उद्यानिकी लायसेंस मामले में हुआ नया खुलासा

(विशेष प्रतिनिधि)
इंदौर। इन दिनों खरीफ सीजन की बोवनी के बाद अब किसान खेतों में ऊगे अवांछित खरपतवार के विनाश के लिए या तो दवाई का छिड़काव कर रहे हैं या कर चुके हैं. इस बीच शहर से लेकर सुदूर ग्रामीण अंचलों में कृषि आदान सामग्री की दुकानों पर ग्राहकी का दौर जारी है। उज्जैन जिले के रोहलकला के एक जागरूक किसान भेरूलाल परमार को उद्यानिकी फसल प्याज के बीज की खरीदी करने पर उद्यानिकी लायसेंस के बगैर सामान्य बिल दिए जाने पर आपत्ति लेने के बाद उसे संबंधित दुकानदार ने जीएसटी की सील लगाकर बिल दिया। यह किसान की जागरूकता से ही सम्भव हो पाया। इसलिए किसानों को दुकानदारों से पक्का बिल, जिसमें टिन के अलावा जीएसटी का नंबर भी हो वह बिल अवश्य लेना चाहिए।

जब इस मामले की पड़ताल की गई तो यह खुलासा हुआ कि इंदौर -उज्जैन संभाग के 15 जिलों में से उज्जैन संभाग के 7 जिलों में उद्यानिकी बीज विक्रेताओं की संख्या 1089 है, जबकि मात्र 219 ने ही लायसेंस लिए हैं। जबकि इंदौर संभाग के 8 जिलों में कुल 1473 उद्यानिकी बीज विक्रेता हैं जिनमें से 949 ने लायसेंस ले रखे हैं। सर्वाधिक संख्या इंदौर जिले की है, जहाँ 550 विक्रेताओं में से 329 ने उद्यानिकी लायसेंस ले रखे हैं।

इस बारे में जिला उज्जैन के मध्य प्रदेश खाद-बीज कीटनाशक विक्रेता संघ के सचिव श्री संजय रघुवंशी ने बताया कि बीज अधिनियम 1966 के तहत बीज विक्रेता को एक ही लायसेंस लेना है। इसलिए उद्यानिकी बीज का अलग से बिल इसलिए नहीं दिया जा रहा है, क्योंकि बीज अधिनियम में उद्यानिकी को अलग से वर्गीकृत नहीं किया है। राज्य शासन द्वारा कृषि के अलावा उद्यानिकी के बीज के लिए अलग से लायसेंस लेने की अधिसूचना जारी करने के खिलाफ करीब 5 वर्ष पूर्व मध्य प्रदेश खाद -बीज कीटनाशक विक्रेता संघ के अध्यक्ष श्री दिलीप बाकलीवाल द्वारा इंदौर उच्च न्यायालय में याचिका लगाई थी, जिस पर कोर्ट द्वारा स्थगन आदेश दिया गया है। तब से यह मामला न्यायालय में लंबित है।

कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा कभी किसी अमानक सामग्री का कोई नमूना ले भी लिया जाता है, तो उसकी जाँच रिपोर्ट इतनी देर से आती है, कि बाद में उसका कोई औचित्य नहीं रह जाता है। जबकि किसानों को बेवजह खामियाजा भुगतना पड़ता है। यहां भी किसानों ने कृषि आदान विक्रेताओं द्वारा पक्का बिल नहीं दिए जाने का आरोप लगाया है।

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