किसानों को उचित मूल्य दिलाने के उपाय जरूरी

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भोपाल। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश में किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिये तात्कालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के उपाय किये जायेंगे। तात्कालिक उपाय में किसानों को राहत पहुँचाने का काम जारी रहेगा। दीर्घकालिक उपाय में भण्डारण क्षमता बढ़ाई जायेगी, अधिकतम प्रोसेसिंग इकाईयाँ लगायी जायेंगी, मूल्य संवर्धन किया जायेगा और ग्लोबल मार्केट का लाभ लिया जायेगा। मुख्यमंत्री श्री चौहान मंत्रालय में एग्रीकल्चर टास्क फोर्स की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में कृषि विशेषज्ञों के साथ किसानों को अधिक उत्पादन के बाद भी उचित मूल्य नहीं मिलने की चुनौती पर विचार-विमर्श किया गया।
मूल्य संवर्धन प्रोसेसिंग पर जोर
मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन वृद्धि में कीर्तिमान बना है। पर इसके साथ किसानों की उपज का मूल्य गिरने की समस्या सामने आई है। इसके समाधान की आदर्श व्यवस्था की जायेगी। इसके अंतर्गत ऐसी नीति बनाई जायेगी जिसमें कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन और प्रोसेसिंग की व्यवस्था रहेगी। इसमें प्रोसेसिंग इकाईयों और भण्डारण क्षमता के लिये अधोसंरचना बनाने के लिये किसानों के युवा बच्चों को प्रोत्साहित किया जायेगा। प्रदेश में प्याज, आलू, फल-सब्जियों के लिये कोल्ड स्टोरेज श्रंृखला बनायी जायेगी। इसके साथ ही मार्केटिंग पर ध्यान दिया जायेगा।
प्रदेश के विशिष्ट उत्पादों जैसे मालवा के आलू, शरबती गेहूँ, नर्मदा किनारे के क्षेत्र में उत्पादित होने वाली तुअर दाल, नीमच के जीरन में पैदा होने वाली एक कली की लहसुन की मार्केटिंग की जायेगी। उत्पादन बढ़ाने के सभी पक्षों पर तेजी से काम किया गया है जिससे उत्पादन बढ़ा है।
उत्पादन बढऩे के बाद भी किसानों को उचित मूल्य नहीं मिलने की समस्या सामने आई है। इसके लिये तात्कालिक रूप से प्याज आठ रूपये प्रति किलो तथा तुअर, उड़द, मूंग की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई है। इसके बाद भी समस्या के समाधान के लिये दीर्घकालिक उपाय आवश्यक है।

बैठक में दिए गए सुझाव

डॉ. अशोक गुलाटी – कृषि उत्पादों के लिये भण्डारण क्षमता 5 से 10 गुना बढ़ायी जाये। इसके लिये निवेश किया जाये। कृषि उत्पादों की मार्केटिंग के लिये डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क से लिंकेज किया जाये। गुजरात में दुग्ध उत्पादन के लिये चलाये गये ऑपरेशन फ्लड की तरह मध्यप्रदेश में सब्जी उत्पादन के लिये ऑपरेशन वेजीस चलाया जाये।
डॉ. पंजाब सिंह – मध्यप्रदेश की समस्या को चुनौती के रूप में लें। फूड प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन में निवेश के माध्मय से ग्रामीण युवाओं को रोजगार दें। कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ उसकी सुरक्षा के उपायों पर ध्यान दें।
श्री प्रशांत अग्रवाल – भण्डारण और फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में युवाओं के प्रशिक्षण पर ध्यान दें। प्रशिक्षण की व्यवस्था जिला स्तर पर हो। ग्राम स्तर पर सब्जी मंडियों में कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था हो।
डॉ. ज्ञानेन्द्र सिंह – कृषि यंत्रों के कस्टम हायरिंग के तरह भण्डारण और प्रोसेसिंग में भी व्यवस्था की जाये। ग्रामीण क्षेत्र में कृषि उत्पादों के प्रोसेसिंग और भण्डारण के लिये अधोसरंचना विकसित की जाये।
डॉ. आर.के. पाटिल – गाँव – गाँव में प्रोसेसिंग की छोटी इकाईयाँ स्थापित की जायें। प्रोसेस्ड फूड के लिये उत्पाद तैयार किये जायें।
वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया – किसानों के लिये समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित की जाये। भण्डारण क्षमता बढ़ाई जाये।
कृषि मंत्री श्री गौरीशंकर बिसेन – क्वालिटी फूड पर ध्यान देना चाहिये। जैविक उत्पादों के लिये बेहतर अवसर हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री गोपाल भार्गव : भण्डारण क्षमता के लिये राष्ट्रीय संस्थान व्यवस्था करे। किसान कृषि उत्पादों के मूल्यों के उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं हों, ऐसी व्यवस्था की जाये।
वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार – प्याज और टमाटर जैसे उत्पादों की प्रोसेसिंग इकाई जिलों में स्थापित हो।
ऊर्जा मंत्री श्री पारस जैन – वैश्विक बाजार में निर्यात किये जाने योग्य उत्पाद तैयार करने के संयंत्र स्थापित किये जायें।
सहकारिता राज्यमंत्री श्री विश्वास सारंग- सहकारिता के क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग इकाईयाँ लगायी जायें। भण्डारण के लिये मल्टीयूटीलिटी गोदाम बनाये जायें।

 

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