कृषि निर्यात के लिए नीति बनेगी

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नई दिल्ली। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय जल्द ही भारतीय कृषि उत्पादों की वैश्विक बाजार में पहुंच बनाने के लिए एक नीतिगत ढांचा बनाएगा। यह जानकारी केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने दी। यहां 10 वें कृषि ग्लोबल लीडरशिप सम्मेलन 2017 को संबोधित करते हुए श्री प्रभु ने कहा कि भारत के कृषि निर्यात को गति देने के लिये बहुपक्षीय स्तर पर व्यापार प्रतिबंधों को भी हटाए जाने की जरूरत है। श्री प्रभु ने कहा, ‘यदि वे (किसान)कुछ उत्पादित करते हैं तो उनकी पहुंच वैश्विक बाजार तक होनी चाहिए और उन्हें बेहतर दाम मिलने चाहिए और इसके लिए हम जल्द ही एक नीतिगत ढांचा बनाएगी।Ó
उन्होंने कहा कि हमारे पास हमारे कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार तक जाने का अधिकार है, बस हमें सभी तरह की व्यापारिक प्रतिबंध वाली गतिविधियों को खत्म करना होगा।
उल्लेखनीय है कि सरकार का एक लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय दोगुना करना है। कृषि प्रसंस्कृत उत्पाद निर्यातक प्राधिकरण के अनुसार वर्ष 2016-17 में भारत का कृषि उत्पादों का निर्यात करीब 16.27 अरब डॉलर रहा। इसमें अनाज, प्रसंस्कृत फल एवं सब्जियां, प्रसंस्कृत खाद्य और पशु उत्पाद शामिल हैं। श्री प्रभु ने कहा कि मंत्रालय कृषि क्षेत्र के लिये वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बनाने पर विचार कर रहा है। उन्होंने कहा, हम इस पर काम करना शुरू करेंगे।
डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन
प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन ने कहा है कि खेती का काम फायदेमंद होना चाहिए जिससे किसानों की आय बढ़े और युवा इसकी तरफ आकर्षित हों। कृषि क्षेत्र में ऋण माफी इसका दीर्घकालिक समाधान नहीं हो सकता। उन्होंने प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी के मुद्दे से निपटने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून (एनएफएसए) के तहत दलहनों को भी शामिल किए जाने की वकालत की। भारतीय खाद्य एवं कृषि परिषद (आईसीएफए) द्वारा आयोजित कृषि सम्मेलन में उन्होंने कहा कि देश को खाद्य सुरक्षा से सभी के लिए पोषण सुरक्षा की स्थिति को ओर बढऩा चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि जलवायु परिवर्तन की समस्या का सामना कर रही है। किसानों की आय नहीं बढ़ रही है। ऋण माफी की निरंतर मांग हो रही है। उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में ऋण माफी को अधिक समय तक चलाया नहीं जा सकता। भारतीय खेती को आवश्यक रूप से मुनाफे का व्यवसाय बनना चाहिए और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलनी चाहिए। डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि युवा खेती की ओर आकर्षित हो सकें ऐसी स्थिति बननी चाहिए

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