कीटों की सुरक्षा के लिए कीटनाशकों का चयन

मधुमक्खियों एवं परागण करने वाले

सब्जियों में परागण के लिये मधुमक्खियों एवं अन्य परागण कीटों पर कीटनाशकों का विषैला प्रभाव पड़ता है। मधुमक्खियां विभिन्न समूह के कीटनाशकों के प्रतिग्राही होती हैं। एकीकृत कीट/रोग प्रबंधन में चयनित कीट/रोगनाशियों का प्रयोग मधुमक्खियों एवं परागण करने वाले कीटों की सुरक्षा की पहली आवश्यकता है। इस परिप्रेक्ष्य में ऐसे कीटनाशकों का चुनाव जो परागण करने वाले कीटों को हानि नहीं पहुंचाते, लेकिन जिस लक्ष्य जिनके लिये उनका प्रयोग किया जाता है उसको नियंत्रित करते हैं। जिससे मधुमक्खियों की क्षति को कम किया जा सकता है। विगत वर्षों में ऐसे कीटनाशकों की परख की गयी है जो मधुमक्खियों एवं परागण करने वाले कीटों के लिये कम हानिकारक हैं एवं लक्ष्य पर सफल कार्य करते हैं।

मधुमक्खियों में विष प्रभाव का लक्षण: विभिन्न समूह के कीटनाशकों के विष का प्रभाव विशिष्ट होता है। सामान्यतया जो प्रभाव पाया जाता है इस प्रकार है-

  • बड़ी संख्या में मरी हुई मधुमक्खियां छत्तों के आसपास दिखाई देती है।
  • बी हाइव्स (छत्तों) फ्रेम के नीचे एवं ऊपर मरी हुई मधुमक्खियां पायी जाती है।
  • बी हाइव्स (छत्तों) के आसपास अपंग मधुमक्खियों का पाया जाना।
  • मधुमक्खियों का बी हाइव्स (छत्तों) के आस-पास असामान्य रूप से मंडरानाद्य पैर, पंख एवं पाचन तंत्र कार्य करना बंद कर देता है।
  • रानी मधुमक्खी  बी हाइव्स (छत्तों) में कम अंडे देती है।
  • मधुमक्खियां आपस में लड़ती हैं।
  • बी हाइब्स (छत्तों) के अंदर मधुमक्खियां भोजन संग्रहण कम करती है एवं उनकी जनसंख्या कम हो जाती है।
  • प्रौढ़ मधुमक्खियों की दीर्घायु में कमी आ जाती है।

मधुमक्खियों में कीटनाशकों के विषैले प्रभाव के आकलन का दिशा- निर्देश

नीचे दिये गये मृत्युदर का प्रयोग, दिशा-निर्देश के रूप में आकलन के लिये किया जा सकता है।

मधुमक्खियों/परागणकर्ता पर विष का प्रभावकृषि पर तीन तरह का प्रभाव पड़ता है जो इस प्रकार है-

  • परपरागित फसलों की उपज का कम होना।
  • मधु का कम उत्पादन।
  • मधु का संदूषित होना।
         मधुमक्खियों में विषाक्तता के कारण

  • कई कीटों को नियंत्रण करने वाले कीटनाशकों  का प्रयोग (जैसे क्लोरिनेटेड हाइड्रोकार्बन एवं सिन्थेटिक पाइरेथ्रॉयड्स)।
  • फसल में फूल आने के समय कीटनाशकों का प्रयोग।
  • फसल के उस भाग पर कीटनाशकों का छिड़काव जहां मधुमक्खियां रहती हैं।
  • संदूषित मधु (नेक्टर) का एकत्रीकरण या उपचारित पौधों से परागकण का एकत्रीकरण।
  • संदूषित भोजन, पानी का मधुमक्खियों द्वारा भोजन के लिये प्रयोग।
  • फूल से आच्छादित फसल पर कीटनाशकों का छिड़काव।
  • श्रमिक मधुमक्खी द्वारा कीटनाशी धूल एवं संदूषित परागकण को  बी हाइब्स (मधुछत्तों) में एकत्रीकरण।
  • कीटनाशकों के छिड़काव का प्रभाव आसपास होना मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाता है।
  • चूर्ण एवं ई.सी. फार्मूलेशन (संरूपण) वाले कीटनाशी का प्रयोग डब्ल्यू. पी.या ग्रेन्युल्स (दानेदार) से अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
  • कीट वृद्धि नियामक का प्रयोग मधुमक्खियों की संख्या में कमी करता है।
  • कीटनाशकों के साथ डीजल तेल का प्रयोग।
प्रतिदिन मरी हुई मधुमक्खियां (बी हाइव्स-बॉक्स के प्रवेश द्वार पर)   विषैला प्रभाव
100 सामान्य
200-400 कम
500-1000 मध्यम
1000 से अधिक
  • दिपेश कुमार
  • चेतन एम. बोन्दरे
  • प्रद्युम्न सिंह
  • एन.एस. भदौरिया

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