bhavantar

भावान्तर का भ्रम

www.krishakjagat.org
                                                                     (विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये सरकार द्वारा शुरू की गई भावान्तर भुगतान योजना में अब स्वयं सरकार एवं किसान दोनों उलझ गए हैं तथा मंडी व्यापारियों की पौ बारह हो गई है। सरकार दिन-प्रतिदिन नियम बदल रही है तथा किसान को कुछ सूझ नहीं रहा है और व्यापारी औने-पौने दाम पर खरीदी कर किसान को चूना लगा रहे है जिससे भ्रम की स्थिति निर्मित हो रही है। किसान को उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है जिससे माहौल बिगड़ रहा है। प्रदेश के 70 लाख किसानों में से 19 लाख किसानों ने ही पंजीयन कराया है तथा शेष किसान पंजीयन से वंचित हैं।
भावान्तर योजना किसानों के फायदे के लिए बनी है। व्यापारी किसानों को कम दाम न दें। यदि हालात नहीं सुधरे तो मामले की समीक्षा करेगी सरकार।
– गौरी शंकर बिसेन
कृषि मंत्री म.प्र.
भावान्तर योजना के माध्यम से सरकार किसानों को भ्रमित कर रही है। इससे किसानों को कोई लाभ नहीं होगा। सरकार की कथनी और करनी में अन्तर है
– शिव कुमार शर्मा (कक्का जी)
अध्यक्ष भारतीय किसान मजदूर संघ
योजना का फायदा व्यापारियों को मिलेगा। सरकार को तय करना चाहिए कि एफएक्यू वाली फसलें व्यापारी एमएसपी पर ही क्रय करें।
– डॉ. जी.एस. कौशल
पूर्व कृषि संचालक,जैविक खेती विशेषज्ञ

किसानों का कहना है कि उन्हें योजना की जानकारी ही नहीं है। वहीं अधिकांश किसानों का कहना है अब तक पंजीयन क्रमांक ही नहीं मिला। घोषणा के अनुरूप बिक्री के बाद 50 हजार तक की नगद राशि भी नहीं मिल रही है जिससे मंडियों में हंगामा शुरू हो गया है। किसानों का मानना है कि सरकार भावान्तर के माध्यम से सूखे पर से ध्यान हटाने की साजिश रच रही है, जिससे मुआवजा न देना पड़े। कुछ का कहना है कि इस योजना से व्यापारियों को बैकडोर भ्रष्टाचार का माध्यम उपलब्ध कराया गया है। क्योंकि मंडी व्यापारी के लिये किसी भी फसल की न्यूनतम कीमत तय नहीं की गई है। व्यापारियों ने फसलों के दाम घटा दिए हैं जिससे सरकार और किसान दोनों को नुकसान हो रहा है। माडल रेट पूरी खरीदी के बाद दिसम्बर में तय होंगे। इसके बाद माडल रेट और एमएसपी के अंतर की राशि किसानों के खाते में जमा की जाएगी। ज्ञातव्य है कि सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3050 रु. प्रति क्विं. तय किया गया है जबकि मंडियों में 1200 से 2500 रु. प्रति क्विंटल तक खरीदी की जा रही है। इसी प्रकार मक्का का समर्थन मूल्य 1365 रु. है जबकि खरीदी 800 से 2000 रु. प्रति क्विंटल पर नीलाम हो रही है। अन्य फसलें भी समर्थन मूल्य से कम कीमत पर नीलाम की जा रही हैं।

योजना की जानकारी नहीं

धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम ढोलना कला के धार के कृषक श्री श्याम पिता श्री आत्माराम ढोलिया 40 बीघा भूमि पर खेती करते हैं। खरीफ सीजन में सोयाबीन का 50 क्विंटल उत्पादन लिया। भावांतर योजना की जानकारी नहीं होने से पंजीयन नहीं कराया। उनका कहना है कि सोयाबीन के भाव अच्छे आयेंगे तभी स्थानीय मंडी से विक्रय करेंगे 5 हजार की जनसंख्या वाले इनके गांव से इस योजना की जानकारी कृषि विभाग द्वारा नहीं दी गई। कई कृषक वंचित रह गये। वैसे वे रबी सीजन में 7 बीघा में लहसुन, 1 में मटर, 20 बीघा में डालर चना एवं 2 बीघा में प्याज लगा रहे हैं।

तुरन्त लाभ नहीं दिख रहा

उज्जैन के पानखेड़ी निवासी श्री रणछोड़ आंजना बताते है कि 90 बीघा में सोयाबीन बोया था। 90 क्विंटल अनुमानित निकला, कम उत्पादन अधिक खर्च की स्थिति में कम दाम पर अभी सोयाबीन विक्रय करना और अधिक घाटे का सौदा है। भावांतर योजना में पंजीयन कराया किन्तु मंडी में ले जाने की फुर्सत नहीं मिल रही है। रबी सीजन में गेहूं बोने की तैयारी के चलते भावांतर का तुरंत लाभ नहीं दिख रहा है।

भावांतर से गुमराह

खंडवा जिले के बोरगांव बुजुर्ग निवासी कृषक श्री सुरेश रघुनाथ चौधरी ने भावांतर अंतर्गत 65 क्विंटल के हिसाब से खंडवा मंडी में विक्रय की बाकी भाव के अंतर की राशि वापिस कब, कितनी आयेगी इसकी स्पष्ट जानकारी किसी के पास नहीं है। ऐसे में भावांतर से गुमराह हो रहे किसान।

पूरे गांव को पंजीयन नंबर नहीं मिला

नीमच जिले की मनासा तहसील के ग्राम देवराव के कृषक श्री कमलेश भगवान पाटीदार ने भावांतर योजना में पंजीयन सोयाबीन एवं उड़द का कराया किंतु अभी तक पंजीयन नम्बर नहीं आया जिसके कारण विक्रय नहीं कर पा रहे हैं। 3 हेक्टयर भूमि में डेढ़ हेक्टयर पर सोयाबीन का 26 क्विंटल उत्पादन, 1 हेक्टेयर में 5 क्विंटल उड़द का उत्पादन लिया है। ग्राम के पंचायत भवन में लगे शिविर में ग्राम के अधिकांश कृषकों ने पंजीयन कराया था किंतु किसी का भी नम्बर नहीं आया।

व्यापारी कमा रहे हैं लाभ

ग्राम धरोला विकासखंड – नलखेड़ा जिला आगर मालवा के कृषक श्री गोपाल पाटीदार ने अपनी 6 हेक्टेयर भूमि में से 4 हेक्टेयर में सोयाबीन की फसल लगाई जिसका 18 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त हुआ एवं शेष 2 हेक्टेयर में उड़द की बोनी की जिसका 12 से 14 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन मिला। श्री पाटीदार से भावांतर भुगतान योजना के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया की योजना अच्छी है। किंतु सोसायटी में पंजीयन कराये लगभग 20 से 25 दिन बीत गये लेकिन अभी तक पंजीयन क्रमांक नहीं आया और मंडी व सोसायटी में फसल की उपज को बेचने के लिये व्यापारी सही दाम देने को तैयार नहीं पिछले वर्ष इसी फसल के भाव अच्छे थे। किंतु इस बार भावांतर योजना का लाभ किसान को कम व्यापारी को ज्यादा मिल रहा है।

मॉडल रेट जल्द तय हो

ग्राम तीतरपानी विकासखंड देवरी जिला सागर के कृषक श्री प्रदीप कुमार खरे का कहना है कि मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना किसानों के लिये एक अच्छी योजना है किंतु शासन को जल्द से जल्द फसल का मॉडल रेट  निर्धारित करना चाहिये जिससे किसान को अपनी फसल की उपज को बेचने में सहायता मिल सके। कुछ किसानों ने मॉडल रेट के कारण अपनी फसलों की उपज को बेचने के लिये रोककर रखा है क्योंकि किसान अभी इसी भ्रम में है कि क्या मॉडल रेट निर्धारित किया जायेगा और उपज को सोसायटी या मंडी में किस रेट पर व्यापारी खरीदी करेंगे ऐसे हालात में किसान को अपनी फसल की उपज का सही दाम मिल पायेगा या नहीं।

पंजीयन क्रमांक नहीं आया

शाजापुर जिले के कालापीपल विकासखंड ग्राम खरदौन कलां के कृषक श्री जयनारायण पाटीदार ने अपनी 18 हे. भूमि में सोयाबीन फसल का 10 क्विं. प्रति हे. के मान से उत्पादन प्राप्त किया। श्री पाटीदार ने इस योजना में सोयाबीन की बिक्री हेतु ग्राम की कृषि साख सहकारी संस्था में पंजीयन 15 अक्टूबर को कराया किंतु अभी तक नम्बर नहीं मिला इसके कारण श्री पाटीदार अपनी फसल का विक्रय नहीं कर पा रहे हैं।

उपज विक्रय में परेशानी

ग्राम सुखरास विकासखंड – हरदा जिला हरदा के कृषक श्री सुनील पुनासे ने 18 एकड़ जमीन में उड़द की फसल लगाई 2 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। श्री पुनासे फसल बेचने हेतु भावांतर योजना में स्थानीय कृषि साख सहकारी संस्था पलासनेर में पंजीयन 8 अक्टूबर को कराया था जिसका अभी तक पंजीयन क्रमांक प्राप्त नहीं हो पाया। इससे इनको उपज को बेचने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

धार जिले के ग्राम तिरला

के श्री विमल पिता श्री राधाकृष्ण पटेल ने 15 बीघा भूमि पर 47 क्विंटल सोयाबीन का उत्पादन लिया। अभी विक्रय नहीं किया पर भावांतर योजना में पंजीयन है मंडी में विक्रय करेंगे। वर्तमान में 2600 से 2700 रु. प्रति क्विंटल भाव मंडी में चल रहा है। आगामी खरीफ के लिये 10 क्विंटल बीज के लिये रखकर शेष बेचने की सोच है।

जिले के ही श्री राकेश पिता

श्री अशोक पाटीदार ग्राम बरूजना तह.मल्हारगढ़ जिला मंदसौर बताते हैं कि भावांतर योजना में पंजीयन कराया है किंतु उपज के अंतर का दाम कब मिलेगा। ऐसी स्थिति में उड़द फसल का विक्रय नहीं किया है। वर्तमान में उड़द 4000/- रु. प्रति क्विंटल अच्छी उपज विक्रय हो रही है। जबकि समर्थन मूल्य 5400/- रु. प्रति क्विंटल है। ग्राम में 80 प्रतिशत कृषकों ने पंजीयन कराया है। वर्तमान मूल्य एवं समर्थन मूल्य के अंतर की राशि मिलने की निश्चित अवधि पता चले तो उपज शीघ्र विक्रय करेंगे।

समय-सीमा तय होनी चाहिए

मंदसौर के अफजलपुर के  कृषक श्री राजेन्द्र पिता श्री मानसिंह डागी बताते हैं कि 3 हेक्टेयर में सोयाबीन 40 क्विं. पैदा हुआ भावांतर योजना में पंजीयन कराया है। उपज विक्रय शीघ्र करने का कहा। श्री राजेन्द्र सिंह अपनी 40 क्विंटल सोयाबीन को नियमानुसार योजना से विक्रय कर पायेंगे। वाकी को औने-पौने दाम पर विक्रय करना पड़ेगा।

भावांतर पर भरोसा नहीं

मंदसौर जिले के श्री भागीरथ कंवर लाल पाटीदार ग्राम पिपल्या विशन्या तहसील मल्हारगढ़ बताते हैं कि 22 बीघा में खरीफ फसल बोई थी जिनमें 17 बीघा में सोयाबीन, 4 बीघा में उड़द एवं 1 बीघा में मूंगफली एवं मक्का लगाई थी। फसल कटाई उपरांत घर पर ही रखी है भाव नहीं है। भावांतर में पंजीयन कराया था। भाव आने पर ही मंडी में विक्रय करेंगे। भावांतर पर भरोसा नहीं है।

 

FacebooktwitterFacebooktwitter
www.krishakjagat.org
Share