फूलों से महकता गाँव मेमदी

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इंदौर। फूलों की खुशबू सबको अच्छी लगती है। बगीचों में खिलने वाले सुन्दर फूल हमें आकर्षित करते हैं, ऐसे में यदि कोई पूरा गांव ही फूलों से महकने लगे, तो ध्यान आकृष्ट होना स्वाभाविक है। जी हाँ, इंदौर जिले में सिमरोल के पास एक गांव है मेमदी, यहां के किसान बड़े पैमाने पर फूलों की खेती करते हैं।
करीब दो हजार की आबादी वाले मेमदी में फूलों की खेती करने वाले श्री अंकित सुसलादे ने कृषक जगत को बताया कि वे 12 एकड़ में फूलों के साथ पारम्परिक खेती भी करते हैं। फूलों की खेती से उन्हें अतिरिक्त आय हो जाती है। बुके में प्रयुक्त लम्बी कलियों वाले फूल ग्लेडिश के अलावा गेंदा, सेवंती जैसे सफ़ेद फूल वाले बिजली, नवरंगा, पिंकी भी लगाते हैं। अब गुलाब की कलमें भी तैयार की जा रही है। लेकिन ग्लेडिश को इसलिए प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इसमें दवाई का खर्च कम लगने से बचत अच्छी हो जाती है। मजदूरी भी कम लगती है। ग्लेडिश का दस कली का बंडल 50-60 रुपए में बिकता है। प्याज के बीज की तरह इनके रोपे तैयार किए जाते हैं। दो माह में कलियाँ लगना शुरू हो जाती है। अच्छी पैदावार के लिए रोपाई से पहले गोबर और मुर्गी का खाद डाला जाता है। उत्पादित फूलों को इंदौर की चोईथराम मंडी में बेचा जाता है। फूलों से उन्हें सालाना करीब चार लाख रु. की अतिरिक्त आय हो जाती है। जबकि इसी ज़मीन पर वे पारम्परिक खरीफ और रबी की फसल भी लेते हैं, जो आय का मूल स्रोत है।
उल्लेखनीय है कि मेमदी में फूलों की खेती अधिकांश किसान करते हैं, इनमें श्री रतन सिंह केलवा, श्री परमानन्द, श्री मदनलाल केलवा, श्री प्रेमचंद, श्री जीवनलाल और श्री देवीलाल परिहार जैसे अनेक किसान हैं, जो फूलों की खेती करके अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फूलों से महकने वाला मेमदी गांव अन्य किसानों को भी फूलों की खेती करने की प्रेरणा दे रहा है।

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