कृषि यंत्रों पर अनुदान की प्रक्रिया सरल हुई

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किसान को अपनी मर्जी से यंत्र लेने की सुविधा

                          (विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। खेती-किसानी को अत्याधुनिक बनाने में कृषि यंत्रों का महत्वपूर्ण योगदान है। यंत्रों के उपयोग से धन, श्रम एवं समय की बचत होती है। इसी के मद्देनजर भारत सरकार एवं राज्य सरकार ने कृषकों के लिये ऑन लाईन पोर्टल की सुविधा प्रारंभ की है जिसके माध्यम से किसान पंजीयन करवाकर यंत्रों का क्रय कर रहे हैं और अनुदान किसानों के खाते में सीधे जा रहा है।
  • ई-पोर्टल से आई पारदर्शिता
  • किसान बिचौलियों के चंगुल से मुक्त
  • सरकारी ऑफिस में जाने की जरूरत नहीं
  • अनुदान सीधे खाते में

संचालक कृषि श्री मोहन लाल ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा सिंचाई उपकरणों जैसे ड्रिप, स्प्रिंकलर सिंचाई, पाईप एवं डीजल तथा विद्युत पंपों पर अनुदान दिया जा रहा है। भौतिक सत्यापन के आधार पर जिलों में उपसंचालक अनुदान का भुगतान करते हैं।कृषि सिंचाई उपकरणों पर अनुदान की ऑनलाईन डीबीटी व्यवस्था एवं अनुदान भुगतान लगभग दो माह पूर्व प्रारंभ किया गया है। जानकारी के मुताबिक गत 4 जनवरी तक पोर्टल की समीक्षा में 30 हजार से अधिक प्रमाणित आवेदनों में से 13400 से अधिक का भौतिक सत्यापन किया गया है तथा 6400 से भी ज्यादा प्रकरणों में किसानों एवं प्रदायकों को अनुदान जारी किया जा चुका है। भारत सरकार तथा प्रदेश सरकार के पोर्टल पर प्रत्येक हितग्राही का खाता नंबर, आधार नंबर एवं अनुदान राशि सहित अन्य प्रमाणित जानकारियां एमआईएस पर अपलोड की जा रही है।
राज्य कृषि अभियांत्रिकी के संचालक श्री राजीव चौधरी ने ई-पोर्टल के संबंध में बताया कि कृषि अभियांत्रिकी के पोर्टल पर बड़े कृषि यंत्र, ट्रैक्टर एवं अन्य यंत्रों के लिए हितग्राही किसान पंजीयन करवा रहे हैं। इस प्रक्रिया से पारदर्शिता आयी है तथा किसान बिचौलियों के चंगुल से मुक्त हुआ है। किसान को अब यंत्र लेने के लिये किसी भी सरकारी ऑफिस में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। पंजीकृत संस्था से यंत्र खरीद कर दस्तावेजों सहित खरीदी बिल को पोर्टल पर अपलोड करना पड़ता है अनुदान सीधे किसान के खाते में पहुंच जाता है।
बहरहाल पोर्टल के माध्यम से कृषि यंत्रों के क्रय उपयोग को बढ़ावा मिलने पर कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित है साथ ही मानव श्रम की भी बचत होगी तथा 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी करने में भी मदद मिलेगी परन्तु इसके लिए ब्लाक एवं जिला स्तर से लेकर संभाग एवं संचालनालय स्तर तक व्यवस्था को चुस्त-दुरूस्त करना होगा।

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