समर्थन मूल्य में डकैती का नाम भावान्तर

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मुख्यमंत्री द्वारा शासन के सभी प्रमुख सचिवों को भावांतर योजना समझाने के लिये निर्देशित किया गया है। भावांतर योजना सरकार के लिए ‘भयगत सांप छुछूंदर केरी, उगलत निगलत पीर घनेरी’। इस योजना के बार -बार संशोधन करना यह प्रमाणित करता है कि योजना किसान हितैषी नहीं है क्योंकि सरकार ने जश्न मना कर योजना को लांच किया था इसलिये सरकार इसे वापस लेने में अपमानित महसूस कर रही है। जमीनी स्तर पर मंडियों में इस योजना के कारण किसान ठगा जा रहा है इस ठगी को कलेक्टर कमिश्नर से लेकर मंडियों के सभी अधिकारियों ने देखा है किसानों को व्यापारी 50 प्रतिशत दाम देकर लूट रहे हैं। भावांतर योजना की इस लूट को प्रमाणित किया जा चुका है प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी सरकारी कामकाज छोड़कर, इस भंवर में फंसी इस योजना को किस प्रकार निकाल पाएंगे?

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में तथा पी.एम. ने अपने भाषण में लागत के आधार पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य प्रदान किया जाने का वचन दिया था। यह समर्थन मूल्य सरकार नहीं दे सकती ऐसा शपथ पत्र सरकार ने चुनाव जीतने के बाद 2015 सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत किया है जो समर्थन मूल्य पूर्व में मिल रहा उसमें किसानों की लागत भी नहीं मिल पा रही है।
जिस समर्थन मूल्य में लागत भी नहीं मिल पा रही थी उसी में डकैती का नाम भावांतर योजना है। सरकार का यह निर्णय दिशाहीन किसान विरोधी तथा व्यापारी हितैषी है।

शिव कुमार शर्मा (कक्का जी)
राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ

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