सिरलाय में ओशीन के डेमो के दौरान किसानों के साथ पीआई कम्पनी के अधिकारी.

पीआई के ‘ओशीन’ का शानदार प्रदर्शन

इंदौर। पीआई इंडस्ट्रीज लि. के उत्पाद ओशीन कीटनाशक का कपास की फसल पर प्रदर्शन ग्राम सिरलाय तहसील बड़वाह जिला खरगोन में किया गया। इस दौरान ओशीन की उपयोग विधि और रसचूसक कीटों पर पडऩे वाले प्रभाव के बारे में किसानों को बताया गया। यह जानकारी मार्केटिंग मैनेजर श्री संजीव गुप्ता ने दी।
ओशीन का यह प्रदर्शन सिरलाय के किसान श्री जितेन्द्र बलिराम सेप्टा के खेत कपास पर किया गया। इस अवसर पर पीआई इंडस्ट्रीज के रीजनल मैनेजर श्री सीएस नाहर, मार्केटिंग मैनेजर श्री संजीव गुप्ता और खरगोन जिला प्रभारी मनीष शर्मा भी उपस्थित थे।
उल्लेखनीय है कि इसी स्थान पर दस दिन बाद आयोजित फील्ड दिवस में बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए और उन्होंने ओशीन की प्रशंसा कर अपने अनुभव साझा किए। बताया कि कपास की फसल में ओशीन के उपयोग के बाद हरे मच्छर और माहू से तो सुरक्षा मिल ही रही है, साथ ही पौधों में बड़ी संख्या में हरी शाखाएं फैलने के साथ ही पौधों की वृद्धि भी अधिक हुई है।
ओशीन की विशेषताएं : ओशीन उत्पाद का निर्माण मूलत: जापान में हुआ जिसे भारत में पीआई इंडस्ट्रीज लि.ने परिचित कराया। ओशीन को भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने प्रयोग के बाद अनुशंसित किया है। जहाँ तक ओशीन की विशेषताओं की बात है तो यह उत्पाद तुरंत प्रतिक्रिया देता है , इस कारण कीट जैसे ही इसके सम्पर्क में आते हैं उनका खात्मा शुरू हो जाता है। ओशीन में अंतर्प्रवाही क्रिया होने से यह पौधों द्वारा जल्दी अवशोषित कर लिए जाने से यह कीटों पर असरदार वार करता है। यही नहीं ओशीन में ट्रांसलेमिनार क्रिया मौजूद होने के कारण यह पत्तियों की ऊपरी सतह पर छिड़काव किए जाने पर भी यह पत्तियों के निचले हिस्से में छुपे हुए कीटों को भी नियंत्रित करता है। ओशीन बारिश हो जाने पर भी नहीं घुलता है। छिड़काव के तीन घंटे बाद भी यदि बारिश हो जाती है तो भी इसका प्रभाव बना रहता है। इसी कारण से फसल हरी भरी और स्वस्थ रहती है और गुणवत्तायुक्त उपज मिलती है।
उपचार :
60 ग्राम/ एकड़ की दर से न्यूनतम 200 लीटर पानी में ओशीन का छिड़काव फ़ुहारेदार नोजल से करना चाहिए। फसल के आरंभिक चरण में ओशीन का छिड़काव इसलिए अवश्य करना चाहिए, क्योंकि इस दौर में हरे मच्छर और माहू फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं।

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