कर्नाटक में मक्का फसल के खेत में वैज्ञानिको और किसानो से चर्चा करते हुए भारत सरकार के कृषि आयुक्त डॉ. एस. के. मल्होत्रा

सरकार हुई सचेत

मक्के का नया कीट फॉल आर्मीवर्म – चेतावनी जारी

(निमिष गंगराड़े)

नई दिल्ली। भारत में सुनहरी मक्का के खेतों पर विदेशी कीट की काली छाया दिखने लगी है। यदि इसका तत्काल नियंत्रण नहीं किया गया तो देश में मक्के की उपज प्रभावित हो सकती है। आईसीएआर के संस्थान नेशनल ब्यूरो ऑफ एग्रीकल्चरल इंसेक्ट रिर्सोसेज बैंगलुरू ने गत 30 जुलाई को ‘पेस्ट अलर्ट’ जारी किया है।

नई दिल्ली से भारत सरकार के एग्रीकल्चर कमिश्नर डॉ. एस.के. मलहोत्रा आर्मीवर्म के प्रकोप का आकलन करने कर्नाटक पहुंच गए हैं। आपने बैंगलुरू से दूरभाष पर कृषक जगत को बताया कि फॉल आर्मीवर्म के अलावा आमतौर पर देखे जाने वाले अन्य कीट भी खेतों में हैं जैसे स्पेडोप्टेरा, कटवर्म, हेलिकोवर्पा आदि। नई और पुरानी पत्तियों को ये नुकसान पहुंचा रहे हैं पर भुट्टों को कोई हानि नहीं है।

उन्होंने कहा कि इन कीटों से किसी भी प्रकार के नुकसान का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। वैसे मैदानी अधिकारियों को जैविक एवं रसायनिक कीट नियंत्रण के निर्देश दिये गये हैं। डॉ. मलहोत्रा ने बताया कि क्षेत्र में कीट प्रकोप से किसानों के मध्य दहशत की स्थिति नहीं है। अधिकारियों का दल क्षेत्र में सेर्वेक्षण एवं परीक्षण कर रहा है। इसके अलावा लेपिडोप्टेरा (टिड्डे, इल्ली, पतंगे) के नियंत्रण के लिए समस्त राज्यों को निर्देश दिये गये हैं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक ये कीट अभी कर्नाटक के 8-9 जिलों में फैला है। अभी केवल मक्के पर ही इसको देखा गया है पर इस मौसम में इनकी आबादी बढ़ सकती है।वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत में इस कीट के आने का रास्ता कुछ भी हो सकता है। ये हवाई कारगो या समुद्री मार्ग से, गंगरोध या अन्य नियंत्रक व्यवस्था से निकलकर भी होगा। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से भी ये कीट प्रवास कर सकते हैं। इस कीट का टिड्डा रात में 100 कि.मी. तक की उड़ान भर सकते हैं और इनकी मादा अपने जीवनकाल में 1 हजार अंडे दे सकती है।
फॉल प्रमुख रूप से मक्का को ही अपना निशाना बनाता है, पर धान, ज्वार पर भी इसका आक्रमण हो सकता है।

रसायनिक नियंत्रण

हालांकि स्टेम बोरर इसको अपना आहार बनाकर नियंत्रित करता है। परन्तु अन्य रसायनिक और यांत्रिक तरीके से भी इनको नष्ट किया जा सकता है। 1. डायमिथिएट 30% ईसी, 2. थायोमिथाक्सम 12.6%, 3. लेम्डासायहेलोथ्रिन 9.5%  जेडसी का प्रयोग कर लेपिडोप्टेरा कीट का नियंत्रण किया जा सकता है।

डॉ. मलहोत्रा ने सलाह दी कि किसान बंधु इंटीग्रेटेड पेस्ट मैनेजमेंट भी कर सकते हैं जिसमें एनपीवी, लाइट ट्रेप प्रमुख हैं।

जैविक नियंत्रण 

फॉल आर्मीवर्म 

www.krishakjagat.org

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