कभी बारिश, कभी उमस, सेहत का रखें ध्यान

मानसूनी बीमारियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। डेंगू, मलेरिया, डायरिया व टाइफॉइड के मामले सामने आने शुरू हो गए हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सेहतमंद रहना है तो संतुलित भोजन खाएं और उबाला हुआ पानी पिएं।
मानसून में होने वाले रोगों को हवा, पानी और मच्छर से होने वाले रोगों की श्रेणियों में बांटा जाता है। मानसून संबंधी रोग उन लोगों को अधिक होते हैं, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को इस संबंध में खास एहतियात रखने की जरूरत होती है।
पानी से होने वाले रोग
गेस्ट्रोएनट्राइटिस : बार – बार डायरिया होना गेस्ट्रोएनट्राइटिस का प्रमुख लक्षण है। 24 घंटे के भीतर तीन या उससे अधिक बार पतले दस्त होने के अलावा इस स्थिति में उल्टी आने, चक्कर आने, पेट में मरोड़, सिरदर्द व तेज बुखार के लक्षण भी देखने को मिलते हैं।
पीलिया : पीलिया में त्वचा पर सफेदी व आंखों में पीलापन दिखायी देता है। इस स्थिति में पेशाब व मल का रंग गहरा पीला हो जाता है।
उपाय: उबला हुआ या क्लोरिनेटेड पानी पिएं। ताजे फल-सब्जियां व घर में बना हुआ खाना खाएं। सड़क किनारे बिकने वाले खुले में रखे खाद्य पदार्थों को खाने से परहेज करें। ठंडे पानी की रेहडिय़ों, रेस्तरां व होटल इत्यादि में इस्तेमाल की जाने वाली बर्फ भी संक्रमण का प्रमुख कारण है। उबला हुआ या बोतल बंद पानी ही पिएं। खाने से पहले व शौचालय जाने के बाद हाथ जरूर धोएं।
मच्छर से होने वाली बीमारियां
डेंगू, मलेरिया व चिकनगुनिया: इसें 103 डिग्री तक तेज बुखार होने के साथ शरीर दर्द, उलटी व सिरदर्द के लक्षण देखने को मिलते हैं। इस वजह से आंखों में दर्द, त्वचा पर लाल चकत्ते खारिश और मांसपेशियों में कमजोरी भी होती है। मलेरिया में ठंड व ठिठुरन होती है और चिकनगुनिया में सूजन व अकडऩ के अलावा जोड़ों व मांसपेशियों में असहनीय दर्द होता है।
उपाय: घर के आसपास बारिश का पानी एकत्र न होने दें। सुबह व शाम के समय घर के दरवाजे व खिड़़कियां बंद रखें। स्प्रे, कॉइल्स, मच्छर से बचाने वाली क्रीम, लिक्विड्स या मच्छरदानी का नियमित इस्तेमाल करें।
हवा से होने वाले रोग
जुकाम व इन्फ्लुएंजा बारिश के साथ सामान्य जुकाम व इन्फ्लूएंजा का संक्रमण तेजी से फैलता है। आमतौर पर संक्रमण के संपर्क में आने के दो से तीन दिन बाद सामान्य जुकाम के लक्षण नजर आते हैं। गले में खराश, सांस लेने में परेशानी, साइनस में सूजन, छींक, खांशी, सिरदर्द, बुखार, मांसपेशियों में दर्द, पसीना आना व हर समय थकावट देखने को मिलती है।
उपाय: छींक व खांसते समय मुंह कवर करें। रुमाल की जगह टिश्यू पेपर का इस्तेमाल करें। टिश्यू पेपर को इस्तेमाल के तुरंत बाद डस्टबिन में डाल दें। साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।
मानसून में इनसे करें दोस्ती
तुलसी : रोज तुलसी की पत्तियां खाने से वायरल बुखार, कफ व जुकाम से लडऩे की शारीरिक क्षमता बढ़ती है। आप तुलसी की पत्तियों को सलाद में मिलाकर खा सकते हैं। इन्हें धोकर गुड़ व चीनी के साथ लेना भी अच्छा रहता है।
लहसुन: शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाने और टॉक्सिन्स को शरीर से बाहर का रास्ता दिखाने में लहसुन को महारत हासिल है। लहसुन को सूखा भूनकर खा सकते हैं और सब्जी व सूप में डाल सकते हैं।
कड़वे व खट्टे खाद्य पदार्थ: करेला व मैथी आदि स्वाद में भले ही कड़वे हों, पर सेहत के लिये फायदेमंद हैं। इसी तरह इस मौसम में खट्टे खाद्य पदार्थों को ज्यादा से ज्यादा मात्रा में अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता बढ़ेगी।
आम: मानसून के दौरान अपनी डाइट में आम को भरपूर मात्रा में शामिल करें। यह एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और रोगों से लडऩे में मदद करता है। आम त्वचा संबंधी परेशानियों को दूर करता है और पाचन भी ठीक रहता है।

  • भोजन में घी, दूध, चावल, उड़द, नारियल, मलाई, मक्खन, शहद, मौसमी फल, हलवा, हरी साग-भाजी, टमाटर, गाजर, आंवला आदि का सेवन करना चाहिए।
  • बादाम का हलवा, दूध में पकाया हुआ छुहारा, मीठा अनार, प्याज का रस, नारियल की गिरी और दूध की खीर, उड़द दाल का लड्डू, गन्ना रस, सौंठ और काली मिर्च तथा मैथी का लड्डू बहुत फायदेमंद है। योग्य वैद्य की सलाह अवश्य लेनी चाहिए, ताकि अपने शरीर के अनुकूल पथ्य-अपथ्य का चयन किया जा सके।
  • चिकनाईयुक्त, मधुर, लवण और अम्ल रस वाले पदार्थ का सेवन करके अपना स्वास्थ्य बनाए रखें। बासी, दुर्गंधयुक्त अधिक चटपटे मसालेदार खानपान से बचना ही श्रेयस्कर है।
  • ठीक समय पर, चबा-चबाकर प्रसन्नता पूर्वक भोजन करना चाहिए। भोजन के पूर्व नींबू पानी और भोजन के पश्चात छाछ पीना लाभदायक होता है।
  • रूखे, कटु-तिक्त-कषाय, अति शीतल और वात प्रधान भोज्य पदार्थ न खाएं। अन्यथा जोड़ों के दर्द, गठिया और सायटिका से पीडि़त हो सकते हैं।

इसी प्रकार अधिक खटाई से भी बचें, ताकि खांसी-सर्दी, जुकाम, नजला आदि से बचाव हो सके। नींबू और ताजा दही वर्जित नहीं है।

  • अधिक देर तक भूखे न रहें, क्योंकि जठराग्नि की प्रबलता के कारण यथा समय भोजन नहीं करने से यह अग्रि शरीर की धातुओं को जला डालती है, जिससे जीवन शक्ति का क्षय होता है।
  • सेहत बनाने के लिये प्रतिदिन स्नान भी जरूरी है। कुछ लोग ठंड के डर से कई दिन तक नहाते नहीं, यह उचित नहीं। पानी कुनकुना कर लेना चाहिए। अत्यधिक ठंडा और अधिक गर्म पानी नुकसान पहुंचाता है।
  • मल-मूत्र विसर्जन में आलस्य नहीं करना चाहिए। रात को सिर ढंककर सोना भी उचित नहीं होता।

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