लाईट ट्रेप से करें कीट नियंत्रण

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  • डॉ. राम गोपाल सामोता द्य डॉ. बी.एल. जाट
  • डॉ. के.सी. कुमावत, कीट विज्ञान विभाग
  • कर्ण नरेन्द्र कृषि महाविद्यालय जोबनेर (राज.)
    email: ramgopal.765@gmail.com

लाईट ट्रेप कैसे कार्य करता है-लाईट ट्रेप कैसे कार्य करता है-लाईट ट्रेप में एक बल्ब होता है, जिसको जलाने के लिए बिजली/बैटरी की आवश्यकता होती है। जिससे कीडे आकर्षित होकर बल्ब से टकराकर इसके नीचे गिरकर कीट संग्रहण कक्ष में इक्कठे हो जाते हैं। कीट संग्रहण कक्ष सुरक्षा कवर से ढका होता है जो कि नीचे से खुला होता है। कीट संग्रहण कक्ष एवं सुरक्षा कवर के बीच दो लाईट लगी होती हैं, जो संग्रहण कक्ष से लाभदायक कीड़ों को आकर्षित करने में सहायक होती है। शत्रु कीट संग्रहण कक्ष में फंसे रह जाते हैं जिनको आसानी से नष्ट किया जा सकता है।

लाईट ट्रेप खेत में लाईट ट्रेप कैसे स्थापित करें

  • खेत में लाईट ट्रेप को खेत के मध्य में (1 लाईट ट्रेप प्रति हेक्टेयर) फसल की ऊँचाई से 2 फीट ऊपर लगाना चाहिये।
  • अच्छे परिणामों के लिए शाम के 7.00 से 10.00 बजे तक ट्रेप में लाईट चालू रखनी चाहिये।
  • कीट संग्रहण कक्ष में एकत्रित कीड़ों की गणना कर हटा/मार देना चाहिये। कीटों को मारने के लिए डाईक्लोरोवॉस (डीडीवीपी) 76 प्रतिशत ई.सी. नामक रसायन में रूई का फोआ डुबोकर उपयोग में लिया जा सकता है।
  • कीट संग्रहण कक्ष से काटनाशी रसायन में डूबे हुए रूई के फोए को उपयोग के तुरन्त बाद हटा देना चाहिये एवं इसके बाद फिल्टर को साफ करना चाहिए।लाईट ट्रेप से लाभ
  • इनका प्रयोग खेत में प्रकाश की तरफ आकर्षित होने वाले कीटों को पकडऩे व निगरानी के लिए किया जा सकता है। इसमें नर एवं मादा दोनों प्रकार के कीट फंस जाते हैं।
  • इस ट्रेप में लाभदायक कीट जो हानिकारक कीट की अपेक्षा प्राय: छोटे आकार के होते हैं एवं ये कीट फंस कर नहीं मरते बल्कि ये छोटे-छोटे छिद्रों से बाहर आ जाते हैं।
  • इसके इस्तेमाल से रसायनिक कीटनाशकों का प्रयोग कम किया जा सकता है।
  • यह यंत्र टिकाऊ होता है एवं साल-दर-साल प्रयोग में लाया जा सकता है।
  • फसलों, सब्जियों, फलों, मशरूम, जंगली पेड़ों आदि के मुख्य कीटों को लाईट ट्रेप का उपयोग कर मास ट्रेपिंग की जा सकती है। मास ट्रेपिंग से कीटों की संख्या कम होती है।
  • कीट संग्रहण कक्ष में छिद्र होते हैं जिससे लाभदायक कीड़े हानिकारक कीटों से अलग हो जाते हैं।
  • लाईट ट्रेप एक बार क्रय करने के बाद इसका उपयोग कई वर्षों तक किया जा सकता है एवं लाभदायक कीटों को बचाने के लिए किसान अकेला एवं समूह में प्रयोग कर सकता है।
  • कीटनाशी रसायनों का उपयोग कम होगा फलस्वरूप खर्चा भी कम होगा तथा जैव विविधता बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण होगा।
फसलों को हानिकारक कीटों से बचाने के लिए सामान्यतया किसान कीटनाशी रसायनों का अधिक तथा अनुचित मात्रा में उपयोग करते हैं। जिसके परिणामस्वरूप पर्यावरण प्रदूषण, मनुष्य, जीव-जन्तुओं पर हानिकारक प्रभाव एवं कीटों में कीटनाशी रसायनों के प्रति प्रतिरोधकता उत्पन्न हो रही है। उक्त परिणामों को देखते हुए समन्वित नाशी जीव प्रबन्धन (आई.पी.एम.) तकनीकी को अपनाया जाना आवश्यक है, जिससे कीट/व्याधि नियंत्रण में रसायनिक कीटनाशकों के उपयोग में कमी हो। आई.पी.एम. की कड़ी में लाईट ट्रेप (प्रकाश पाश) कीट नियंत्रण की एक महत्वपूर्ण यांत्रिक विधि है जिसमें खर्चा कम एवं लाभ अधिक है। लाईट ट्रेप फसलों के हानिकारक कीटों को नियंत्रण करने हेतु एक प्रमुख ट्रेप है। यह फसलों में कीट निगरानी का एक प्रमुख घटक है तथा हानिकारक कीटों की विभिन्न मौसमों में गतिविधियों को जानने हेतु यह एक अच्छा यन्त्र है।

 

 

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