समस्या- गेहूं में कंडुआ रोग के उपचार के उपाय बतायें।

समाधान – आपका प्रश्न सामयिक है कंडुआ रोग एक ऐसा रोग है जिसका उपचार रोग आने के बाद संभव नहीं होता है। वास्तविकता यह है कि कंडुआ रोग की फफूंदी बीज के साथ भीतरी भाग में छुपी रहती है जो अंकुरण के साथ-साथ तने से होती हुई विकसित बालियों तक पहुंच जाती है। रोगग्रस्त पौधे एवं स्वस्थ पौधों में कोई फर्क नहीं दिखता और जब बाली झंडे में से फूटती है तब दानों की जगह काली फफूंदी दिखाई देती है जिस पर एक पतली झिल्ली भी रहती है रोग की फफूंदी हवा से उड़कर खेतों में फूलते गेहूं की बालियों में परागीकरण क्रिया के समय ही दानों में फिर से छुप कर बैठ जाती है रोगग्रस्त दाने भी सामान्य दानों के जैसे ही दिखते हैं जिनको बोने पर कई गुना बढ़कर कंडुआ आने वाले साल में दिखता है। आप निम्न उपाय करें।

  • जिस खेत में गेहूं पर कंडुआ दिखा हो उस खेत का बीज आने वाले साल में कतई नहीं लगायें।
  • यदि लगाना ही पड़े तो विटावैक्स नामक दवा की दो ग्राम मात्रा/किलो बीज के हिसाब से अनिवार्य रूप से उपचारित करके ही बोयें।
  • रोगग्रस्त व बालियों को पॉलीथिन के बैग में इकट्ठा करके नष्ट करते रहें।

– समर सिंह तोमर, भिंड

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