जैविक खेती से मिल रहा विपुल उत्पादन

रसायनिक खाद एवं कीटनाशक के स्थान पर जैविक खेती अपनाकर नरसिंहपुर जिले की करेली तहसील के ग्राम करताज के नवाचारी किसान राकेश दुबे ने गन्ने की खेती में मिसाल कायम की है। राकेश दुबे गन्ने की जैविक खेती से विपुल उत्पादन ले रहे हैं। श्री दुबे एक एकड़ में 900 से एक हजार क्विंटल तक गन्ने का उत्पादन कर रहे हैं। श्री दुबे जैविक तरीके से न केवल गन्ना, बल्कि गुड़, सिरका और अन्य फसलें भी ले रहे हैं।
राकेश दुबे बताते हैं कि नवीन तकनीक से प्रति एकड़ एक हजार क्विंटल तक गन्ने का उत्पादन ले रहे हैं। वे उससे प्रति एकड़ 120 क्विंटल तक जैविक गुड़ भी बना रहे हैं। उनके जैविक गुड़ की विदेशी बाजार में भी बहुत मांग है। श्री दुबे जैविक तरीके से सिरका भी तैयार कर रहे हैं, इसकी भी मांग है।
श्री दुबे ने बताया कि हमारे क्षेत्र का पहला गन्ना मैने उस समय लगाया जब गन्ना 18 इंच की दूरी पर लगाया जाता था। उस समय एक एकड़ में 150 से 200 क्विंटल गन्ना और 25 से 27 क्विंटल गुड़ मिल पाता था। इससे उन्हें संतुष्टि नहीं हुई। उन्होंने महाराष्ट्र में विभिन्न स्थानों का भ्रमण किया, जहां 4 फुट की दूरी पर गन्ना लगाया जा रहा था। इसके बाद हमने 5 से 6 फुट की दूरी पर गन्ना लगाना शुरू किया। तीन साल के भीतर हमें एक एकड़ में एक हजार क्विंटल तक का गन्ने का उत्पादन मिलने लगा।
राकेश दुबे ने बताया कि परम्परागत रूप से गन्ना अक्टूबर या फरवरी में लगाया जाता है। परंतु हमने जून माह में गन्ने के रोपण को प्राथमिकता दी। गेहूं फसल की कटाई के बाद गेहूं के बचे हुए अवशेषों को गर्मी में खेत में ही मिला दिया और नालियां बनाकर खेत तैयार कर लिया। गन्ने की खेती में टुकड़े कर पूरा गन्ना परम्परागत रूप से लगाया जाता है, परंतु मैंने बड चिपर मशीन से गन्ने की आंख निकालकर उसका रोपण किया। बचे हुए गन्ने का रस निकालकर रस को बड़े- बड़े कंटेनरों में रखकर रस का फर्मेन्टेशन किया। इससे सिरका तैयार हो गया। गन्ने की पौध 30 दिन में तैयार हो गई। इस प्रक्रिया के कारण गन्ने की खेती में लागत कम हुई और आमदनी बढ़ी। कीटव्याधियों का नियंत्रण जैविक तरीके से किया। जैविक तरीके से गुड़ तैयार किया। जैविक तरीके से गन्ने की नर्सरी लगाई और पौध तैयार कर इनका विक्रय प्रारंभ किया। गन्ने के पौधों की सप्लाई पूरे देश में ही नहीं बल्कि नेपाल तक होने लगी है।
हमने एक साल में 52 लाख पौधे किसानों को उपलब्ध कराये हैं। नर्सरी में गन्ना की पौध तैयार करने से प्रति एकड़ 35 से 40 क्विंटल गन्ने के बीज की बचत हो रही है। जैविक तरीके से खेत तैयार करने के कारण स्वाइल हेल्थ रिपोर्ट में हमारे खेत में जैविक कार्बन की मात्रा बढ़कर 1.01 हो गई।

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