दूध उत्पादन के कीर्तिमान के बीच जूझता दूध उत्पादक

देश में दूध के उत्पादन को दिशा देने वाला राज्य गुजरात रहा है। वहां के दूध उत्पादकों की सरकारी समिति में दूध उत्पादन की दशा व दिशा को बदलकर रख दिया। इन सहकारी समितियों को बनाने का श्रेय श्री वर्गिस कोरियन को जाता है जिन्होंने देश की श्वेत क्रांति को दिशा दी। गुजरात में बनी दूध उत्पादों की सहकारी समिति अमूल अभी भी देश में अग्रणी है। भले ही गुजरात का वर्तमान में देश में चौथा स्थान हो, जो प्रतिवर्ष 103.5 लाख टन दूध का उत्पादन कर रहा है। वर्तमान में दूध उत्पादन में उत्तर प्रदेश सबसे अग्रणी है। यहां प्रतिवर्ष 233.3 लाख टन दूध का उत्पादन होता है। परन्तु वह दूध उत्पादक राज्य की देश में पहचान नहीं बना पाया। दूध उत्पादन में राजस्थान का देश में दूसरा स्थान आता है। यहां प्रति वर्ष 139.4 लाख टन दूध का उत्पादन होता है व प्रति दिन यहां 90,000 लीटर दूध उत्पादित किया जाता है। दूध उत्पादन में मध्यप्रदेश का भी देश में पांचवां स्थान है, यहां प्रति वर्ष 88.4 लाख टन दूध का उत्पादन होता है। यह राज्य देश के दूध उत्पादन का 6 प्रतिशत दूध उत्पादित करता है। इन दो राज्यों में पिछले दस वर्षों में दूध उत्पादन में अच्छी प्रगति की है। वर्ष 2007-08 में राजस्थान प्रति वर्ष 113.7 लाख टन दूध का उत्पादन कर रहा था। पिछले दस वर्षों में राजस्थान में 25.7 लाख टन की दूध उत्पादन में वृद्धि हुई है, प्रति वर्ष औसतन 2.57 लाख टन, जबकि मध्य प्रदेश में वर्ष 2007-08 में दूध उत्पादन 65.7 लाख टन था जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 88.4 लाख टन पहुंच गया। यहां दस वर्षों में दूध उत्पादन 22.7 लाख टन की वृद्धि हुई है, प्रति वर्ष औसतन 2.27 लाख टन इन दोनों राज्यों में इस उत्पादन को बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। देश में दूध का कुल उत्पादन जो वर्ष 2007-08 में 1079.3 लाख टन था। वर्ष 2017-18 में बढ़कर 1555.0 लाख टन तक पहुंंच गया। देश में दस वर्षों में दूध उत्पादन में 475.7 लाख टन की वृद्धि हुई है, प्रति वर्ष औसतन 47.57 लाख टन की। दूध उत्पादन में हुई इस वृद्धि के फलस्वरूप प्रति व्यक्ति प्रति दिन दूध की उपलब्धता में एक सकारात्मक अन्तर देखने को मिला है। वर्ष 2007-08 में देश में जहां प्रति व्यक्ति को प्रति दिन 260 ग्राम दूध ही मिल पाता था। वर्ष 2017-18 में इस स्थिति में बहुत पड़ा परितर्वन आया है। आज देश में प्रति दिन प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 337 ग्राम तक पहुंच गई है पिछले दस वर्षों में प्रति व्यक्ति 77 ग्राम का इजाफा हुआ है जो एक उपलब्धि है, परन्तु पिछले दिनों दूध के मूल्य में 20-30 प्रतिशत की कमी एक चिन्ता का विषय है जिसकी हानि दूध उत्पादकों को उठानी पड़ रही है परन्तु इसका लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है। दूध की कीमतों के लिए सरकारों को कोई नीति बनानी होगी अन्यथा इस व्यवसाय को झटका लग सकता है।

www.krishakjagat.org

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Share