जमीन के अंदर लगाई जाने वाली लहसुन, मूंगफली, अदरक, शकरकंद का उत्पादन बहुत कम होता है। क्या जमीन में कुछ कमी है। कौनसी खाद डालकर अच्छा उत्पादन मिल सकता है।

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आपका जिला सभी प्रकार की फसलों के उत्पादन के लिये उपयुक्त है। कंदीय फसल अदरक तो वहां सदियों से लगाया जाता रहा है। बीच में सतत अदरक की खेती के चलते वहां ‘राईजोमराट’ कंद का सडऩ रोग आने लगा इस कारण उत्पादन में कुछ कमी हुई फिर भी आज 1400 हे. में अदरक, 3300 हेक्टर में लहसुन तथा 700-800 हेक्टर में शकरकंद वहां लगाई जाती है। मूंगफली का क्षेत्र आज भी पहले जैसा ही है कुछ क्षेत्र में मक्का का विस्तार हुआ है तो आपकी यह शंका कि कंदीय फसलों के लिये जिले की भूमि/जलवायु उपयुक्त नहीं है। आलू छिन्दवाड़ा की मुख्य सब्जी फसल भी है। आलू तो जिले के बाहर भी भेजा जाता है। आलू के सफल उत्पादन के कारण चंदनगांव स्थिति जोनल कृषि अनुसंधान केन्द्र पर आलू पर अनुसंधान कई दशकों से चलाया जा रहा है। वर्तमान की विकसित कृषि में भूमि/जलवायु के अलावा तकनीकी का भी रोल रहता है। गेहूं छिन्दवाड़ा की सभी प्रकार की भूमि में लगाया जाता है। जिसकी लागत सिंचाई के कारण बढ़ जाती है। आपने उर्वरक खाद की बात भी की है। कंदीय फसलों के अच्छे उत्पादन के लिए गोबर खाद के उपयोग से अच्छा उत्पादन सम्भव है।

नारायण पवार, छिंदवाड़ा

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