बीज की रक्षा स्वयं करें

दलहनी फसलें
दलहनों का मुख्य शत्रु दाल भृंग का ढोरा नामक कीट हैं यह समूचे दाने को अंदर ही अंदर खाकर उसे पूरी तरह खोखला कर देता हैं। प्रौढ़ कीट निकलने के पश्चात ही इसका पता लग पाता हैं। यह भृंग दाल के दोनों बीज पत्रों को खा जाता हैं जो प्रोटीन का मुख्य भाग होते हैं। इस कीट के प्रकोप से बीज की अंकुरण-क्षमता ही समाप्त हो जाती हैं अत: समुचित दाल भण्डारण के लिए इन्हें दाल भृंग से बचाना नितांत आवश्यक हैं।
गोदामों में कीट बचाव
सामान्यत: जब फसल की कटाई होती हैं तब अनाज कीटों के प्रकोप से मुक्त रहता हैं। अनाज में कीट-प्रकोप के पहुंचने का स्त्रोत पुराने संक्रमित बोरे या भण्डारण पात्र (कोठियां) या भण्डारगृह होते हैं। भंडार-घरों, कोठियों, बोरों की अनाज रखने से पहले तरह मेलाथियॉन (0.2 प्रतिशत) अथवा भण्डारगृहों को ध्रूमक रसायनों जैसे-ईडीसीटी (35 लीटर/100 घनमीटर) या इथिलीन डाई ब्रोमाइड (10.5 किग्रा/100 घनमीटर) या मिथाइल ब्रोमाइड (3.5 किग्रा/100 घनमीटर) से उपचारित किया जा सकता है। जूट के बोरों में रखे अनाज को बोरों की सतह पर मेलाथियॉन कीटनाशी के छिड़काव द्वारा सुरक्षित रखा जा सकता हैं। अनाज की अधिकता होने पर जहां उसे कोठियों में रखना संभव न हो वहां उसे नए बोरों में भरना चाहिए। बोरों को लकड़ी की पट्टियों या भूसे व बालू या रेत के मिश्रण की तह बिछाकर इस प्रकार रखना चाहिए कि उनके भीतर पर्याप्त हवा आ जा सके।
खाद्यान्न को 5-6 महीने तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें धुम्रक रसायनों-एल्यूमीनियम फॉस्फाइड, ई.डी.बी. एम्पूल को रखा जाना चाहिए। यदि भण्डारित किया जाने वाला अनाज कीट संक्रमित हैं तो उसे छानकर उसमें उपयुक्त ध्रूमक रखकर भंडारित करें। अगले वर्ष बुवाई के लिए उपयोग लिए जाने वाले अनाज में मेलाथियॉन 5 प्रतिशत चूर्ण 250 ग्राम / क्विंटल को मिलाकर रखा जा सकता हैं। ऐसा देखा गया हैं कि किसान डी.डी.टी. भी अनाज में मिलाते हैं लेकिन इनमें अनाज की अंकुरण क्षमता प्रभावित होने की संभावना रहती हैं अत: इनका उपयोग न करें। घरों से दूर उन भण्डागृहों में जहां बड़े पैमाने पर अनाज भण्डारित किया जाता हैं आजकल एल्यूमीनियम फॉस्फाइड की 3 ग्राम की टिकिया उपलब्ध होती हैं। एक टन अनाज के लिए एक या दो टिकिया पर्याप्त होती है। घरेलू अनाज भण्डारण पात्रों में ई.डी.बी. की शीशियां (एम्प्यूल) को तोड़कर रखा जा सकता हैं। प्रत्येक शीशी में 3 मिली. रसायन होता हैं जिससे एक क्विंटल अनाज उपचारित किया जा सकता हैं। इसे आटे या अन्य अनाज उत्पाद तिलहन और नमीयुक्त अनाज में नहीं रखना चाहिए। एल्यूमीनियम फॉस्फाइड या ई.डी.बी. को रखने के बाद भंडार गृह या भण्डारण पात्र (बर्तन)को एक सप्ताह तक पूरी तरह वायुनिरोधी रखना चाहिए। उपचारित अनाज को उपयोग में लाने से पूर्व कुछ देर हवा में फैला देने से रसायनों की गंध दूर हो जाती है। इन सभी उपायों के अतिरिक्त कीटों की रोकथाम की कुछ अन्य वैकल्पिक विधियां छोटे स्तर पर अपनाई जा सकती हैं। साफ व सूखे चावल में 500:1 के अनुपात में चूना मिलाना तथा दलहनों में प्रति क्विंटल 500 ग्राम सूखी रेत या बालू को मिलाया जा सकता हैं। इनसे अंकुरण क्षमता तथा स्वाद पर बुरा प्रभाव नहीं पड़ता।

विश्व के अधिकांश देशों में अनाज जीवन का मूल आधार है विवाह हो या अन्य कोई शुभ अवसर हर अनुष्ठान में अन्न को प्रमुख स्थान दिया जाता है वास्तव में अनाज ही जीवन की शक्ति है, अनाज ही समृद्धि का आधार है।
खाद्यान्न फसलों का बीज कैसे बचायें
खाद्यान्न फसलों की घुन (सुरसुरी) अनाज छेदक, खपरा भृंग आटे का लाल भृंग, अनाज का पतंगा इत्यादि अनेक हानि कारक कीटों द्वारा क्षति पहुंचती हैं। ये विभिन्न प्रकार के कीट धान्य फसलों (गेहूं, धान, ज्वार, मक्का, बाजरा आदि) और उनसे निर्मित पदार्थ जैसे आटा, मैदा, दलिया और सूखे फल मेवे तथा मसालों को क्षति पहुुंचाते हैं। अनाज रखने का सर्वोत्तम तरीका उन्हें हवा रहित धातु की कोठियोंं में रखना हैं। हमारे यहां गंावों में मिट्टी की कोठियां भी उपयोग में लाई जाती हैं। इनका उपयोग करते समय कोठियों के चारों ओर प्लास्टिक या पॉलीथिन (400 से 700 गेज) की परत लगा दी जाये तो उनमें बाहरी नमी के भीतर जाने की संभावना नहीं रहती। भण्डारण पात्र के चारों ओर कोलतार लगाकर भी कोठियों को वायुरोधक बनाया जा सकता है। जिससे हवा का प्रवेश नहीं होता है।

गांवों में दालों को कीड़ों से बचाने के लिए खाद्य तेल का उपयोग किया जाता हैं। तेल लगी दलहनों पर कीड़े अण्डे नहीं दे पाते अथवा उनमें इल्ली का विकास नहीं हो पाता। मूंगफली, तिल, सरसों, सोयाबीन या नारियल में से किसी भी तेल की 2 से 3 मिली मात्रा एक किग्रा दलहन को उपचारित करने हेतु पर्याप्त होती है।
चूहों से बचाव
अनाज का भण्डारगृह चूहों का सबसे प्रिय स्थान होता हैं क्योंकि वहां वे अपनी भोजन संबंधी सभी जरुरते पूरी कर सकते हैं। चूहे न केवल अनाज और दूसरा भोजन खा जाते हैं वरन वे अनाज में अपना मल-मूत्र त्यागकर काफी अनाज बर्बाद भी कर देते हैं। जिंक फास्ॅफाइड या कुछ अन्य विषैले रसायनों जैसे वारफेरिन, रोडाफिन, का उपयोग तथा अन्य सुरक्षात्मक उपाय किए जाने चाहिए।

  • सतीश परसाई, प्रमुख वैज्ञानिक
    मो. 9406677601

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