औषधीय एवं सुगन्धित फसलों की जैविक खेती

औषधीय फसलों की खेती या सुगंधीय फसलों की खेती औषधीय द्रव्य जैसे अल्कलाइड, स्टेरॉयड, उडऩशील अल्कोहोल, तारपीन और कैम्फर इत्यादी के लिये करते हैं। ये रसायन सेकेंडरी मेटाबोलाईट कहलाते है तथा विभिन्न जटिल जैव रसायनिक क्रियाओं के उत्पाद होते हैं। इन फसलों की खेती रसायनिक उर्वरकों के द्वारा किया जाना विभिन्न कारणों से ठीक नहीं हैं, इनमें से प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।

  • औषधीय एवं सुगन्धित फसलों में उच्च प्रतिशत वाले रसायनिक खाद के प्रयोग से इनकी गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव पड़ता हैं। फसल की उपज में 20.30 प्रतिशत की वृद्धि अवश्य होती हैं पर खराब क्वालिटी के कारण बाज़ार में आधी कीमत भी नहीं मिलती हैं। अत: उचित होगा कि खऱाब क्वालिटी का माल 10 क्विंटल पैदा करने से अच्छा हैं कि अच्छी क्वालिटी का माल 9 क्विंटल पैदा किया जावे।
    उदाहरण के लिये असगंध में अगर नत्रजन यूरिया के रूप में 30 किग्रा/हेक्टर से अधिक देते हैं तो जड़ें कठोर और अन्दर से काली हो जाती हैं तथा आधी कीमत भी नहीं मिलती हैं।
  • रसायनिक खाद एवं कीटनाशकों के प्रभाव से इनके अवशेष उत्पाद में मौजूद रहते हैं जिससे इनका औषधीय गुण न केवल कम हो जाता हैं वरन कभी-कभी ये स्वास्थ्य के लिये भी हानिकारक होते है।
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के नए प्रावधानों के अनुसार वही औषधीय और सुगन्धित उत्पाद निर्यात होगा जिसमे कोई अवशेषी विषाक्तता नहीं होगी।
  • रसायनिक खेती में उपयोग आ रहे उर्वरक व रसायन प्राय: विदेशों से आयातित होते है जिनके उपयोग की अधिकता हमारी लागत बढ़ा देती है तथा इनके घातक प्रभावों से हमारी मृदा, जल, वायु यानी पूर्ण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
    अत: आज हमें अगर औषधीय एवं सुगन्धित फसलों की खेती करनी है तो जैविक खेती अपनानी होगी।
औषधीय एवं सुगन्धित फसलों की जैविक खेती आज के दौर में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त कर चुका हैं। विगत वर्षों में इस क्षेत्र में हुए अनुसंधान प्रचार- प्रसार के कारण विभिन्न राज्यों में बहुत से किसान भाई आज इस खेती से जुड़े हैं। विभिन्न औषधीय फसलों के उत्पादन से न केवल हमारी घरेलू मांगें पूरी हुई हैं, वरन कुछ मात्रा में हमारा निर्यात भी बढ़ा है।

जैविक खेती क्या हैं ?
जैविक खेती वह उत्पादन प्रणाली है जिसमे कृषि रसायनों एवं कीट व्याधि नाशकों का अल्पतम उपयोग हो। जो प्रणाली रसायन रहित विधियों जैसे फसल चक्र फसल अवशेष, जीवांश खाद, जैविक खाद तथा जैविक कीटनाशी पदार्थों पर आधारित हो।
जैविक खेती क्यों ?

  • कृषि प्रक्षेत्र पर घातक प्रभावों की कमी के लिये ।
  • उत्पादन की स्थिरता एवं उच्च गुणवत्ता के लिये ।
  • दीर्घकाल तक स्थाई खेती के लिये ।
  • पर्यावरण एवं स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिये।
  • जीवांश व जैविक पदार्थों के उपयोग और पुन: चक्रण।
  • विश्व बाज़ार मे अधिक भागीदारी के लिये।
  • मृदा की उर्वरता ह्रास रोकने के लिये।

जैविक खेती के प्रमुख आधार

  • फसल अवशेष
  • पशु एवं मानव अवशेष
  • हरी खाद
  • जैव उर्वरक (कल्चर)
  • खरपतवार एवं कृषि अवशेष
  • औद्योगिक अवशेष
  • वर्मीकम्पोस्ट

जैविक खेती की प्रमुख विशेषताएं

  • स्थानीय संसाधनों का भरपूर एवं स्थायी उपयोग ।
  • बाज़ार से खऱीदे गये संसाधनों का न्यूनतम उपयोग ।
  • मानवए मृदा, जल के संतुलन में अत्यल्प छेड़छाड़।
  • पर्यावरण संतुलन एवं जैव विविधता का संरक्षण तथा आर्थिक तंत्र में उनका तर्कसंगत उपयोग ।

कीटनाशक/रोगनाशक/नींदानाशक
1. संश्लेषित कीटनाशक प्रतिबंधित
2. फेरोमोन स्वीकृत
3. मैकेनिकल ट्रैप स्वीकृत
4. डेयरी उत्पाद स्वीकृत
5. नीम उत्पाद नियंत्रित उपयोग
6. बायो कंट्रोल नियंत्रित उपयोग
औषधीय एवं सुगन्धित फसलों की आवश्यकताएं कम होती है तथा कई बार ज्यादा उर्वरक दे देने से ज्यादा बढ़वार हो जाती है और फसल से उत्पाद कम प्राप्त होते है। जैविक खादों से मिलने वाले सूक्ष्म तत्व, पौधों के विभिन्न जैव रसायनिक क्रियाओं में एंजाइम व उत्प्रेरक का काम करते है जिससे फसल अच्छी रहती हैं। ये खाद धीर-धीरे पौधे को प्राप्त होते है जिससे समस्त क्रियाएं संतुलित व नियंत्रित गति से चलती है तथा अच्छी क्वालिटी (तीखापन) कड़वापन या सुगंध के उत्पाद प्राप्त होते हैं।
जैविक खेती एक बहुआयामी कृषि पद्धति है इसमें जैव उर्वरकों का भी अतुलनीय योगदान होता है। विभिन्न अनुसंधानों में एजेटोबेक्टर एवं पी.एस.बी. के परिणाम औषधीय एवं सुगन्धित पौधों पर बहुत अच्छे पाए गये है तथा इनकी गुणवत्ता में गुणात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही जैविक खेती से मिट्टी के भौतिक एवं रसायनिक गुणों में, खनिज तत्वों की उपलब्धता में, जैविक गतिविधियों वृद्धि कारकों के उत्पादन में सहायता मिलती हैं। साथ ही मानव स्वास्थ्य के लिये हितकर, स्वास्थ्यप्रद तथा उच्च गुणवत्ता वाले औषधीय एवं सुगन्धित फसल उत्पाद प्राप्त होते हैं। हमारा पर्यावरण स्थायी रूप से सुरक्षित रहता हैं।

 जैविक खेती के अंतर्राष्ट्रीय मानक
  खाद व उर्वरक                  प्रयोग स्वीकृत/ प्रतिबंधित
अ. रसायनिक खाद पूर्ण प्रतिबंधित
संश्लेषित खाद
ब. जीवांश पदार्थ
1 एफ. वाय. एम स्वीकृत
2 बायोगेस स्लरी स्वीकृत
3 पोल्ट्री वेस्ट कम्पोस्ट स्वीकृत
4 वर्मी कम्पोस्ट स्वीकृत
5 कम्पोस्ट, नाडेप कम्पोस्ट, जीवांश स्वीकृत
6 हरी खाद, पत्ती खाद स्वीकृत
7 बायो डायनेमिक खाद स्वीकृत
8 अज़ोला, ब्लू ग्रीन एल्गी स्वीकृत
9 राइजोबियम, एज़ोटोबेक्टोर पी.एस.बी. स्वीकृत
10 उद्योग अवशेषए रेशाएछिलका स्वीकृत
11 खनिज लवण स्वीकृत
  • दीपिका शर्मा
  • सुरेश चन्द यादव
  • सौरभ गर्ग
    email : deepikajaiman88@gmail.com

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