तरल जैव उर्वरक : मिट्टी व पौधों के लिए पर्यावरण सुरक्षित पोषक तत्व

www.krishakjagat.org
Share

मिट्टी में अत्यधिक रसायनिक उर्वरकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरकता व उत्पादकता में प्रतिदिन ह्रास होता जा रहा है अत: वर्तमान समय में जैविक खेती की आवश्यकता बढ़ती जा रही है जैविक खेती में रसायनिक उर्वरकों, सिंथेटिक कीटनाशकों के स्थान पर जैविक खाद व अन्य जैविक उत्पादों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरकता के साथ-साथ उत्पादकता को बढ़ाना मुख्य उद्देश्य है इन जैविक उत्पादों में एक तरल जैव उर्वरक है।
तरल जैव उर्वरक क्या है ?
तरल जैव उर्वरक एक विशेष प्रतिपादन है जिसमें सूक्ष्मजीव व पोषक तत्व मौजूद होते हैं। तरल जैव उर्वरक सूक्ष्म जीवियों से तैयार किया जाता है जो जैविक क्रियाकलापों से पौधों में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों को स्थरीकरन या घुलनशील या पोषक तत्वों को गतिशील बनाये रखने में महत्वपूर्ण है।
तरल जैव उर्वरक के फायदे व विशेषताएं

  •  तरल जैव उर्वरक पौधों को नाइट्रोजन, फास्फोरस व पोटाश की आपूर्ति करते हैं।
  •  ये पोषक तत्वों के सस्ते स्रोत हंै।
  •  इनके प्रयोग से वातावरण में प्रदूषण नहीं होता तथा पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद करते हंै।  द्य तरल जैव उर्वरक पर अधिक तापमान का प्रभाव कम होता है तथा गुणवता प्रभावित नहीं होती है।  द्य इसे किसानों द्वारा प्रयोग करने में आसानी होती है।
  • इससे फसलों की उपज में 10-20 प्रतिशत वृद्धि होती है। द्य इसको 45 डिग्री व तापमान तक भंडारण करने पर गुणवत्ता प्रभावित नहीं होती है। द्य जैव उर्वरक एंटीबायोटिक उत्पन्न करते हंै जिससे मृदाजनित रोगों का प्रभाव कम होता है।
  • जैविक उत्पादों के प्रयोग से उत्पाद का बिक्री मूल्य अधिक मिलता है।
  • तरल जैव उर्वरक मनुष्य, प्राणी व वनस्पति के लिए विषैला नहीं है।
  • तरल जैव उर्वरक हानिकारक अवशेष नहीं छोड़ता है।

तरल जैव उर्वरकों का वर्गीकरण नाइट्रोजन को स्थरीकरन करने वाले:
राइजोबियम– यह दलहनी फसलों में 30-60 किलोग्राम नाइट्रोजन प्रति हेक्टर स्थिर करता है इसका प्रयोग सभी फसलों में किया जाता है।
एजेटोबेक्टर– इसका प्रयोग गेहूँ, जौ, मक्का व सब्जियों में किया जाता है।
एजोस्पिरिलम– इसका प्रयोग धान, ज्वार, गन्ना, बाजरा व सब्जियों में किया जाता है यह 15 -20 किलो प्रति हेक्टर नाइट्रोजन स्थिर करने की क्षमता होती है।
फास्फोरस घोलक जीवाणु: ये जीवाणु अघुलनशील फास्फेट को घुलनशील करके पौधों को उपलब्ध कराते हैं।
पोटेशियम मोबिलाइजिंग जीवाणु: ये जीवाणु सभी तरह की मिट्टी के अघुलनशील पोटाश को घुलनशील बनाते हंै तथा पौधों को उपलब्ध कराते हैं।
प्रयोग विधि:  बीजोपचार- इसमे 1 किलो बीज को 2.5 से 5 मिलीलीटर तरल जैव खाद से उचित पानी मिलाकर उपचारित करें। उपचारित बीज को छांव में 20 से 30 मिनट तक सुखाकर तुरंत बुवाई करें।
मृदा उपचार– एक एकड़ खेत के लिए 250 से 500 मिली लीटर तरल जैव उर्वरक को 40 से 50 किलोग्राम मिट्टी या गोबर की खाद या कपोस्ट में मिलाकर 50 से 75 प्रतिशत नमी के साथ मिलाकर     2-3 दिन रखकर अंतिम जुताई में खेत में मिला दें, एक एकड़ खेत के लिए 250 से 500 मिलीलीटर तरल जैव उर्वरक को सिंचाई जल के साथ बहाकर फसल में 2 बार देना चाहिए
पौध उपचार– 250 से 500 मिलीलीटर तरल जैव उर्वरक प्रति एकड़ का 200 लीटर पानी के साथ घोल तैयार करें तथा पौधों की जड़ को इस घोल के अन्दर 30 मिनट तक रखकर तुरंत बुवाई करें।

www.krishakjagat.org
Share
Share