गेहूं अनुसंधानकर्ताओं को अंतर्राष्ट्रीय सम्मान

वर्ष 2018 का बोरलॉग ग्लोबल रस्ट इनिशिएटिव (बीजीआरआई) पुरस्कार व भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) नई दिल्ली को प्रदान किया गया। डॉ. त्रिलोचन महापात्रा, सचिव कृषि अनुसंधन व शिक्षा विभाग तथा महानिदेशक, भाकृअनुप नई दिल्ली ने भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान करनाल के निदेशक डॉ. जी.पी. सिंह व पुरस्कृत भारतीय गेहूं अनुसंधानकर्ताओं के साथ यह पुरस्कार बीजीआरआई प्रमुख जेनी बोरलॉग लोबे से मारकेश मोरक्को में बीजीआरआई तकनीकी कार्यशाला में गत 14 अप्रैल को ग्रहण किया। इस अवसर पर मोरक्को में भारत की राजदूत सुश्री खेया भट्टाचार्य भी उपस्थित थीं। यह पुरस्कार भारतीय गेहूं अनुसंधान कार्यक्रम द्वारा गेहूं की उन्नत किस्मों के सतत विकास व प्रसार के उत्कृष्ट कार्य के सम्मान में दिया गया है। गेहूं की इन किस्मों की गेरुआ रोग प्रतिरोधिता के कारण गेरुआ रोगों पर नियंत्रण हुआ है, जिसके फलस्वरूप देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकी।
इन्दौर के कृषि वैज्ञानिक भी सम्मानित
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केन्द्र इन्दौर के वैज्ञानिक डॉ. सकूरू वेंकट साई प्रसाद व डॉ. अखिलेश नंदन मिश्र भी इस पुरस्कार से सम्मानित देश की चार संस्थाओं से संबद्ध 20 गेहूं अनुसंधान-कर्ताओं की टीम के सदस्य है, क्षेत्रीय केन्द्रीय इंदौर द्वारा हाल ही के वर्षों में कई उन्नत गेरुआ रोगरोधी किस्मों जैसे एचआई 1544 (पूर्णा), एचआई 1605 (पूसा उजाला), एचआई 8663 (पोषण), एचआई 8713 (पूसा मंगल, एचआई 8737 (पूसा अनमोल) व एचआई 8759 (पूसा तेजस) का विकास किया गया है, जिन्होंने मध्य भारत विशेषकर मध्य प्रदेश में गेहूं का उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

बोरलॉग ग्लोबल रस्ट इनिशिएटिव (बीजीआरआई) की स्थापना हरित क्रांति के पुरोधा व नोबेल शांति पुरस्कार विजेता डॉ. नॉरमन बोरलॉग के सम्मान में हुई थी। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर गेहूं फसल की उत्पादकता बढ़ाना व गेरुआ रोगों से इसका बचाव करना है।
‘बीजीआरआई जीन स्टुअर्डशिप पुरस्कार’ की शुरुआत 2012 में हुई। इसे हर वर्ष आयोजित की जाने वाली बीजीआरआई की तकनीकी कार्यशाला में किसी एक राष्ट्र के गेहूं अनुसंधान कार्यक्रम में संलग्न अनुसंधानकर्ता/ अनुसंधानकर्ताओं को दिया जाता है।

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