकेवीवाय-रफ्तार के नाम से जाना जाएगा। यह योजना आगामी तीन वर्षों 2017-18 से 2019-20 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है।
आरकेवीवाय – रफ्तार में 15,722 करोड़ रुपये का आवंटन किया जायेगा। इसका उद्देश्य किसानों को मदद पहुंचाना, उन्हें प्राकृतिक जोखिम से बचाना और कृषि कार्यों को आर्थिक दृष्टि से लाभप्रद बनाने के साथ कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देना शामिल है। इस मद से राज्यों को दी जाने वाली वित्तीय मदद में 60 प्रतिशत हिस्सेदारी केंद्र और 40 प्रतिशत राज्यों की होगी। जबकि पूर्वोत्तर के आठ राज्यों और तीन हिमालयी राज्यों में केंद्र की मदद 90 प्रतिशत तक रहेगी और राज्यों को मात्र 10 प्रतिशत तक मैचिंग ग्रांट के रूप में लगाना होगा। योजना में धन को खर्च करने के फार्मूले को भी मंूजूरी दी गई है। इसके मुताबिक सालाना वित्तीय आवंटन का 50 प्रतिशत धन खेती के बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जायेगा। जबकि 30 प्रतिशत मूल्य संवर्धन और 20 प्रतिशत हिस्से का राज्य अपनी जरूरतों के हिसाब से खर्च कर सकेंगे। कृषि उद्यमिता को प्रोत्साहित करने और नए तौर तरीके ईजाद करने को विशेष रियायत दी जाएगी।

केन्द्र सरकार की बड़ी-बड़ी योजनाओं के क्लिष्ट अंग्रेजी नामों को संक्षिप्त कर अर्थपूर्ण रूप से नई संज्ञा देना, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उनके मंत्रीगणों की प्राथमिकता रही है। योजना जल्दी लोगों की जुबान पर चढ़ जाती है, ये बात अलग है कि वो जाती कितनी दूर है। इसी क्रम में गत सप्ताह केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने कृषि क्षेत्र की राष्ट्रीय कृषि विकास योजना में आदिवर्णिक शब्द (एक्रोनिम) का छोंक लगाकर उसे ‘रफ्तार’ पकड़ाने का प्रयास किया है। अब यह आरकेवीवाय- रफ्तार के रूप में चलेगी। रफ्तार (Raftaar- Remunerative Approaches for Agriculture & Allied Sector Rejuvenation) याने कृषि सह क्षेत्र पुर्नरुद्धार लाभकारी दृष्टिकोण। यदि केन्द्र सरकार की ये योजनाएं हकीकत में रफ्तार पकड़ेंगी तो किसानों की आमदनी दुगनी होने के रास्ते भी खुलेंगे।
चालू वित्त वर्ष में म.प्र. को 226 करोड़
आरकेवीवाय योजना 11वीं एवं 12वीं पंचवर्षीय योजना में लागू रही। अब मार्च 2020 तक के लिये इसका विस्तार किया गया है। सूत्रों के मुताबिक म.प्र. में वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिये 226.23 करोड़ रुपये का एलोकेशन दिया गया है इसमें 50 प्रतिशत राशि की प्रथम किस्त आ चुकी है। वर्ष 2014-15 तक यह योजना 100 प्रतिशत केन्द्रांश पर क्रियान्वित थी जो वर्ष 2015-16 से 60:40 के रेशों पर आ गई। सूत्रों ने बताया कि राज्य में कृषि विकास के लिए केंद्र एवं राज्य की योजनाओं के अतिरिक्त, कृषि उत्पादन एवं अधोसंरचना विकास के लिये कृषि से संबद्ध किसी भी विभाग की मांग आती है तो प्रोजेक्ट तैयार कर भारत सरकार की अनुशंसा पर राज्य स्तरीय मंजूरी समिति द्वारा प्रोजेक्ट मंजूर किया जाता है।
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