खरीफ फसलों का समर्थन मूल्य घोषित

किसानों को भारी राहत

180 से 1400 रु. प्रति क्विंटल की बढ़ोत्तर
(विशेष प्रतिनिधि)
नई दिल्ली। चुनावी साल में किसानों का समर्थन हासिल करने एवं उनकी आय को दोगुना करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने खरीफ 2018-19 के लिये न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी की है। इससे खाद्य महंगाई बढऩे के साथ-साथ निर्यात पर असर पडऩे की आशंका है। जानकारों का कहना है कि इस वर्ष के अंत में तीन राज्यों म.प्र., छत्तीसगढ़ एवं राजस्थान में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं इसके अलावा 2019 में लोकसभा चुनाव भी होंगे। इसे देखते हुए एमएसपी में की गई वृद्धि को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा जा रहा है।

गत दिनों प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने खरीफ फसलों का वर्ष 2018-19 का समर्थन मूल्य घोषित कर दिया। इसमें सबसे अधिक 1827 रुपये की वृद्धि नाइजर में की गई है जिससे उसका मूल्य 4050 से बढ़कर 5877 रु. प्रति क्विं. हो गया है। इसी प्रकार मूंग में 1400 एवं सूरजमुखी में 1288 रु. की वृद्धि कर इसका मूल्य क्रमश: 6975 एवं 5388 कर दिया गया है जबकि गत वर्ष इनका मूल्य क्रमश: 5575 एवं 4100 रु. प्रति क्विंटल था। प्रदेश की प्रमुख खरीफ फसल सोयाबीन में 349 रु. की वृद्धि कर इसका समर्थन मूल्य 3399 रु. प्रति क्विं. किया गया है। जबकि गत वर्ष इसका मूल्य 3050 रु. प्रति क्विं. था। धान सामान्य में 200 रु. एवं ग्रेड ‘एÓ में 180 रुपये प्रति क्विं. की वृद्धि कर इनका समर्थन मूल्य क्रमश: 1750 एवं 1770 रु. प्रति क्विं. किया गया है। जबकि गत वर्ष इनका मूल्य क्रमश: 1550 एवं 1590 रु. प्रति क्विं. था।
इसी प्रकार सरकार ने सभी फसलों के एम.एस.पी. में 180 रु. से लेकर 1400 रुपये तक की वृद्धि गत वर्ष की तुलना में की है। गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने बैठक के बाद कहा कि यह वृद्धि 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने की दिशा में उठाया गया कदम है। इसका ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा, क्योंकि किसानों की क्रय शक्ति बढ़ेगी जिसका व्यापक असर होगा। सरकार का कहना है कि एमएसपी की गणना खाद, बीज, कीटनाशक, परिवार के सदस्यों की मेहनत के आधार पर की गई है, परंतु किसान संगठनों का कहना है कि यह गणना ए2 के आधार पर हुई है जबकि संगठनों की मांग है कि एमएसपी की गणना सी2+50 के आधार पर होनी चाहिए जिसमें खाद, बीज, कीटनाशक परिवारों के सदस्यों की मेहनत, डीजल, जमीन का पट्टा किराया तथा अन्य सभी प्रकार की लागत तथा 50 फीसदी अधिक मूल्य शामिल हो।
केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री राधामोहन सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर उत्पादन लागत की गणना प्रस्तुत की है जिसमें समस्त लागतों को शामिल किया गया है। उनके मुताबिक धान की उत्पादन लागत 1166 रु. , मक्का की 1131 रु., अरहर की 3432 रु., सोयाबीन की 2266 एवं कपास की 3433 रु. प्रति क्विंटल आंकी गई है।
सरकार ने कहा है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एवं अन्य प्राधिकृत राज्य एजेंसियां पोषक अनाज सहित अन्य अनाजों के लिए किसानों को मूल्य समर्थन जारी रखेंगे। भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नेफेड), एफसीआईए स्मॉल फारमर्स एग्री-बिजनेस कंसोर्टियम (एसएफएसी) एवं अन्य प्राधिकृत केंद्रीय एजेंसियां दलहन एवं तिलहन की खरीदारी जारी रखेंगे। भारतीय कपास निगम (सीसीआई) कपास के समर्थन मूल्य की निगरानी के लिए नोडल एजेंसी होगा।

  खरीफ 2018-19 के लिये समर्थन मूल्य (रु. प्रति क्विं. में)
फसल 2017-18  2018 -19       वृद्धि लागत के मुकाबले
एमएसपी एमएसपी शुद्ध प्रतिशत रिटर्न’ (प्रतिशत में)
धान, सामान्य 1550 1750 200 12.9 50.09
ग्रेड ए 1590 1770 180 11.32 51.8
ज्वार, हाइब्रिड 1700 2430 730 42.94 50.09
मालदंडी 1725 2450 725 42.03 51.33
बाजरा 1425 1950 525 36.84 96.97
रागी 1900 2897 997 52.47 50.01
मक्का 1425 1700 275 19.3 50.31
अरहर 5450 5675 225 4.13 65.36
मूंग 5575 6975 1400 25.11 50
उड़द 5400 5600 200 3.7 62.89
मूंगफली 4450 4890 440 9.89 50
सूरजमुखी 4100 5388 1288 31.42 50.01
सोयाबीन 3050 3399 349 11.44 50.01
तिल 5300 6249 949 17.91 50.01
रामतिल 4050 5877 1827 45.11 50.01
कपास मीडियम 4020 5150 1130 28.11 50.01
लांग स्टेपल 4320 5450 1130 26.16 58.75
 स्त्रोत : कृषि मंत्रालय 

www.krishakjagat.org
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