मोटे अनाज छिलाई के लिए आधुनिक यंत्र

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मोटे अनाज की छिलाई हेतु उपलब्ध पारंपरिक एवं आधुनिक विधियां एवं यंत्र:-
मोटे अनाज की छिलाई के पारंपरिक यंत्र:
ग्रामीण क्षेत्रों में मुख्यत: मोटे अनाज की छिलाई पारंपरिक पद्धति एवं पारंपरिक यंत्रों (चित्र – 1) की सहायता से की जाती है। यह विधि बहुत की कठिन व अधिक समय लेने वाली होती हैं। पारंपरिक यंत्र का ज्यादातर उपयोग ग्रामीण क्षेत्र के आदिवासी किसान करते हैं, यहां बिजली कि समस्याएं रहती है।

मोटे अनाज दुनिया में सबसे महत्वपूर्ण खाद्य फसलों में से एक है। वर्ष 2016-17 में भारत में 5.65 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर मोटे अनाज की खेती की गयी, जिससे कुल उत्पादन 0.50 मिलियन टन प्राप्त हुआ। भारत देश के ग्रामीण इलाकों में मोटे अनाज की छिलाई मुख्यत: मानव चलित यंत्र से की जाती है। अनाज की ऊपरी परत जो मनुष्य के खाने लायक नहीं होती, इसे अलग करने की प्रक्रिया को ही छिलाई कहते हैं। अनाज से चावल प्राप्त करने और उस चावल को फिर खाने योग्य बनाने की यह एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। रागी को छोड़कर अन्य मोटे अनाज की बाहरी परत अच्छी तरह से संरक्षित होती है। इसलिए इसकी परत को अलग करने में काफी समस्याएं आती हैं । छिलाई करने का यह पारंपरिक तरीका बहुत मुश्किल एवं थकान वाला होता है। मानव चलित यंत्र से छिलाई करने में श्रम की अधिक आवश्यकता होती है, जिससे मजदूरी भी तुलनात्मक रूप से अधिक हो जाती है। साथ ही श्रमिकों की अनुपलब्धता तथा प्रतिकूल मौसम के दौरान इनकी दक्षता में कमी देखी गई है। अत: यह महसूस किया गया है कि कम लागत पर बेहतर और तेजी से कार्य करने वाले छिलाई यंत्रों का विकास एवं उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

 मोटे अनाज की छिलाई हेतु उपलब्ध पारंपरिक एवं आधुनिक विधियां एवं यंत्र।

मोटे अनाज के छिलाई में उपयोग आने वाले विभिन्न मानव चलित यंत्र:
हस्त चलित यंत्र: यह यंत्र 50-60 मिलीमीटर की मोटाई व 400-500 मिलीमीटर की गोलाई के दो चक्र से बना होता है जो पत्थर की चक्की की भांति ही होता हैं। ये दोनों चक्र मिट्टी और धान की भूसी के मिश्रण से बना होता हैं। इस यंत्र को स्थानीय भाषा में जांता (चित्र-1: अ) के नाम से भी जाना जाता हैं। इसकी निचले वाली चक्र स्थिर एवं ऊपर की चक्र लकड़ी के हैंडल की सहायता से घूमती है। अनाज की छिलाई करने के लिए चक्र के बीच में से डाला जाता है। इस विधि से 20-30 किलोग्राम अनाज की छिलाई में पूरे दिन प्रक्रिया लग जाते है तथा चावल की वसूली भी बहुत कम 40-45 प्रतिशत ही प्राप्त होती हैं। इसी प्रकार एक अन्य पारंपरिक विधि (चित्र1: ब), जो हस्त चलित है।
पैर चलित यंत्र : पैरों की सहायता से चलने वाला यह यंत्र 3-5 मीटर लंबाई की एक वजनदार लकड़ी के ल_े से बनी होती है। स्थानीय भाषा में इसे फुट पोंडिंग (चित्र-1: स) विधि के नाम से भी जाना जाता है। अनाज की ऊपरी परत को अलग करने के लिए इस यंत्र का उपयोग कर अनाज को पीटा जाता है। यंत्र का एक छोर अनाज को पीटने के लिए होता है। इस विधि से एक आदमी पूरे दिन में केवल 5-10 किलोग्राम अनाज की छिलाई करने में सक्षम है, क्योंकि इस विधि से व्यक्ति लगातार काम करने में सक्षम नहीं है।
मोटे अनाज की छिलाई के आधुनिक यंत्र:
मोटे अनाज कि छिलाई करने में आने वाली समस्याओं को देखते हुए भारत में बहुत सारी अनुसंधान संस्थाओं और कंपनियों ने इसकी छिलाई करनेे के लिए विभिन्न प्रकार के यंत्रों का विकास किया है जो किसानों के लिए काफी मददगार साबित हो रही है। यह यंत्र बिजली से चलित श्रेणी में उपलब्ध हैं। केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल द्वारा निर्मित यंत्र (नमूना-। व नमूना-।।):-इस यंत्र (चित्र 2: अ व ब)का निर्माण सभी प्रकार के माटे अनाज जैसे रागी, सांवा, चीना, कुकुम, कोदो, और कुटकी कि छिलाई करने के लिए किया गया है। यह यंत्र दो नमूने में उपलब्ध है, जो घर्षण एवं वायु गतिकीय बल के सिद्धांत पर कार्य करता हैं। पर्यावरण के अनुकूल कार्य प्रणाली वाले इस यंत्र में चक्रवात विभाजक लगा है, जो भूसी को एक बंध क्षेत्र में एकत्र करता है। यह यंत्र एकल व तीन फेस की बिजली से चलती है। यह 100 किलोग्राम प्रति घंटे की क्षमता से छिलाई करने में सक्षम है। इसकी बनावट ऐसे की गई है कि यह 1 किलोग्राम अनाज कि छिलाई भी एकल पास में आवश्यकतानुसार कर सकता है। इस यंत्र की खासियत है कि अनाज के विभिन्न आकार के अनुरूप इसकी छिलाई सतह के बीच की दूरी को कम ज्यादा किया जा सकता है। इस यंत्र की दक्षता 95 प्रतिशत से भी ज्यादा हैं। आकार में यह यंत्र 860 मिमी लंबाई, 842 मिमी चौड़ाई व 1460 मिमी ऊंचाई कि हैं। इस यंत्र की कुल लागत 80 हजार रूपये है।
तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय द्वारा निर्मित यंत्र: यह यंत्र (चित्र 2: स)भी सभी प्रकार के मोटे अनाज जैसे कोदो, कुटकी, रागी, सांवा, कुकुम व चीना की छिलाई करने में सक्षम हैं। तीन फेस की बिजली से चलने वाली इस यंत्र की क्षमता 100 किलोग्राम प्रति घंटे की है। यह यंत्र केन्द्रीय एवं सघात बल के सिद्धांत पर कार्य करता है। अन्य यंत्र की तुलना में यह आकार में बहुत छोटी है, जिससे इसे आसानी से एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जा सकता है। इसकी कुल लागत 70 हजार रूपये है।
इन्डोसाव निजी कंपनी द्वारा निर्मित छिलाई सह दाना निकालने वाला यंत्र: इस यंत्र (चित्र 2: द) का निर्माण केवल कोदो के फसल की छिलाई करने के लिए किया गया हैं। इसकी यंत्र कि कुल लंबाई 1400 मिमी, चौड़ाई 990 मिमी व ऊंचाई 1880 मिमी की हैं। यह आकार में बड़े एवं अधिक वनज होने के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान ले जाने में कठिनाई होती हैं। इस यंत्र से 15 किलोग्राम कोदो अनाज की छिलाई करने के लिए लगभग 5 पास कि आवश्यकता होती है। इसलिए इसकी क्षमता 50-100 किलोग्राम प्रति घंटा एवं दक्षता 95 प्रतिशत पाई गयी हैं। यह यंत्र घर्षण बल के सिद्धांत पर कार्य करती है। इस यंत्र की कुल अनुमानित लागत 1.75 लाख की है जो अन्य मशीन की तुलना में काफी अधिक हैं।
विक्टर कृषि निजी कंपनी द्वारा निर्मित यंत्र (नमूना-। व नमूना-।।) : इस यंत्र (चित्र 2: घ) का निर्माण विशेष रूप से चीना, कुकुम व कुटकी अनाज की छिलाई के लिए किया गया हैं। यह यंत्र हथौड़ा चक्की कि तरह ही कार्य करता है। लेकिन इसमें लगे हथौड़े की गति को अनाज के अनुरूप संतुलित किया जा सकता है। यह यंत्र एकल फेस बिजली से चलती है। इसकी क्षमता 40 किलोग्राम प्रति घंटे और दक्षता 80 प्रतिशत है। नमूना-। की तरह ही कार्यप्रणाली वाली इस यंत्र (चित्र 2: ड) का निर्माण केवल कोदो अनाज की छिलाई के लिए किया गया है। जबकि यह यंत्र तीन फेस बिजली से चलती है। इसकी क्षमता 100 किलोग्राम प्रति घंटे की है, जो नमूना-। कि तुलना में अधिक है।

  • प्रवीण कुमार निषाद
  • नीलिमा जांगड़े
  • नवनीत ध्रुवे
    द्गद्वड्डद्बद्य : email : praween.nishad@gmail.com

 

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