पोषण आज भी चुनौतीपूर्ण – खाद्य पदार्थों में पोषक तत्वों को बढ़ाना होगा

कृषि और पोषण जागरुकता पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला
(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। आजादी के 70 साल बाद भी देश में पोषण का विषय आज भी चुनौतीपूर्ण है। देश ने विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी के साथ-साथ आर्थिक क्षेत्र में वृद्धि दर्ज की है परन्तु पोषण पर कुपोषण आज भी भारी पड़ रहा है। इससे पार पाने के लिए आधुनिक कृषि और खाद्य प्रणाली को पोषण की दृष्टि से संवेदनशील और जनोपयोगी बनाना होगा। इसके साथ ही खाद्य पदार्थों में विविधता को अपनाना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री जैसे फल, सब्जी एवं अनाजों को पोषक तत्वों से भरपूर उत्पादन करने की जरूरत है जिसमें कृषि क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। खाद्य पदार्थों का उत्पादन पोषक तत्वों से भरपूर हो ऐसी व्यवस्था बनाकर कुछ हद तक समस्या का समाधान किया जा सकता है। समाज के सभी वर्गों में आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने के लिए मोटे अनाजों, ज्वार, बाजरा के साथ-साथ कोदो, कुटकी, रागी के उत्पादन और जैविक खेती तथा पशुपालन को प्रोत्साहित करना होगा यह विचार भोपाल में महिला बाल विकास विभाग द्वारा पोषण पर केन्द्रित अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला में विषय विशेषज्ञों ने व्यक्त किये।

मुख्य बिन्दु

  • कार्यशाला में सात राज्यों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
  • पोषण जागरुकता को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
  • भोपाल घोषणा पत्र जारी किया गया।
  • 313 विकासखंडों में एक ग्राम न्यूट्रीशन स्मार्ट विलेज बना।
  • जो खायें वो उगायें- जो उगायें वो खायें का सिद्धांत जरूरी।
  • कुपोषण से दूर समाज की कल्पना करने की प्रतिज्ञा।
  • सात दिन सात घर, तिरंगा थाली का नारा।

नरेन्द्र सिंह तोमर
कार्यशाला में केन्द्रीय पंचायत राज, ग्रामीण विकास और खनन मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा है कि भौतिकवाद के कारण प्राकृतिक संसाधनों के साथ वर्षों खिलवाड़ हुआ है। इसी कारण पोषण के क्षेत्र में असंतुलन पैदा हो गया है। समाज में पोषण के प्रति जागरूकता बहुत जरूरी है। श्री तोमर ने न्यूट्रीशन स्मार्ट विलेज पर कहा कि 313 ग्रामों से प्रारंभ हुई इस छोटी-सी शुरूआत का विस्तार प्रदेश के सभी गाँवों में होगा और गाँव स्वयं पोषण में आत्मनिर्भर बन सकेंगे।
श्रीमती अर्चना चिटनीस
महिला-बाल विकास मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि कृषि व्यवस्था को बाजारवाद से बचाने की जरूरत है। फसलें केवल बेचने के लिये नहीं लें, बल्कि जो खाते हैं, वह उगायें और जो उगायें वह खायें। श्रीमती चिटनिस ने कहा कि खेत और गाँव से बेर, कबीट, इमली, आँवला, सुरजना के नैसर्गिक पेड़ गायब हो रहे हैं। यह खाद्य विविधता की समाप्ति का संकेत हैं, इनको बचाना बहुत जरूरी है। इससे सहज-सुलभ और मुफ्त में मिलने वाले पोषक तत्व लोगों से दूर हो रहे हैं।
श्रीमती चिटनिस ने कहा कि 313 विकासखंडों के एक-एक ग्राम को न्यूट्रीशन स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने कहा कि गाँव तभी पोषण आहार में स्वावलंबी होंगे, जब वहाँ की मिट्टी सुपोषित होगी। इन गाँवों का न्यूट्रीशन ऑडिट कराने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि हम न्यूट्रीशन स्मार्ट नागरिक की अवधारणा पर कार्य कर रहे हैं। तिरंगा थाली के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बाजार की ताकतों के प्रभाव में कमी, परम्परागत ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से हम पोषण में कमी की समस्या को दूर करने में सफल होंगे। महिला बाल विकास मंत्री ने कहा कि पोषण जागरूकता का विषय प्रदेश के शालेय तथा महाविद्यालयीन पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। प्रत्येक घर-परिवार तक पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना ही पोषण संवेदनशील कृषि तथा पोषण जागरूकता का उद्देश्य है।
सुश्री ललिता कुमार मंगलम
राष्ट्रीय महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुश्री ललिता कुमार मंगलम् ने कहा कि भारत में कृषि श्रमिकों में 67 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्होंने कृषि उपकरणों तथा कृषि मशीनरी की

केले के छिलके से तैयार गमछा और अलसी के फाइबर से बनी कोटी से स्वागत

  अतिथियों का स्वागत केले के छिलके से तैयार गमछा और अलसी के फाइबर से बनी कोटी भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पोषण पंचांग का विमोचन भी हुआ |

कार्यशाला के तकनीकी सत्र

    कार्यशाला में मुख्यत: 6 तकनीकी सत्र हुए। जिनमें खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा, ग्राम स्तरीय वाणिज्य व्यापार गतिविधियों, ग्राम स्तरीय समूहों के क्षमता विकास तथा प्रभावी नीति निर्धारण शामिल हैं |

डिजाईनिंग महिलाओं की सुविधा के अनुसार करने की आवश्यकता बताई।
डॉ. ए.के. सिंह
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के उप-महानिदेशक डॉ. ए.के.सिंह ने कहा कि पोषण संवेदनशील कृषि और पोषण जागरूकता के क्षेत्र में मध्यप्रदेश की पहल देश की अन्य राज्यों के लिए अनुकरणीय है।

    प्रोटीन एवं पोषणयुक्त उत्पादों का प्रदर्शन
अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान चावल की अनेक किस्मों के अलावा वन्य जीवन से प्राप्त होने वाले प्राकृतिक फल, वनौषधि एवं पौष्टिक वस्तुओं के विशेष स्टाल लगाये गए। म.प्र. महिला वित्त एवं विकास निगम के तहत गठित स्व-सहायता समूहों एवं महिला स्व-सहायता समूहों, तेजस्विनी महिला महासंघों द्वारा आदिवासी क्षेत्रों में संचालित विभिन्न प्र-संस्करण इकाईयों में तैयार खाद्य सामग्रियाँ एवं औषधियों का प्रदर्शन किया गया। इन सामग्रियों में कोदो चावल, कुटकी चावल, कोदो बर्फी, राई तेल, महुआ लड्डू रोस्टेड अलसी, सफेद मूसली, बेर का पाउडर, मुनगा फली आदि शामिल हैं। इनके बारे में पौष्टिक तत्वों पर जानकारियाँ भी दी गई। मांडू की इमली, ताड़ी का गुड़, महुआ के व्यंजन, तेंदू, खिरनी भी लोगों ने पसंद की।
कृषि विशेषज्ञों के सुझाव
कार्यशाला के तकनीकी सत्र में विषय-विशेषज्ञों ने कहा कि पोषण संवेदी कृषि के व्यवहारिक क्रियान्वयन के लिए बीज और खाद की सहज उपलब्धता तथा उनका मूल्य निर्धारण किसान के हित में करना अति-आवश्यक होगा। कार्यशाला में गेहूं, चावल तथा मक्का की गुणवत्ता सुधार की आवश्यकता भी बताई। विषय-विशेषज्ञों का मत था कि पोषण में कमी का मुख्य कारण भोजन में प्रोटीन, आयरन तथा विटामिन-ए और जिंक की कमी का होना है। अत: फोर्टिफाईड, गेहूं, चावल तथा मक्का की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। कार्यशाला में नवजात शिशु के प्रथम 1000 दिवस पर उसकी उपयुक्त देखभाल के लिए प्रभावी नीति निर्धारण, पोषण जागरूकता के लिए चलाए जाने वाले अभियानों में परिवारों की महिलाओं के साथ-साथ पुरूषों की भागीदारी तथा शालेय पाठ्यक्रमों में पोषण साक्षरता को शामिल करने की जरूरत है।
कार्यशाला में पोषण संवेदी कृषि के लिए प्रभावी नीति निर्धारण और उपयुक्त प्रबंधन पर आयोजित विभिन्न सत्र में छत्तीसगढ़ योजना आयोग के सदस्य डॉ. डी.के. मारोठिया, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद अटारी लुधियाना के संचालक डॉ. राजवीर सिंह, अटारी जबलपुर के संचालक डॉ. अनुपम मिश्र ने भी विचार रखे। इसके साथ ही पोषण संवेदनशील पर्यावरणीय कृषि विशेषज्ञ डॉ. लीना गुप्ता, आई.आई.टी. इन्दौर की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रीति शर्मा, महाराष्ट्र, गुजरात, हैदराबाद से आए कृषि वैज्ञानिकों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
प्रतिभागी की राय
कार्यशाला में तीनों दिन उपस्थित रहकर बड़वानी जिले के सहायक संचालक कृषि श्री के.सी. मगर ने विशेषज्ञों के सुझाव अपनी डायरी में नोट किये। श्री मगर ने कृषक जगत को बताया कि कार्यशालाओं में भागीदारी से पोषक तत्वों वाली फसलों के अधिक उत्पादन एवं उपयोग पर बल मिलेगा। श्री मगर किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग में पिछले 25 वर्षों से सेवाएं देते हुए कृषकों को हमेशा मोटा अनाज का उत्पादन एवं उपयोग करने पर प्रेरित करते आ रहे हैं।

समापन अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती चिटनीस ने सभी विषय विशेषज्ञों का सम्मान किया। इस अवसर पर आयुक्त, संचालनालय महिला एवं बाल विकास डॉ. अशोक भार्गव ने आभार व्यक्त किया।
श्री जे.एन. कंसोटिया
प्रमुख सचिव महिला-बाल विकास श्री जे. एन. कंसोटिया ने पोषण जागरूकता के विस्तार की आवश्यकता बताई। शुभारंभ अवसर पर यूनीसेफ के सीएफओ श्री माइकल जूमा और न्यूट्रीशन प्रमुख श्री अर्जन वाग्ट, दीनदयाल शोध संसाधन दिल्ली के श्री अतुल जैन, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, अटारी जबलपुर के संचालक डॉ. अनुपम मिश्र, कृषि विश्वविद्यालय ग्वालियर के कुलपति डॉ. एस. के. राव तथा विषय-विशेषज्ञ उपस्थित थे।

 ये संस्थाएं शामिल हुई

        कार्यशाला में यूनिसेफ, इन्टरनेशनल फण्ड फॉर एग्रीकल्चर डेव्हलपमेन्ट, जर्मनी की संस्था जी.आई.जेड., इन्टरनेशनल राईस रिसर्च इंस्टीट्यूट, ग्लोबल इन्वायरमेन्ट फेसिलिटेटर प्रोजेक्ट, इन्टरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मेज़ एंड व्हीट ने भाग लिया |

www.krishakjagat.org
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