अपनी ही गिर गाय की फिर सुध लेंं

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भारत विश्व में सबसे अधिक दूध उत्पादन वाला देश लगातार बना हुआ है। वर्ष 2006-07 में देश में 1026 लाख टन दूध का उत्पादन हुआ था, जो वर्ष 2015-16 में बढ़कर 1555 लाख टन तक पहुंच गया। पिछले दस वर्षों में इसमें लगभग 51.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और दूध का उत्पादन हर वर्ष औसत 52.9 लाख टन बढ़ा है। यह एक उल्लेखनीय वृद्धि है। पशुधन की वर्ष 2007 की गणना के अनुसार देश में गायों की संख्या 1991 तथा भैंसों की संख्या 1053 लाख थी, वर्ष 2012 की पशु गणना में गायों की संख्या में 82 लाख की कमी आकर यह 1909 लाख रह गयी थी, जबकि भैंसों की संख्या में 34 लाख की वृद्धि होकर यह 1087 लाख तक पहुंच गई। गाय व भैंस की कुल संख्या जो वर्ष 2007 की गणना में 3044 लाख थी, वर्ष 2012 की गणना में 2996 लाख रह गयी। गायों की संख्या में पांच ही वर्षों में 82 लाख की कमी एक चिन्ता का विषय है जिसके कारणों का अध्ययन आवश्यक है।
देश में विदेशी संकर गायों की संख्या में लगातार वृद्धि होती चली जा रही है। वर्ष 2015-16 में लिए गए आंकड़ों के अनुसार देश में विदेशी गायों की उत्पादन क्षमता 11.21 किलो दूध प्रति दिन की है, जबकि संकर गायों की 7.33 किलो तथा देशी जतियों की गायों की 3.41 किलो ग्राम प्रति दिन है। देशी गायों जिनकी जाति निश्चित नहीं है वे मात्र 2.16 किलो दूध प्रतिदिन ही दे पाती हैं। विदेशी व देशी गायों के बीच दूध उत्पादन का लगभग तीन गुना उत्पादन में अन्तर चिन्ता का विषय है। जबकि देश के गुजरात क्षेत्र की गिर जाति की गाय जो भारत से दक्षिण अमेरिका देश ब्राजील में एक शताब्दी पूर्व आयात की गयी थी, वहां एक गाभिन में औसतन 1560 किलो दूध दे रही हैं और इसका रिकार्ड 3182 किलो तक पाया गया है। ब्राजील में आज गिर जाति की गायों की संख्या 50 लाख से ऊपर पहुंच गयी है जबकि गुजरात में शुद्ध गिर गायों की संख्या मात्र 3000 रह गयी है। देश में दूध उत्पादन में यदि क्रांति लानी है तो गिर तथा अन्य देशी जातियों की गायों की उपयोगिता को परख कर उनके उत्थान पर कार्य करना होगा। इसके लिए ब्राजील से सांडों का आयात करना भी एक विकल्प होगा, जिससे देश में विदेशी गायों की संख्या रोकने में भी मदद मिलेगी। दूध के उत्पादन में गिर गायों का सहयोग लिया जा सकता है जिनकी प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता 62 लीटर प्रतिदिन तक है।

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