खाद भरपूर लेकिन किसान मजबूर

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08 नवम्बर 2022, इंदौर / भोपाल: खाद भरपूर लेकिन किसान मजबूर – प्रदेश में रबी की बोनी जोरशोर से चालू है , खाद की मांग अपने चरम पर है , प्रदेश में खाद उपलब्ध भी है लेकिन किसान की स्थिति ऐसी है कि सामने भरी हुई थाली है परन्तु निवाला मुंह तक नहीं पहुँच पा रहा है । स्थिति यह है कि सहकारी समितियों से अऋणी और नियमित खातेदार किसानों को उनके रकबे के मुताबिक  प्रति बीघा एक बोरी उर्वरक दिया जा रहा है। इस बारे में देपालपुर तहसील के ग्राम बिरगोदा के एक नियमित किसान ने बताया कि सहकारी समिति से एक पावती पर 5 बोरी उर्वरक दिया गया, ताकि सभी किसानों को उर्वरक उपलब्ध करवाया जा सके। यह स्थिति लगभग पूरे प्रदेश में व्याप्त है। सभी किसानों को उर्वरक मिल सके इसके लिए पहले शासन द्वारा चूककर्ता (डिफाल्टर ) किसानों को भी सहकारी समितियों से उर्वरक देने के आदेश हुए थे ,जिसे गत दिनों  निरस्त कर दिया गया। इस बारे में देपालपुर तहसील की  ग्राम गोकलपुर की सहकारी समिति के प्रबंधक श्री भेरू जाट ने कृषक जगत को बताया कि ऐसे किसानों को अब मार्केटिंग के गोदाम /वेयरहाउस से उर्वरक दिया जा रहा है। सेमदा के चूककर्ता किसान श्री गजराज परमार ने बताया कि उन्हें मार्केटिंग से  एक बीघा पर एक बोरी खाद दिया गया । सरकार के आदेशानुसार 70 प्रतिशत उर्वरक सहकारी क्षेत्र को मिलने के बावजूद उर्वरक वितरण व्यवस्था ध्वस्त होती नजर आ रही है । किसानों को उनकी मांग के अनुरूप उर्वरक नहीं मिल रहा है।

अविवेकी नीतियों की विसंगतियां

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी उच्चस्तरीय बैठकों में कह रहे हैं कि प्रदेश में उर्वरक की उपलब्धता पर्याप्त है अधिकारी भण्डारण – वितरण की व्यवस्था को व्यवस्थित करें । इसके बावजूद उर्वरक वितरण में नए – नए प्रयोग चालू हैं । उर्वरक वितरण में सहकारी क्षेत्र के अलावा निजी उर्वरक विक्रेता चैनल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है । जो समय – असमय किसान को उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए तत्पर रहता है । परन्तु शासन की निजी क्षेत्र के लिए नित नई  नीतियों से उर्वरक विक्रेता हताश और निराश हो रहे हैं । वर्तमान संकट की स्थिति में भी शासन के नए आदेश से जहाँ उर्वरक व्यवसायी हतोत्साहित हो रहे हैं वहीँ किसान भी परेशान हो रहे हैं । किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग मंत्रालय म. प्र. शासन के 3 नवम्बर 2022 को जारी आदेशानुसार अब निजी उर्वरक विक्रेताओं के भी काउंटर सहकारी व शासकीय उर्वरक विक्रय केन्द्रों पर लगाये जायेंगे या निजी उर्वरक विक्रेता अपने काउंटर से शासकीय अधिकारी, कर्मचारी की निगरानी में उर्वरक बिक्री  कर सकेंगे । उर्वरक व्यापारी के लिए सीमित संसाधनों में एक अतिरिक्त काउंटर की व्यवस्था करना कठिन काम है वहीँ किसान भी परेशान है कि पहले काउंटर से टोकन ले फिर विक्रेता की दुकान से उर्वरक उठाये । इस अव्यवहारिक आदेश का मैदानी स्तर पर विरोध भी शुरू हो गया है । प्रदेश के वीआईपी जिले  विदिशा में तो उर्वरक व्यापारियों  ने सामूहिक रूप से निर्णय ले कर 20 नवम्बर तक उर्वरक की खरीदी ही बंद कर दी है । क्या उर्वरक वितरण के एक चैनल के शने: शने: समाप्त हो जाने के बाद व्यवस्था सुचारू रूप से चल पायेगी ?   

महत्वपूर्ण खबर:  सरसों मंडी रेट (05 नवम्बर 2022 के अनुसार)

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