14 जून को हुई भोपाल-नर्मदापुरम संभाग की बैठक

संभागीय बैठकों का औचित्य…?

(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। प्रदेश में खरीफ सीजन प्रारंभ हो गया है हालांकि मानसून लगभग 15 दिन देर से आने की संभावना है फिर भी किसान ने तैयारी पूरी कर ली है, कपास किसानों ने तो 2 लाख हेक्टेयर से अधिक रकबे में बोनी भी कर ली है तब शासन को संभागीय बैठकों का ख्याल आया है और आनन-फानन में कार्यक्रम का निर्धारण कर बैठकें शुरू कर दी गई है। गत 14 जून को भोपाल-नर्मदापुरम संभाग की बैठक भी हो गई, परन्तु अब क्या रणनीति बनेगी और उस पर क्या अमल हो सकेगा? हाँ केवल औपचारिकता निभाने की बात है तो खानापूर्ति हो सकती है, समय एवं धन बर्बाद किया जा सकता है परन्तु अब बैठकों का क्या औचित्य है?

कृषि में मुख्यत: दो सीजन प्रमुख हैं- एक खरीफ और दूसरा रबी। अब तीसरे सीजन जायद की फसलें भी राज्य में ली जाने लगी हैं। कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में होने वाली संभागीय बैठकें पूर्व में बहुत गंभीरता से ली जाती थीं परन्तु अब महज औपचारिकता बन कर रह गई है।
50 वर्ष पुरानी परंपरा
हरित क्रांति के बाद लगभग 70 के दशक से प्रदेश के तत्कालीन कृषि सचिव और बाद में सांसद भी रहे श्री एस.सी. वर्मा के समय से शुरू हुई संभागीय बैठकें बहुत महत्वपूर्ण होती है इसमें कृषि से संबद्ध समस्त विभागों की जानकारी एकत्रित कर जिलों एवं संभागों के लिए रणनीति बनायी जाती है। यह बैठकें सीजन शुरू होने के एक या डेढ़ माह पूर्व होती है जिससे सामयिक प्लानिंग की जा सके।
सीजन के पूर्व होने वाली इन बैठकों में बीते सीजन की समीक्षा तथा आने वाले सीजन के कार्यक्रम का निर्धारण किया जाता है जिससे उत्पादन में वृद्धि की जा सके। कौन से जिले में कितना खाद, बीज, कीटनाशक लगेगा तथा उस जिले में कौन-कौन सी फसलों को बढ़ावा देना है इस पर विचार कर रणनीति बनाई जाती है। पूर्व के सीजन में क्या-क्या कमियां रही तथा लक्ष्य पूरा हुआ कि नहीं इस पर विचार किया जाता है।
वर्तमान में संभागीय बैठकों में कृषि, उद्यानिकी, पशुपालन, मछलीपालन, डेयरी एवं सहकारिता विभाग भाग लेते हैं जबकि पूर्व में सिंचाई विभाग एवं बैंकर्स भी भाग लेते थे जिससे सिंचाई के लिए पानी की एवं लोन की पूर्व में ही व्यवस्था की जाती थी।

संभागीय बैठकें अति आवश्यक एवं महत्वपूर्ण होती हैं। इसे गम्भीरता से लेना चाहिए। वर्तमान में अब संभागीय बैठकों का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि किसान की तैयारी पूरी हो गई है साथ ही संभाग एवं जिलों में भी अपने स्तर से खरीफ कार्यक्रम बना लिए गए हैं।

– डॉ. जी.एस. कौशल,
पूर्व कृषि संचालक (म.प्र.)

मात्र औपचारिकता
पिछले 5 वर्षों से प्रदेश को कृषि कर्मण अवार्ड अवश्य मिल रहा है परन्तु समय पूर्व तैयारी के लिए होने वाली संभागीय बैठकें मात्र औपचारिकता बनकर रह गई है। कभी वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक ही बार में सभी संभागों की बैठकें हो जाती हैं कभी सीजन शुरू होने पर यह बैठकें होती हैं। इस वर्ष रबी 2017-18 की समीक्षा एवं खरीफ 2018 के कार्यक्रम निर्धारण के लिए होने वाली संभागीय बैठकें गत 14 जून से शुरू होकर 4 जुलाई तक चलेंगी। तब तक बोनी लगभग लक्ष्य 131.96 लाख हे. की तुलना में आधे रकबे में हो जाने की संभावना है क्योंकि अब केवल मानसून का इंतजार है। यदि समय पर 13-14 जून को मानसून राज्य में आ जाता तो क्या होता, संभागीय बैठकें चल पाती? जिलों के पास कोई प्लानिंग नहीं होती और न कोई पूर्व निर्धारित लक्ष्य।
का वर्षा जब कृषि सुखाने
यहां वही कहावत चरितार्थ हो रही है ‘का वर्षा जब कृषि सुखाने’ समय बीतने के बाद अब बैठकों का कोई औचित्य नहीं। वैसे भी ग्रामीण क्षेत्रों में कहा जाता है कि खरीफ के तीन दिन और रबी के तेरह दिन। मानसून आने के बाद खरीफ की बोनी 3 दिन में हो जाती है तथा रबी की बोनी में 13 दिन लगते हैं। अर्थात मानसून समय पर आता तो खरीफ की बोनी हो जाती और संभागीय बैठकें नहीं हो पाती। दूसरी तरफ प्रदेश के कृषि कर्मचारी- अधिकारी लामबंद होकर हड़ताल पर हैं। जिससे खेती का कार्य पिछडऩे की संभावना बढ़ गई है। संभागीय बैठकों में देरी और हड़ताल का असर खरीफ को प्रभावित कर सकता है। कृषि जैसे महत्वपूर्ण महकमे में इस प्रकार की तुगलकी कार्यप्रणाली से उत्पादन तो प्रभावित होगा ही साथ ही किसान की आमदनी दोगुनी करने का सरकार का सपना भी अधूरा रह सकता है।

 10 आईएएस अधिकारी बदले
 भोपाल। राज्य शासन ने 10 आईएएस अधिकारियों की नवीन पद-स्थापना की है। प्रमुख सचिव पशुपालन श्री अजीत केसरी को संसदीय कार्य सौंपा गया है, वहीं प्रमुख सचिव सहकारिता श्री के.सी. गुप्ता को पशुपालन का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
अधिकारी वर्तमान पद-स्थापना नवीन पद-स्थापना
श्री सभाजीत यादव उप सचिव, उच्च शिक्षा उप सचिव, अजा कल्याण
श्री अनिल सुचारी कलेक्टर, विदिशा अपर प्र.सं, राज्य शिक्षा केन्द्र, भोपाल
श्रीमती भावना वालिम्बे कलेक्टर, जिला रायसेन अपर प्रबंध संचालक, पर्यटन बोर्ड
श्री राकेश श्रीवास्तव उप सचिव, खनिज साधन कलेक्टर, जिला नीमच
श्री कौशलेन्द्र विक्रम सिंह कलेक्टर,  जिला नीमच कलेक्टर, जिला विदिशा
श्रीमती षणमुख प्रिया मिश्रा अपर आयुक्त, वाणिज्यिक कर, इंदौर कलेक्टर, जिला रायसेन
श्री संदीप कुमार माकिन सीईओ, जि.पं. दतिया अपर आयुक्त, परिवहन, ग्वालियर
श्री आशीष भार्गव अपर आयुक्त ननि, भोपाल सीईओ जि.पं., दतिया
श्री दिलीप कुमार यादव एसडीओ, अमरपाटन, सतना सीईओ  जिला पंचायत, डिण्डोरी

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